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प्रवीण नारायण चौधरी

विद्यापति, मैथिली, मिथिला सबहक सझिया छथि

विशेष सम्पादकीय मैथिली फिल्म व बालीवूड मे कार्यरत मिथिलाक प्रतिनिधित्व कएनिहार संजीव पूनम मिश्र द्वारा एकटा सार्वजनिक आह्वान करैत हिन्दी मे कहल गेल अछि जे विद्यापति बाबा केँ रिहा कय दियौन भाइ, कहिया धरि हिनकर आत्मा केँ कनायब। हमरा सबहक भाषा, संस्कृति ओ पहिचानक एकटा प्रमुख अंग मैथिली फिल्म मे समर्पित स्रष्टा लोकनि पर हम विद्यापति, मैथिली, मिथिला सबहक सझिया छथि

गीताक स्वाध्याय – अर्जुनक शोक

गीताक तेसर बेरुक स्वाध्याय (निरंतरता मे…. अध्याय १ केर २०म श्लोक उपरान्त) पैछला दिन पढने रही जे धृतराष्ट्र अपन पुत्र दुर्योधनक पक्ष आर विपक्षी पाण्डव केर पक्षक अवस्था ‘धर्मक्षेत्र कुरुक्षेत्र’ मे कि अवस्था अछि, ताहि पर संजय द्वारा दुर्योधनक अन्तर्मनक विचलन आर गुरु द्रोण सँ वार्तालाप मे दुनू पक्षक योद्धा-महारथी सबहक चर्चा करैत कुरु सेनाक गीताक स्वाध्याय – अर्जुनक शोक

कवि बुद्धिनाथ झा केर एकल कविता पाठ ‘विवेकपुरम’ मे

मधुबनी, दिसम्बर २४, २०१५. मैथिली जिन्दाबाद!! आइ मधुबनी मे मैथिली साहित्यकार-पत्रकार-संपादक-प्रकाशक-उद्घोषक-कवि-अभियानी हर रूप मे सूपर हिट फेस “अजित आजाद” केर आवास ‘विवेकपुरम’ मे मैथिलीक महान कवि शिरोमणि “बुद्धिनाथ झा – नागदह” केर एकल कविता पाठ वाचन कार्यक्रमक आयोजन कैल गेल अछि। निशान्तजी, दिलीप झा, प्रजापति ठाकुर, चण्डेश्वर खाँ, सतीश साजन, दमन कुमार झा, अरविन्द सिंह कवि बुद्धिनाथ झा केर एकल कविता पाठ ‘विवेकपुरम’ मे

मुम्बई केर अन्तर्राष्ट्रीय मैथिली सम्मेलनक याद रहत चौजुगी

प्रकाश कमती, विरार, मुम्बई। दिसम्बर २४, २०१५. मैथिली जिन्दाबाद!! आँखि सँ नोर बहैत समापन समारोहक संग सम्पन्न भेल अंतर्राष्ट्रीय मैथिली सम्मेलनक बारहम वर्षगांठ जेकरा सम्पूर्ण मैथिली समाज अपन भाषाक अधिकार दिवसक रुप मे मनबैत छैथ। हालाँकि अहि सम्मेलन केर आयोजन 2003 सँ कैल जा रहल अछि। जहिया भोगेन्द्र झा जीक अनुरोध पर आडवाणी जी आदरणीय मुम्बई केर अन्तर्राष्ट्रीय मैथिली सम्मेलनक याद रहत चौजुगी

ऐजुब केर ताज्जुब करऽवला मैथिली कविता ओ गीत

मातृभाषा सँ प्रेमक मिसाल नेपाल केर मिथिला मे देखय लेल भेटैत अछि, भारतक मिथिला मे राजनीतिक चाइल चलिकय आर किछु भलमानुस मैथिल द्वारा मैथिली पर अजेगरक कुंडली मारि बैसि जेबाक कारण मैथिली पर सेहो उच्चवर्गक भाषा बनबाक आरोप लगैत अछि। मैथिली भाषा मे सृजनशीलताक प्रकृति छैक आर एहि सँ कोनो कवि-मन तुरन्त प्रभावित होएत अछि। ऐजुब केर ताज्जुब करऽवला मैथिली कविता ओ गीत

