रामचरितमानस मोतीः इन्द्र आ वृहस्पति संवाद
स्वाध्याय – प्रवीण नारायण चौधरी रामचरितमानस मोती इंद्र-बृहस्पति संवाद १. भरतजीक प्रेमक प्रभाव देखि देवराज इन्द्र केँ सोच भ’ गेलनि जे कहीं हिनक प्रेमवश श्री रामजी वापस न आबि जाइथ आ हमरा सभक बनल-बनायल कार्य बिगड़ि नहि जाय। संसार भला लेल भला आ ब’द लेल ब’द (खराब लेल खराब) होइछ। मनुष्य जेहेन अपने होइत अछि … रामचरितमानस मोतीः इन्द्र आ वृहस्पति संवाद

