Search

प्रवीण नारायण चौधरी

सरस गीत – कुकुरक नाङड़ि सोझ करै मे लागल छी

कुकुरक नाङड़ि – सियाराम झा सरस कुकुरक नाङड़ि सोझ करै मे लागल छी अहाँ बुझइ छी पागल, तँ हम पागल छी अइ नाङड़ि लै भेल कतेको बुधिबधिया धिमका भए गेल चौरस, चौरस भेल खधिया बारह बापुत सोझ करै छी पुछड़ी केँ जेना अगत्ती नेन्ना गीजए छुछड़ी केँ नहे सँ जतबा सकैत छी – खोंटै छी सरस गीत – कुकुरक नाङड़ि सोझ करै मे लागल छी

मिथिला राज्य निर्माण सेना कतय हेरा गेल?

आलेख – प्रवीण नारायण चौधरी हालहि एकटा रेडियो साक्षात्कार मे मिथिला राज्य निर्माण सेनाक राष्ट्रीय उपाध्यक्ष अमर नाथ झा सँ सुप्रसिद्ध मैथिली-मिथिला अभियानी एवं सी एफएम ९४.७ मेगाहर्ज राजविराजक स्वामिनी साक्षात्कार लैत समय प्रश्न पूछलखिन जे ई संस्थाक वर्तमान एहेन करगर जरुरतक समय चुप कियैक अछि। ई प्रश्न दिनहु विभिन्न स्रोत द्वारा पूछल जाइत अछि मिथिला राज्य निर्माण सेना कतय हेरा गेल?

पोथी केर पाठकीयता बढ़ेबाक सार्थक पहल

अविनाश श्रोत्रिय, लालगंज, मधुबनी। जुलाई २६, २०१५. मैथिली जिन्दाबाद!! पोथिक संख्या बढ़ल, पोथिक उपलब्धता बढ़ल, पोथिक रूप बढ़ल, मुदा कतउ नहिं कतउ पोथि पढ़निहारक संख्या घटि गेल । सूचना आ ज्ञानक साधन पोथि-पतराक स्थान टेलीविजन लऽ लेलक अछि । लेखक पुरस्कृत होइत छथि, प्रकाशक पुरस्कृत होइत छथि, पोथि पुरस्कृत होइत अछि मुदा पाठक ??? नहिं…… पोथी केर पाठकीयता बढ़ेबाक सार्थक पहल

तऽ कि आब ‘मिथिला राज्य’ बनबाक निस्तुकी भऽ गेल नेपाल मे?

विशेष संपादकीय नेपालक शत-प्रतिशत जनमानस केँ ई पता छैक जे ‘मिथिला’ क्षेत्रक एकटा बहुत पैघ हिस्सा नेपालदेश मे आइ अवस्थित छैक। नेपाली भाषा सँ सेहो बहुत पुरान मैथिली भाषा छैक जे विगत सैकड़ों वर्षक ‘एकल भाषा नीति’ केर रहितो आइयो धरि देश मे दोसर सबसँ बेसी बाजल जायवला भाषा थिकैक। नेपालदेशक भितरे विभिन्न छोट-छोट राज तऽ कि आब ‘मिथिला राज्य’ बनबाक निस्तुकी भऽ गेल नेपाल मे?

मिथिला राज्य आ प्रवीणक यात्रा: संस्मरण

संस्मरण आलेख – प्रवीण नारायण चौधरी हाल मिथिला राज्य निर्माणक माँग पर सक्रियता सामाजिक संजाल पर फुरसतिया लोक मे बढब चुनावक कारण स्वाभाविके लागल। आर किछु करी नहि करी, एकजुटताक नारा लगाकय अपन दायित्व पूरा भेल बुझनिहार लेल मिथिला प्रेम एहि घड़ी किछु बेसिये देखाय लागल अछि। काजक घड़ी निपत्ता हैब, बाजक घड़ी मे आगुए मिथिला राज्य आ प्रवीणक यात्रा: संस्मरण

