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प्रवीण नारायण चौधरी

मुसरी द्वारा हाथीक उठक-बैठक

व्यंग्य प्रसंग एक बेर मुसरी हाथी केँ ४-५ बेर उठक बैठक करा देलकैक…… बात रहैक जे कोनो पुरान सनक ५ सितारा होटलकेर बार के कालीन तर मे रहयवला मुसरी कोनो गेस्ट द्वारा लेल गेल व्हिसकीक गिलास अपने पीलाक बाद कनी छोड़ि गेलापर ओ मुसरी चुटुर-चुटुर पीब लैत अछि आ ओकरा वैह बेसी भऽ जाएत छैक। मुसरी द्वारा हाथीक उठक-बैठक

लोक सेहो देवता बनि सकैत अछिः अनुभूति

देवता सँ साक्षात्कार (संस्मरण) – सीतागंज (फारबिसगंज), २६ मई, २०१२ – डा. भुवनेश्वर गुरमैता सँ भेंट आर अनुभूति पर आधारित – प्रवीण नारायण चौधरी प्रसिद्ध शिक्षाविद्‌ आ समाजसेवी – मैथिली केँ संवैधानिक दर्जा दियौनिहार एक महत्वपूर्ण व्यक्तित्व – एहि पृथ्वीपर कलियुगमें विद्यापति केर अवतार कहब तऽ अतिश्योक्ति नहि हेतैक, संगहि बहुते उच्चवर्गीय मैथिल जनमानस लेल लोक सेहो देवता बनि सकैत अछिः अनुभूति

दोहा-कतार मे ११म मासक मैथिली साहित्यिक कार्यक्रम संपन्न

विन्देश्वर ठाकुर, दोहा, कतार। जून २५, २०१६. मैथिली जिन्दाबाद!! दोहा-कतारमे ‪‎साँझक_चौपाडि_पर‬ केर – ११म मासक आयोजन सम्पन्न “मातृभाषाक जगेर्णा हमरासबहक प्रेरणा” मूल नाराक संग विगत ११ मास सँ निरन्तर रुपमे आयोजना होइत आबि रहल मैथिली काव्य-सन्ध्या अन्तर्गतकेर कार्यक्रम ‎साँझक_चौपाड़ि_पर‬ केर एगारहम मासक बैसार २४/०६/२०१६ शुक्र दिन दोहाक मुन्ताजा पार्कमे सफलतापूर्वक सम्पन्न भेल । कार्यकममे नियमित सर्जकसबमे दोहा-कतार मे ११म मासक मैथिली साहित्यिक कार्यक्रम संपन्न

अपने मिथिला भूमि सँ प्यार छैः अशोक सहनी

चलु परदेशी जिनगी ओइपार छै जिनगी के रस्ता आब तैयार छै अधूरा सपना सँ सजल संसार छै अपने मिथिला भूमि सँ प्यार छै चलु परदेशी…. डेग-डेग पर आब दुश्मन तैयार छै गली में चिचियाबैत मिथिलानि नार छै ई अँधेरा काल के एक रूप छै रौशनी में जगमगाति मिथिलानि नार छै चलु परदेशी….. के अपन जीनगी अपने मिथिला भूमि सँ प्यार छैः अशोक सहनी

कोढिया चाहे हऽ: बियाह लेल गर्हुआर कनियां चाही

व्यंग्य प्रसंग एकटा एहेन कोढि लोक छल जे बंसी पाथि देने छलैक, आ अपने महारे पर छाहरिक गौर मे ओंघरा गेल छल। एकटा कोम्हरौ सऽ कोढियेक गौंआँ छौड़ा आबि ओकर बंसी मे माछ केँ खोंटी करैत देखि ओकरा उठेलकैक – हे रौ! ललित! उठ-उठ! देख माछ खाइ छौ तोहर बंसी मे। ललित ओकरा जबाब देलकैक कोढिया चाहे हऽ: बियाह लेल गर्हुआर कनियां चाही

