रामचरितमानस मोतीः भरतजी चित्रकुटक मार्ग मे
स्वाध्याय – प्रवीण नारायण चौधरी रामचरितमानस मोती भरतजी चित्रकूटक मार्ग मे १. एहि प्रकारे भरतजी मार्ग मे चलल जा रहल छथि। हुनकर हालत देखि मुनि ओ सिद्धगण लोकनि सिहरि रहल छथि। भरतजी जखनहि ‘राम’ कहिकय लम्बा साँस लैत छथि, तखनहि मानू चारू दिश प्रेम उमड़ि पड़ैत अछि। प्रेम और दीनता सँ पूर्ण हुनकर वचन सुनि … रामचरितमानस मोतीः भरतजी चित्रकुटक मार्ग मे

