सरस गीत – कुकुरक नाङड़ि सोझ करै मे लागल छी
कुकुरक नाङड़ि – सियाराम झा सरस कुकुरक नाङड़ि सोझ करै मे लागल छी अहाँ बुझइ छी पागल, तँ हम पागल छी अइ नाङड़ि लै भेल कतेको बुधिबधिया धिमका भए गेल चौरस, चौरस भेल खधिया बारह बापुत सोझ करै छी पुछड़ी केँ जेना अगत्ती नेन्ना गीजए छुछड़ी केँ नहे सँ जतबा सकैत छी – खोंटै छी … सरस गीत – कुकुरक नाङड़ि सोझ करै मे लागल छी








