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प्रवीण नारायण चौधरी

अद्भुत गणितज्ञ रामानुजन

गणितमे भारतीय गणितज्ञक योगदान अद्भुत आ अविस्मरणीय अछि। प्राचीनकालसँ संख्या पद्धति, शून्य आ दशमलव आदि महत्वपूर्ण खोज यैहसब कयलथि। एक महान भारतीय गणितज्ञ भेलाह रामानुजन। ‘गणितज्ञहुके गणितज्ञ’ तथा ‘संख्याके जादूगर’ आदि कतेको लोकचर्चित उपाधि हिनका भेटलन्हि। ३३ वर्षक जीवनकालमे हिनकाद्वारा लगभग ५००० प्रमेयक सूत्रपात भेल अछि। हिनक शोधकाजकेँ पूर्ण व्याख्यामे पैघ-पैघ गणितज्ञ लोकनि एखनधरि जुटल अद्भुत गणितज्ञ रामानुजन

रामचरितमानस मोतीः भरद्वाज-याज्ञवल्क्य संवाद एवं प्रयाग माहात्म्य

स्वाध्याय – प्रवीण नारायण चौधरी रामचरितमानस मोती १४. याज्ञवल्क्य-भरद्वाज संवाद आ प्रयाग माहात्म्य   तुलसीकृत् रामचरितमानस मे रामायणक परिचय आ महत्व केर शुरुआती भाग पूरा कयलाक बाद आब श्री रामचन्द्र जीक लीला स्वरूप रामायण कथाक अवतरण दुइ महान ऋषिक आपसी संवाद सँ उतारबाक कार्य आरम्भ कयल जा रहल अछि।   १. भरद्वाज मुनि प्रयाग मे रामचरितमानस मोतीः भरद्वाज-याज्ञवल्क्य संवाद एवं प्रयाग माहात्म्य

रामचरितमानस मोतीः मानस केर रूप आर माहात्म्य

स्वाध्याय – प्रवीण नारायण चौधरी रामचरितमानस मोती १३. मानस केर रूप और माहात्म्य   ई रामचरितमानस जेहेन अछि, जाहि प्रकारे बनल अछि और जाहि हेतु सँ जग भरि मे एकर प्रचार भेल, ओ सब कथा हम (तुलसीदास) श्री उमा-महेश्वर केँ स्मरण कय केँ कहैत छी। श्री शिवजीक कृपा सँ हुनकहि हृदय मे सुन्दर बुद्धि केर रामचरितमानस मोतीः मानस केर रूप आर माहात्म्य

कि भारतीय राज्य केँ भाषाई आधार पर विभाजित कयल जेबाक चाही?

लेख – इन्दिरा बसु (अनुवादः प्रवीण नारायण चौधरी) स्रोतः https://www.thequint.com/news/india/linguistic-division-of-states-in-india-history कि भारतीय राज्य केँ भाषाई आधार पर विभाजित कयल जेबाक चाही? भाषाई राज्य केर मांग जारी अछि जेना कि गोरखालैंड के मांग, मिथिला राज्य केर मांग उभरय सँ स्पष्ट अछि….. वर्ष 1947 छल। भारत अधरतियाक बच्चा छल, जे हजारों क्रांतिकारी और आम लोकक संघर्ष सँ कि भारतीय राज्य केँ भाषाई आधार पर विभाजित कयल जेबाक चाही?

