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प्रवीण नारायण चौधरी

साधनोपयोगी पत्र – मानव जीवन केँ सफल बनेबाक सहज सूत्र (अवश्य पठनीय)

स्वाध्याय स्रोतः कल्याण, अनुवादः प्रवीण नारायण चौधरी १. वैराग्य आर भजन केना हो? प्रिय महोदय! सप्रेम हरिस्मरण! अपनेक एक पत्र पहिने भेटल छल। किछु समयक बाद दोसर सेहो भेटल। पहिले पत्रक जबाब नहि देल जा सकल, एकरा लेल कोनो तरहक विचार नहि करबा चाही। अहाँ हमर पत्रक प्रतीक्षा करैत रहैत छी, ई अहाँक बड पैघ साधनोपयोगी पत्र – मानव जीवन केँ सफल बनेबाक सहज सूत्र (अवश्य पठनीय)

जखन स्वयं भगवानो अपन संकल्प भक्तक कल्याण लेल तोड़ि देलनि……

मई १८, २०१८. मैथिली जिन्दाबाद!! आध्यात्म  प्रसंग – देवव्रत भीष्म द्वारा महाभारतक युद्ध मे कृष्ण सँ शस्त्र उठेबाक लेल बाध्य करबाक प्रसंग (समीक्षात्मक अध्ययन) आइ भोरहि सँ भगवद्भक्तिक विभिन्न रूप सभक दर्शन भऽ रहल अछि। एकटा एहेन आख्यान जाहि मे अनैतिक केँ हरेबाक लेल अनैतिकताक सहारा लेबाक बात समाहित छल, से महाभारतक ओ समय मोन जखन स्वयं भगवानो अपन संकल्प भक्तक कल्याण लेल तोड़ि देलनि……

दरभंगा-रोसड़ाक दूरदर्शन रिले केन्द्र बन्द करबाक वायरल अफवाह केर यथार्थ सच्चाई

मई १८, २०१८. मैथिली जिन्दाबाद!! दरभंगा आ रोसड़ाक दूरदर्शन रिले केन्द्र बन्द करबाक अफवाह मात्र थिक, एकर खुलाशा सरकारक बदलल नीति सँ अन्जान आ बिना अध्ययन कएने गोटेक सज्जन द्वारा सामाजिक संजाल पर प्रसार भारतीक एकटा आदेशक पत्र केँ वायरल बनाकय कयल जेबाक बात सोझाँ देखायल अछि। एहि सम्बन्ध मे आधिकारिक वेबसाइट तथा अन्य संचार दरभंगा-रोसड़ाक दूरदर्शन रिले केन्द्र बन्द करबाक वायरल अफवाह केर यथार्थ सच्चाई

एक कथा ओहि प्रेमिका केर जेकर प्रेमी जबानी मे ठुकरा देलक लेकिन सही समय पर स्वीकार केलक

कथा – मनन करबा योग्यः इन्द्रिय संयम (भारतवर्षक आधुनिक इतिहास केर एक सत्यकथा)   मथुराक सर्वश्रेष्ठ नर्तकी, सौन्दर्यक मूर्ति वासवदत्ताक दृष्टि अपन वातायन सँ राजपथ पर पड़ल आ जेना ओत्तहि रुकि गेल। पीत-चीवर ओढने, भिक्षापात्र लेने एक मुण्डिममस्तक युवा भिक्षु नगर मे आबि रहल छल। नगरक प्रतिष्ठित धनी-मनी लोक एवं राजपुरुष तक जेकरा चाटुकारी कयल एक कथा ओहि प्रेमिका केर जेकर प्रेमी जबानी मे ठुकरा देलक लेकिन सही समय पर स्वीकार केलक

ढेर जोगी मठ उजाड़ – कथा एक महानगर केर मैथिल लोकनिक (अवश्य पठनीय)

विचार – प्रवीण नारायण चौधरी ढेर जोगी मठ उजाड़   ई कहावत अपन मिथिला मे कतेक जल्दी कतय-कतय चरितार्थ भेलैक अछि एकरा लेल हमरा कथा-शैली मे घुमाकय किछु लिखय पड़त से जरूरी नहि अछि, सीधा नामो लय केँ ५० टा उदाहरण गनबा सकैत छी। मुदा जरूरी ई छैक जे टुन्नी दाय रुसैथ नहि तैँ हिनका ढेर जोगी मठ उजाड़ – कथा एक महानगर केर मैथिल लोकनिक (अवश्य पठनीय)

कथा ओहि गामक जे एक समय बड सुन्दर छल मुदा आब…..

