देखि अहाँक रूप, कि कहू, कि गजल लिखू!!
देखि अहाँक रूप, कि कहू, कि गजल लिखू!! – रोशन झा, स्तम्भकार एवं पत्रकार, जनकपुर सँ अपन मित्र स्नेहा झा केँ समर्पित करैत…. इश्क मे लोक केँ बर्बाद होएत देखै छी इश्क मे लोक केँ आबाद होएत देखै छी देखय लेल देखै छी सबचीज, मुदा अहाँकेँ सब मे सब सँ अपवाद होएत देखै छी! देखि … देखि अहाँक रूप, कि कहू, कि गजल लिखू!!









