गाम मोन पड़ैयऽ
कविता – डा. धनाकर ठाकुर सुग्गा, मैना, गीदड़, गदहा, सपनौर सांप, खिखिर, चील, घोरन, चुट्टी पर लिखैत चलू जीवन भरि कहियो ने होयत बाबू कैलाश छुट्टी छोडि देलक जे समाज सामा पौतीके आबहुँ समय निकालू कैलाश दिय संभारि पोथीमे पोती के मैथिलीपुत्र कैलाश जागू लिय कलम बिना मोसि के अधुना कियो नहि बुझथि मर्म दादीक … गाम मोन पड़ैयऽ








