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प्रवीण नारायण चौधरी

‘हम आबि रहल छी’ – मैथिली धारावाहिक भाग ९

उपन्यास ‘हम आबि रहल छी’ पर आधारित धारावाहिक लेख – रबीन्द्र नारायण मिश्र (उपन्यासकार) हम आबि रहल छी-भाग ९ 9 साँझमे हम, गंगा, ओकर माता-पिता सभ संगे टीसन बिदा भेलहुँ । गंगाक सार, सरहोजि, पितिऔत भौजी, आ कहि ने के के ओकरासभकेँ बिदा करबाक हेतु टीसन आएल रहैक। अजमेरीगेट दिस प्लेटफार्म नंबर एकसँ ट्रेनकेँ खुजबाक ‘हम आबि रहल छी’ – मैथिली धारावाहिक भाग ९

स्कूलक संस्कार सँ बहुत बेसी कारगर छैक संयुक्त परिवार सँ प्राप्त संस्कार

ओ बाबी, नानी, काकी आ माँ   सारा संसार घुमलहुँ। बहुतो लोक-समाजक जड़ि बुझबाक प्रयत्न कयलहुँ, जतबा सम्भव भेल। मानव समाज सब तैर एक्के रंग बुझायल, लेकिन किछु बात भिन्न छल। घुरि-फिरि हमरा जे सब सँ बेसी नीक लागल ओ बुझेली हमर बाबी, हमर नानी, हमर काकी आ हमर माँ। हमरा अपन बाप-पित्ती आ जेठजन स्कूलक संस्कार सँ बहुत बेसी कारगर छैक संयुक्त परिवार सँ प्राप्त संस्कार

मिथिला रोजगार मेलाक आयोजन पर एक दृष्टि

बिन मांगल सलाह देबय त ओकर मोजर हेतय!! मोजर त नहिये टा हेतय! तैयो, हमरा जेहेन बकवादी लोक केँ रहल नहि जाइछ त किछु-किछु बकिते रहैत छी आ ताहि मे जँ लय योग्य नीक सलाह भेटि जाय केकरो त ल’ लेथिन से सोच रहैत अछि। सोच टिटहीक यैह न रहैछ जे राति सुतब त टांग मिथिला रोजगार मेलाक आयोजन पर एक दृष्टि

रामचरितमानस मोतीः अत्रि मिलन एवं स्तुति

स्वाध्याय – प्रवीण नारायण चौधरी रामचरितमानस मोती अत्रि मिलन एवं स्तुति १. चित्रकूट सँ प्रभु श्री रामचन्द्रजी सब मुनि लोकनि सँ विदा लैत सीताजी सहित चलि देलाह! जखन प्रभु अत्रिजीक आश्रम मे गेलाह त हुनकर आगमन सुनिते महामुनि हर्षित भ’ गेलथि। शरीर पुलकित भ’ गेलनि। अत्रिजी उठिकय दौड़ि पड़लाह। हुनका दौड़िते अबैत देखि श्री रामजी रामचरितमानस मोतीः अत्रि मिलन एवं स्तुति

राजस्थान में भी मनाया गया जानकी नवमी

30 अप्रैल 2023 । मैथिली जिन्दाबाद!! जितेन्द्र छंगाणी, जोधपुर। राजस्थान के जोधपुर में चौपासनी हाउसिंग बोर्ड कॉलोनी के सेक्टर 17 E में मीरा पार्क में शिव कृष्ण मंदिर हैं। यहां भगवान राम दरबार भी विराजमान है। इस मंदिर को बने लगभग 27 वर्ष हो गए । यहॉ कृष्ण राधा जन्मोत्सव के साथ शिवरात्री, नवरात्रि व राजस्थान में भी मनाया गया जानकी नवमी