कीर्ति आजाद ‘आजाद’ छथि

विशेष संपादकीय डीडीसीए भ्रष्टाचार मुद्दा पर पैछला ९ वर्ष सँ प्रकाश दैत आबि रहला भारतीय पूर्व क्रिकेट खेलाड़ी सह भाजपा सँ तीन-तीन बेर विजेता दरभंगा-सांसद यानि वन एण्ड ओनली ‘कीर्ति आजाद’ केँ काल्हि भाजपा अनुशासनात्मक कार्रबाई करैत पार्टी सँ सस्पेन्ड कय देलकैन। कीर्ति आजाद अपन विचार रखबाक तौर-तरीका मे बेवाकीपन लेल मशहूर छथि। हुनकर बेवाकीपन कीर्ति आजाद ‘आजाद’ छथि

पं. यन्त्रनाथ मिश्र जयन्ति सह स्मृति दिवस जमुथरि मे

सतीरमण झा, जमुथरि, मधुबनी। दिसम्बर २४, २०१५. मैथिली जिन्दाबाद!! आइ झंझारपुरक जमुथरि गाममे संस्कृत, हिन्दी ओ विशेषकय मैथिलीक साहित्यकार, कवि, कथाकार, गीतकार, निबन्धकार, सम्पादक प• यन्त्रनाथ मिश्र केर जयन्ती सह स्मृति दिवस मनायल गेल अछि। एहि अवसर पर मैथिलीक मूर्धन्य विद्वान् प्रोफेसर विश्वेश्वर मिश्रक अध्यक्षतामे एक साहित्यिक परिचर्चा कार्यक्रम आयोजित भेल । जाहिमे मुख्य अतिथि पं. यन्त्रनाथ मिश्र जयन्ति सह स्मृति दिवस जमुथरि मे

अन्तर्राष्ट्रीय मैथिली सम्मेलनः दिन मे सेमिनार, राति मे शारदा सिन्हा

मुम्बई, दिसम्बर २३, २०१५. मैथिली जिन्दाबाद!! १२म अन्तर्राष्ट्रीय मैथिली सम्मेलन काल्हि मैथिली अधिकार दिवस यानि २२ दिसम्बर सँ मुम्बई केर विरार मे आरंभ भेल अछि। काल्हि विशाल शोभा यात्रा सँ आरंभ कार्यक्रमक उद्घाटन सत्र मे अनेकानेक वक्ता लोकनि अपन विचार मैथिलक विशिष्ट पहिचान ओ वैशिष्ट्य संस्कृति – भाषा – साहित्य केर रक्षार्थ वृहत् जागरण अभियानक अन्तर्राष्ट्रीय मैथिली सम्मेलनः दिन मे सेमिनार, राति मे शारदा सिन्हा

१२म अन्तर्राष्ट्रीय मैथिली सम्मेलनक पहिल दिन भव्यतम्

प्रकाश कमती, विरार, मुम्बई। दिसम्बर २३, २०१५. मैथिली जिन्दाबाद!! बारहम अंतर्राष्ट्रीय मैथिली सम्मलेन केर आगाज महाराष्ट्रक उपनगर केर विरार HDIL मैदान में द्विदिवसीय आयोजन २२ दिसम्बर मैथिली अधिकार दिवस केर उपलक्ष्य आरम्भ भऽ चुकल अछि। ई 23 दिसंबर धैर चलत। कार्यक्रम केर आयोजन शोभा यात्रा सँ शुरू भेल जे शायद प्रथम बेर मैथिल केर भीख नै १२म अन्तर्राष्ट्रीय मैथिली सम्मेलनक पहिल दिन भव्यतम्

गीताक अध्ययन सँ जीवनक सब बाधा दूर होयत…..

जीवन मे तेसर बेर गीताक स्वाध्याय आइ सँ शुरु भेल….. पहिल दिन आइ पहिले अध्यायक मात्र २० गो श्लोक पढलहुँ…. धृतराष्ट्रक प्रश्न सँ प्रारंभ – “धर्मक्षेत्र कुरुक्षेत्र मे युद्धक इच्छा सँ समवेत (एकत्र) भेल ‘हमर लोक’ आ पाण्डव कि कय रहल अछि संजय?” – एहि पाँति मे बहुत रास दर्शन निहित अछि। धर्मक्षेत्र केर रूप गीताक अध्ययन सँ जीवनक सब बाधा दूर होयत…..