कामाख्या मंदिर आओर अम्बुवासी पर्व

कामाख्या मंदिर आओर अम्बुवासी (अम्बुवाची) पर्व – पूनम झा, गुआहाटी भारतवर्षक 51 गोट शक्तिपीठ में सँ सर्वाधिक महत्वपूर्ण ‘कामाक्षी’ वा ‘कामाख्या’ शक्तिपीठ! जे अवस्थित अछि प्राचीन प्रागज्योतिषपुर वा आधुनिक गुवाहाटी शहर केर नीलांचल पर्वत पर। मंदिर परिसर वा नीलांचल पर्वत केर आरो भाग में, काली, तारा, बगला, छिन्नमस्ता, भुवनेश्वरी, भैरवी, धुमावती, जयदुर्गा, वनदुर्गा, शीतला आदि कतेक रास कामाख्या मंदिर आओर अम्बुवासी पर्व

विराटनगर केर पहिल मेगा इवेन्ट महाकवि विद्यापति पर

बिराटनगरमें विद्यापति स्मृति पर्व समारोह – २०६७ त्रिभुवनपति दीनबंधु दिगम्बरकेर असीम कृपासँ बिराटनगरकेर ऐतिहासिक पुण्य भूमिपर महाकवि कोकिल विद्यापतिकेर स्मृति पर्व समारोह गत दिसम्बर १० – ११, २०१० केर सम्पन्न भेल। नेपालकेर बदलैत परिस्थितिमें मैथिल भाषा-भाषी संगहि संपूर्ण सद्भाव रखनिहार विभिन्न आदिवासी एवं जनजाति जिनक संपर्क भाषा मैथिली अछि – सभ मिलिके एहि कार्यक्रमकेर अपूर्व विराटनगर केर पहिल मेगा इवेन्ट महाकवि विद्यापति पर

विद्यापतिः हमर सभक आदर्श आ प्रेरणाक मुख्य स्रोत

विद्यापतिक व्यक्तित्व सँ प्रेरणा – प्रवीण नारायण चौधरी मिथिला क्षेत्र तऽ जगजननी सियाजी के अवतार होइते धन्य बनि गेल – मुदा मिथिला में अनेकानेक विभुति समय-समय अवतरित होइत रहलाह जाहिमें महाकवि विद्यापतिजी के नाम समस्त मैथिल जनमानस के संग विश्व भरिक विद्वान्‌ वर्ग जनैत छथि। हिनक जन्म १३५० ई. में भेल आ लगभग अपन १०० विद्यापतिः हमर सभक आदर्श आ प्रेरणाक मुख्य स्रोत

मिथिला संस्कृतिक अमरतत्त्वः विद्यापति

मिथिला संस्कृति केर अमरतत्त्व: विद्यापति – प्रवीण नारायण चौधरी अमरत्त्वक सहज परिभाषा केँ पोषणिहार मानवक विद्वता आ लोकहितकारी प्रयास होइछ – विद्यापति मिथिलाक अमरताक अमरतत्त्व बनलाह अपन व्यक्तित्व आ व्यक्तिगत लगानी सँ! आइयो मैथिल संग समूचा संसार यदि मिथिला संस्कृतिक सराहना करैत अछि तऽ ओहिमे एक विद्यापति सेहो मुख्य कारण बनैत छथि। मूलरूपमें एक साहित्यसेवी मिथिला संस्कृतिक अमरतत्त्वः विद्यापति

विद्यापतिक स्मृति भगवान् समान हर क्षण – हर पल

आजुक समय मे विद्यापतिक प्रासंगिकता – प्रवीण नारायण चौधरी विद्यापति – ऐतिहासिक महापुरुष – महाकवि – कविकोकिल – जनकवि – संस्कृत सँ अवहट्ट (मैथिलीक प्राकृतिक रूप) मे रचना करैत आम जनमानसक आवाज बनि गेलाह। विद्यापतिक रचना बाट चलनिहार द्वारा सेहो गायल जाय लागल, पुरुष नचारी तऽ महिलावर्ग बटगवनी बनिकय विद्यापतिक रचना सबकेँ अमर बनौलनि। श्रृंगार विद्यापतिक स्मृति भगवान् समान हर क्षण – हर पल