गाम घुरि आउ – मैथिली कविता

कविता – पंकज चौधरी, बलिया, मधुबनी गाम घुरि आउ बहुते दिन केलौं मेहनत मजूरी खूब कमेलैव देश-विदेश नै किछु हाथ लागल गामक सनेश हयौ, सुनु, गाम घुरि आउ! धिया पुता खूब पढेलहुँ, माय-बाबू के जगह मॉम-डैड सिखेलहुँ मातृभाषा छोड़ि अंग्रेजी सिखेलहुँ सोहारी छोड़ि पिज़्ज़ा खुएलहुँ हयौ, सुनु, गाम घुरि आउ! जे बाट छल कच्ची ओ गाम घुरि आउ – मैथिली कविता

जानकी नवमीः मैथिली दिवस

लेख – कुमुद मोहन झा मैथिली दिवस – जानकी चरित्र सँ समाज केँ प्रेरणा लेबाक फराक दृष्टिकोण मिथिलेश कुमारी जानकी के प्राकट्य दिवस बैशाख शुक्ल नवमी तिथि केँ मैथिली दिवस के रूप मे मनाओल जाइत अछि. ई पवित्र तिथि सीता नवमी आ’ जानकी नवमीक नाम सँ प्रसिद्ध अछि. एहि तिथि मे मिथिलाक पवित्र भूमि पर जानकी नवमीः मैथिली दिवस

रामचरितमानस मोतीः जयन्तक कुटिलता आ फल प्राप्ति

स्वाध्याय – प्रवीण नारायण चौधरी रामचरितमानस मोती जयन्तक कुटिलता आ फल प्राप्ति १. एक बेर सुन्दर-सुन्दर फूल सब तोड़िकय श्री रामजी अपना हाथ सँ तरह-तरह के गहना बनौलनि आर सुन्दर स्फटिक शिला पर बैसि प्रभु बड़ा आदरक संग ओ गहना सब श्री सीताजी केँ पहिरौलनि आ सजौलनि। २. ताहि घड़ी देवराज इन्द्रक मूर्ख पुत्र जयन्त रामचरितमानस मोतीः जयन्तक कुटिलता आ फल प्राप्ति

ब्राह्मणक सम्मान स्वयं ब्राह्मण सहित सब समाज केँ करहे टा पड़त

ब्राह्मण विरूद्ध विषवमन सँ केकर लाभ? ब्राह्मण प्रति शत्रुताक भाव जाहि तरहें प्रचारित-प्रसारित कय केँ ब्राह्मणेतर समाज केँ गोलबन्द करैत सत्ताक राजनीति आरम्भ भेल स्वतंत्र भारतक किछु पैघ राज्य सब मे, जाहि मे बिहार आ यूपी सर्वोपरि अछि – तेहेन अवस्था मे अन्तर्द्वंद्वक अवस्था एखन किछु नहि देखलहुँ अछि। आबय वला समय मे देखब। ब्राह्मण ब्राह्मणक सम्मान स्वयं ब्राह्मण सहित सब समाज केँ करहे टा पड़त

रामचरितमानस मोतीः अरण्यकाण्ड तृतीय सोपान मंगलाचरण

स्वाध्याय – प्रवीण नारायण चौधरी रामचरितमानस मोती अरण्यकाण्डः तृतीय सोपान-मंगलाचरण श्लोक : मूलं धर्मतरोर्विवेकजलधेः पूर्णेन्दुमानन्ददं वैराग्याम्बुजभास्करं ह्यघघनध्वान्तापहं तापहम्‌। मोहाम्भोधरपूगपाटनविधौ स्वःसम्भवं शंकरं वंदे ब्रह्मकुलं कलंकशमनं श्री रामभूपप्रियम्‌॥१॥ धर्मरूपी वृक्षक मूल, विवेकरूपी समुद्रक आनन्द देनिहार पूर्णचन्द्र, वैराग्यरूपी कमल केर (विकसित करयवला) सूर्य, पापरूपी घोर अन्धकार केँ निश्चय टा मिटेनिहार, तीनू ताप केर हरनिहार, मोहरूपी मेघक समूह केँ छिन्न-भिन्न रामचरितमानस मोतीः अरण्यकाण्ड तृतीय सोपान मंगलाचरण