कथाः उजैड़ गेल ओ सुन्दर गाम  प्रवीण नारायण चौधरी ओहि गाम केँ लोक सब सुन्दर आ बेसी लोक शिक्षित होबक बात तहियो कहैक, आइयो कहैत छैक। मुदा आब ओ गाम उजैड़ गेल, विरान अछि। लोक रहितो ओतय दिने मे श्मसान जेकाँ लगैत छैक। जतय पहिने सब कियो हँसैत-खेलाइत देखाइत छल, ओतय एहि तरहक सुनसान लागब कथा ओहि गामक जे एक समय बड सुन्दर छल मुदा आब…..

दहेज मुक्त मिथिलाक पुनीत प्रयास सँ दु परिवारक बीच मेल-मिलाप

कुशेश्वरस्थान, दरभंगा। मई १५, २०१८. मैथिली जिन्दाबाद!! दहेज उत्पीड़णक मामिला सँ दियाओल गेल निजात दहेज मुक्त मिथिलाक दरभंगा जिलाध्यक्ष किशोर झा तथा कुशेश्वर स्थान केर प्रखण्ड अध्यक्ष कौशल कुमार सहित अन्य स्थानीय महानुभाव लोकनिक सामूहिक बुझारत सँ दू टा परिवार बीच दहेज सम्बन्धी विवाद केँ निपटायल गेल अछि। जिला संयोजक मनोज शर्मा केर सक्रियता तथा दहेज मुक्त मिथिलाक पुनीत प्रयास सँ दु परिवारक बीच मेल-मिलाप

हम महाचोर छी (आत्मालोचना)

विचार – प्रवीण नारायण चौधरी   अभियानी दू तरहक होएत छैक हजुर! एकटा त बिना कोनो फलक प्रत्याशा अपन काज करब जनैत छैक, ओकरा एतबे टा लोभ अवस्स रहैत छैक जे जीवनक सार्थकता सिद्ध हो। दोसर, जीवनक सार्थकताक सिद्ध करबाक अन्तिम लक्ष्य सँ पहिने जीवनकाल मे कोनो उपलब्धि प्रति ‘कामना’ राखि सेवा मे लगैत अछि। हम महाचोर छी (आत्मालोचना)

अपन कल्याण लेल अपने जागल रहीः आध्यात्मिक चिन्तन

आउ किछु नीक चिन्तन करी   (स्वाध्याय)   वन्दना   शङ्खं प्रसारितसुखं स्वपदाश्रितानां चक्रं सदा दमितदानवदैत्यचक्रम्। कौमोदकीं भुवनमोदकरीं गदाग्र्याँ पद्मालयाप्रियकरं प्रथितं च पद्मम्॥ संधारयन्तमतिचारुचतुर्भुजेषु श्रीवत्सकौस्तुभधरं वनमालयाढ्यम्। सिन्धोस्तटे मुकुटकुण्डलमण्डितास्यं श्रीद्वारकेशमनिशं शरणं प्रपद्ये॥   जे अपन चरणाश्रित भक्तक लेल सुखक प्रसार करयवला शंख केँ, सदा दैत्य ओ दानव केर दल केँ दमन करयवला चक्र केँ, सम्पूर्ण भुवन अपन कल्याण लेल अपने जागल रहीः आध्यात्मिक चिन्तन

अनावश्यक बहस सँ महत्वपूर्ण चर्चा केँ झँपबाक कुत्सित प्रयास, छींटखोपड़ी मैथिलक कुकाज

मोदीजीक नेपाल भ्रमण आ चोपाह मैथिलक पोंगापन्थी लेल ठकुआक सनेश   काल्हि श्री शंकरदेवजी मोदीजीक मैथिली-मिथिला कनेक्सन केर एक लेख (पोस्ट) पर कमेन्ट देने छलाह त बात बुझय मे नहि आयल छल – ओ लिखने छलाह, “किछु गोटेकेँ कोँढ़मे असाधारण दर्द क’ रहलनि अछि। सीया आ सियाक विवाद ठाढ़ क’ आत्महत्यापर वृत्त छथि।” चूँकि काल्हि अनावश्यक बहस सँ महत्वपूर्ण चर्चा केँ झँपबाक कुत्सित प्रयास, छींटखोपड़ी मैथिलक कुकाज