सीता आ हम
सब सँ पहिने ‘सीता’ एक अवतारी नारी रहथि से मन सँ कनिकाल लेल बगल मे राखू। आर, एकदम अपनहि जीवन जेकाँ सब कियो, नारी हो या पुरुष, सब कियो हुनकर जीवन सँ अपन जीवन केँ मिलाउ। चलू पुनौराधाम। महाराजा (पिता, जनक) खेत जोतय गेलाह। महाराजा ई अभिमान छोड़िकय गेलाह जे हम राजा छी, हमरा … सीता आ हम