भगवान् श्रीराम केर दैनिक चर्याक स्वरूप: मानव जीवन लेल अनमोल संदेश

अनुवादित आलेख लेखक: श्री कमल प्रसाद जी श्रीवास्तव अनुवाद: प्रवीण नारायण चौधरी चतुर्मास केर विशेष अवसरपर हमरा लोकनि केँ सौभाग्य सँ श्री राम जी केर दैनिक चर्याक स्वरूपसँ शिक्षा पेबाक मौका भेटल अछि। आशा अछि जे हम सब एहि सँ समुचित लाभान्वित होयब। भगवान्‌ श्रीराम अनन्त-कोटि-ब्रह्माण्ड-नायक परम पिता परमेश्वरक अवतार छलाह और धर्मक मर्यादा रखबाक लेल भारतभूमि अयोध्यामे भगवान् श्रीराम केर दैनिक चर्याक स्वरूप: मानव जीवन लेल अनमोल संदेश

शिव चालीसा (मैथिली रूप)

दोहा: जय गणेश गिरिजा सुवन, मंगल मूल सुजान॥ कहय अयोध्यादास प्रभु, दियौ अभय वरदान॥   जय गिरजापति दीनदयाला, सदा करी सन्तन प्रतिपाला॥१॥ भाल चंद्रमा सोहय नीके, कानन कुंडल नाग फनीके॥२॥ अंग गौर शिर गंग बहाबी, मुंडमाल तन छाउर लगाबी॥३॥ वस्त्र खाल बाघम्बर सोहय, छवि केँ देखि नाग मन मोहय॥४॥ मैना मातु केर वैह दुलारी, बाम शिव चालीसा (मैथिली रूप)

सुनु-सुनु मुरलिया केर तान सजनी – आहाँ बसय छी हमरे प्राण सजनी

गीत – मनीष झा, द्वालक, मधुबनी (हाल: मुम्बई) (मैथिली गीतकार, कवि एवं कलाकार – अभिनेता) सुनू-सुनू मुरलिया केर तान सजनी आहाँ ब’सै छी हमरे प्राण सजनी आनल लहठी नै माँगी हम प्रीत मँगनी -2 हे आहाँ ब’सै छी हमरे प्राण सजनी आहाँ ब’सै छी ……………… चलू मिल कमला के छ’हैर में बैसब अपना दुनू छोड़ि सुनु-सुनु मुरलिया केर तान सजनी – आहाँ बसय छी हमरे प्राण सजनी

बाप केँ एना ठकलनि गोनू झा

गोनू झा क रोचक कथा: बालकथा – संकलन: प्रवीण नारायण चौधरी गोनूक पिता एक दिन कहलखिन “रे गोनू! दुनियामे सबकेँ ठकलें, मुदा बाप तोहर बापे रहि गेलौक।” गोनू हँसैत कहलखिन “बाप तऽ बाप होइते छैक, मुदा कला मे बेटा सेहो बापोक बाप बनि जाइत छैक।” पिता पूछलखिन “कि मतलब?” गोनू कहलखिन “रुकू! समय पर कहब।” बाप केँ एना ठकलनि गोनू झा

नवका हरिमोहन झा उर्फ संतोषीक टटका प्रसंग: उन्नैति कि खच्चरहि!!

यथार्थ व्यंग्य – संतोष कुमार “संतोषी” उन्नैति…. की “खच्चरैहि “ से सत्ते, हम सब गोटे बेसिये उन्नैतिक बाट पर छी…. पुरना रिति रेवाज, रहन सहन आ समाजिक सुसंस्कृति केँ ताख पर राखि नव-नव विचार नव-नव व्यवहार केँ संग सत्ते बेसिये उन्नैति कय रहल छी……! जाईत-पाईत अनुसारे काज बाँटल गेल रहय कि काजक अनुसारे जाईत-पाईतक बँटवारा भेल छल नवका हरिमोहन झा उर्फ संतोषीक टटका प्रसंग: उन्नैति कि खच्चरहि!!