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प्रवीण नारायण चौधरी

मुजफ्फरपुरक बरुराज मे काँवरिया पर पथराव सँ स्थिति तनावग्रस्त

३१ जुलाई २०१९. मैथिली जिन्दाबाद!! मुजफ्फरपुर केर बरुराज मे महादेव केर पूजा-अर्चना लेल जा रहल महिला कांवरिया पर समुदाय विशेष द्वारा पथराव आर तदोपरान्त आपसी तनावक स्थितिक समाचार अछि। ५००+ महिला एवं लड़की काँवड़िया पर मस्जिद केर पास सँ पथराव, बचाव मे आयल पुलिस केँ दौड़ायल गेल   “काँवड़िया पर पथराव करैत राष्ट्र विरोधी नारा मुजफ्फरपुरक बरुराज मे काँवरिया पर पथराव सँ स्थिति तनावग्रस्त

कियैक कयल जाइछ सोम प्रदोष व्रत – एक विशेष माहात्म्य

स्वाध्याय लेख – सावन विशेष साभार – वेबदुनिया सोम प्रदोष व्रत केर पौराणिक व्रतकथा केर अनुसार एक नगर मे एक ब्राह्मणी रहैत छलीह। हुनक पति केर स्वर्गवास भऽ गेल छलन्हि। हुनकर आब कियो आश्रयदाता नहि रहलन्हि ताहि सँ भोर होइत देरी ओ अपन पुत्र संग भीख मांगय निकलि पड़ैत छलीह। भिक्षाटन सँ मात्र ओ स्वयं आर कियैक कयल जाइछ सोम प्रदोष व्रत – एक विशेष माहात्म्य

अटल मिथिला सम्मान समारोह दिल्ली मे १७ अगस्त केँ होयत: उपराष्ट्रपति सेहो संभावित अतिथि

३१ जुलाई २०१९. मैथिली जिन्दाबाद!! मैथिली भाषा केँ संवैधानिक मान्यता दियौनिहार प्रखर भारतीय नेता, पूर्व प्रधानमंत्री एवं भारत रत्न अटल विहारी बाजपेयी जी केर नाम पर एहि भाषा केँ आगाँ बढेनिहार विभिन्न व्यक्तित्वक संग आनहु भाषा-संस्कृति केर ओहेन महत्वपूर्ण व्यक्ति जे मैथिली-मिथिला प्रति सद्भावना रखैत छथि तिनका सभ केँ ‘अटल मिथिला सम्मान’ देल जेबाक लेल अटल मिथिला सम्मान समारोह दिल्ली मे १७ अगस्त केँ होयत: उपराष्ट्रपति सेहो संभावित अतिथि

जनकपुर मे मधुश्रावणी पूजनिहारि नव-विवाहिताक सम्मान लेल समारोह

ऋषिकेश झा, ३० जुलाई २०१९. मैथिली जिन्दाबाद!! मैथिल ब्राह्मण महासभा नेपाल द्वारा जनकपुरक जानकी मन्दिर प्रांगण मे मधुश्रावणी उत्सव पर नवविवाहिता पबनैतिन लोकनि केर सम्मान आ शुभकामना आदान-प्रदान कार्यक्रमक आयोजन कयल गेल अछि। जानकी मन्दिर प्रांगण मे काल्हि श्रावण मासक सोमवारी प्रदोष व्रतक दिवस पर आयोजित मधुश्रावणी पाबनि पूजनिहाइर लोकनिक अपार भीड़ लागल। मिथिला मे जनकपुर मे मधुश्रावणी पूजनिहारि नव-विवाहिताक सम्मान लेल समारोह

सावन महीना मे कि खाय आ कि नहि खाय – कियैक नहि खाय

सावन विशेष आलेख सावन मास मे कि खाय, कि नहि खाय – साभारः वेब दुनिया, अनुवादः प्रवीण नारायण चौधरी   श्रावण मास मे किछु खास चीज बिल्कुल नहि खायल जाइत अछि। एहि बरसैत-गरजैत मौसम मे किछु फल सब्जी केँ नहि खेबाक चाही। कियैक तँ एहि सब्जी सभ मे एहि समय विषैलापन बढ़ि जाइत छैक जे सावन महीना मे कि खाय आ कि नहि खाय – कियैक नहि खाय