रामचरितमानस मोतीः मानस निर्माण केर तिथि

स्वाध्याय – प्रवीण नारायण चौधरी रामचरितमानस मोती १२. मानस निर्माण केर तिथि सादर सिवहि नाइ अब माथा। बरनउँ बिसद राम गुन गाथा॥ संबत सोरह सै एकतीसा। करउँ कथा हरि पद धरि सीसा॥२॥ आब हम आदरपूर्वक श्री शिवजी केँ माथ झुकाकय श्री रामचन्द्रजीक गुण केर निर्मल कथा कहैत छी। श्री हरिक चरणपर माथ रखिकय संवत्‌ १६३१ रामचरितमानस मोतीः मानस निर्माण केर तिथि

रामचरितमानस मोतीः श्री रामगुण और श्री रामचरित् केर महिमा

स्वाध्याय – प्रवीण नारायण चौधरी रामचरितमानस मोती ११. श्री रामगुण और श्री रामचरित्‌ केर महिमा रामचरितमानस मोती अन्तर्गत विगत केर १० अध्याय आ ताहि के अन्तिम मे राम केर नाम के महिमा – नाम वंदना उपरान्त आइ श्री रामचन्द्र जीक गुण आ हुनक कथा (रामचरित्) केर महिमा पर महाकवि तुलसीदास जी केर ई विलक्षण सन्देश रामचरितमानस मोतीः श्री रामगुण और श्री रामचरित् केर महिमा

रामचरितमानस मोतीः श्री नाम वन्दना तथा नाम महिमा

स्वाध्याय – प्रवीण नारायण चौधरी रामचरितमानस मोती रामचरितमानस मोतीः नाम वन्दना आ नाम महिमा १. श्री रघुनाथजीक नाम ‘राम’ केर वंदना करैत छी जे कृशानु (अग्नि), भानु (सूर्य) और हिमकर (चन्द्रमा) केर हेतु अर्थात्‌ ‘र’ ‘आ’ और ‘म’ रूप सँ बीज छथि। २. ओ ‘राम’ नाम ब्रह्मा, विष्णु और शिवरूप छथि। ३. ओ वेद केर रामचरितमानस मोतीः श्री नाम वन्दना तथा नाम महिमा

लव मैरिज कियै बढि गेल – दहेज लेबाक दुष्परिणाम एहि लोक सँ परलोक धरि की

विचार – प्रवीण नारायण चौधरी स्वर्णलता दीदीक समाद   आइ मैसेन्जर चेक करबाक क्रम मे भोरे-भोर जे सन्देश देखलहुँ ताहि पर केन्द्रित छी। स्वर्णलता दीदी लिखली अछि, “आइ लव-अरेंज विवाह बहुत भय रहल अछि अहि के परिप्रेक्ष्य में किछु विचार दियौ और झुठे लोक दहेज के रोना क रहल छैथ ई कोना अहि लोक और लव मैरिज कियै बढि गेल – दहेज लेबाक दुष्परिणाम एहि लोक सँ परलोक धरि की

ओ प्रदूषण जे शहर सँ गाम धरि पहुँचि गेल

ओ प्रदूषण जे शहर सँ गाम तक पहुँचि गेल   हिन्दी मे एकटा कहावत बड़ा लोकप्रिय – घर की मुर्गी दाल बराबर… मिथिलावासी लेल अपनहि भाषा तुच्छ-नीच होइत छन्हि तेँ ई कहावत केँ ई सब बाकायदा अपन जीवन मे अपना लेने छथि। हमरो ई कहावत के बदला ‘बारीक पटुआ तीत’ प्रयोग करबाक चाहैत छल, लेकिन ओ प्रदूषण जे शहर सँ गाम धरि पहुँचि गेल

रामचरितमानस मोतीः श्री सीताराम-धाम-परिकर वन्दना

स्वाध्याय – प्रवीण नारायण चौधरी रामचरितमानस मोती   ९. श्री सीताराम-धाम-परिकर वन्दना रामायणरूपी महाकाव्य केर रचना करबाक अगम-अथाह कार्य केँ शुरू करबा सँ पहिने महाकवि तुलसीदास द्वारा वन्दना करबाक क्रम जारी अछि। आइ श्रीसीताराम-धाम परिकर केर वन्दना प्रस्तुत अछि।   १. हम अति पवित्र श्री अयोध्यापुरी और कलियुग केर पाप सब केँ नाश करयवाली श्री रामचरितमानस मोतीः श्री सीताराम-धाम-परिकर वन्दना