रामचरितमानस मोतीः अरण्यकाण्ड तृतीय सोपान मंगलाचरण
स्वाध्याय – प्रवीण नारायण चौधरी रामचरितमानस मोती अरण्यकाण्डः तृतीय सोपान-मंगलाचरण श्लोक : मूलं धर्मतरोर्विवेकजलधेः पूर्णेन्दुमानन्ददं वैराग्याम्बुजभास्करं ह्यघघनध्वान्तापहं तापहम्। मोहाम्भोधरपूगपाटनविधौ स्वःसम्भवं शंकरं वंदे ब्रह्मकुलं कलंकशमनं श्री रामभूपप्रियम्॥१॥ धर्मरूपी वृक्षक मूल, विवेकरूपी समुद्रक आनन्द देनिहार पूर्णचन्द्र, वैराग्यरूपी कमल केर (विकसित करयवला) सूर्य, पापरूपी घोर अन्धकार केँ निश्चय टा मिटेनिहार, तीनू ताप केर हरनिहार, मोहरूपी मेघक समूह केँ छिन्न-भिन्न … रामचरितमानस मोतीः अरण्यकाण्ड तृतीय सोपान मंगलाचरण