युवा रचनाकार बीरेन्द्र कुमार सिंह केर मैथिली रचना

साहित्य युवा कवि-लेखक बीरेन्द्र कुमार सिंह केर साहित्य रचना १. कविता – “सहोदर सँ लगियौ छाती” प’ह फटलै कोइली कुहकलै सिहरि उठलै छाती मीठे-मीठे कूक सुनादे बगड़िया गबैत चल सुन्दर पाँती कोसी कमला झिर-झिर बहैय’ एहि मिथिला-मधेशक माटी खा ले हमर किरिया सप्पत हम सभ नाती-परनाती जागू यौ कक्का डेग उठबियौ “सहोदर सँ लगियौ छाती” युवा रचनाकार बीरेन्द्र कुमार सिंह केर मैथिली रचना

दिसम्बर २२-२३ केँ विराटनगर मे होयवला १७म अन्तर्राष्ट्रीय मैथिली सम्मेलन लेल दोसर बैसार

२९ जुलाई २०१९. मैथिली जिन्दाबाद!! १७म अन्तर्राष्ट्रीय मैथिली सम्मेलन, २२-२३ दिसम्बर, विराटनगर, नेपाल वास्ते दोसर वैसार सम्पन्न २७ जुलाई २०१९ विराटनगर केर बखरी स्थित मैथिली स्टडी प्वाइन्ट मे १७म अन्तर्राष्ट्रीय मैथिली सम्मेलन जे आगामी २२-२३ दिसम्बर २०१९ में आयोजित होयबाक नियार अछि ताहि वास्ते अमैस केर अध्यक्ष डा. महेन्द्र नारायण राम केर अध्यक्षता मे एकटा दिसम्बर २२-२३ केँ विराटनगर मे होयवला १७म अन्तर्राष्ट्रीय मैथिली सम्मेलन लेल दोसर बैसार

बिना पूरा बात बुझने अपन निष्कर्ष निकालब बुद्धिमत्तापूर्ण कार्य नहि

विजडम मोन पड़ि गेल अछिः एक अन्तर्राष्ट्रीय पत्रिका   अपन जीवन केर निर्माणकर्ता माता-पिताक संग गुरु-अभिभावक आ परिवेश केँ मानैत छी, प्रकृति जाहि मे पललहुँ-बढलहुँ, विद्यालय जाहि मे शिक्षा ग्रहण कयलहुँ आ संगी-साथी जेकरा सभक संग हँसैत-कनैत, खेलाइत-धुपाइत या लड़ैत-झगड़ैत जेनाहु समय बितबैत आगू बढलहुँ तेकरा सब केँ प्रणाम करैत छी।   आगू मित्रता भेल बिना पूरा बात बुझने अपन निष्कर्ष निकालब बुद्धिमत्तापूर्ण कार्य नहि

सोमवारी व्रत कथा

श्रावण मासक दोसर सोमवारी – सोमवारी व्रत कथा   जय भोलेनाथ! जय गौरीशंकर!!   श्रावण पवित्र मासक सोमवारी तिथि – सोमवारी व्रतक विधान मिथिला मे सेहो ओतबे प्रामाणिक आ अधिकतर परिवार मे एहि व्रत उपासनाक परम्परा भेटैत अछि।   सोमवारी व्रत कथा सेहो ओतबे महत्वपूर्ण अछि –   एक गोट व्यापारी व्यापार आ अन्य समस्त सोमवारी व्रत कथा

बेटी पुछलनि बाप सँ – हमर कोन गाम थिक (लघुकथा)

लघुकथा – रूबी झा सासूर सँ दुइ-चारि बेर रैस-बइस कँ आयला के बाद बहुत दुःखी भऽ पुछलखिन्ह अन्नपूर्णा अपन पिता सँ – बताऊ, हम कोन गामक छी आ हमर घर कतय अछि? अचंभित भय बजलाह नेन कान्त जी (अन्नपूर्णा के पिता) – ई की तोँ पुछैय छैं एखन, ई सवाल पूछैय के कि परोजन? अन्नपूर्णा बेटी पुछलनि बाप सँ – हमर कोन गाम थिक (लघुकथा)