Search

प्रवीण नारायण चौधरी

दिल्ली मे तहलका मचेलाक बाद आब काठमांडू मे ‘मैथिली मचान’ – काल्हि सँ १० दिन धरि

काठमांडू, ३१ मई, २०१८. मैथिली जिन्दाबाद!! दिल्ली विश्व पुस्तक मेला २०१८ सँ सोशल मीडिया आ मैथिली भाषा-साहित्य संसार मे केवल मैथिली पोथी केर बिक्री, प्रदर्शनी लेल सुविख्यात “मैथिली मचान” काल्हि सँ नेपालक राजधानी – काठमांडू केर भृकुटि मंडप मे लागि रहल अछि। एहि सम्बन्ध मे संचालिका डा. सविता झा खान अपन सुन्दर विचार पठबैत मचानक दिल्ली मे तहलका मचेलाक बाद आब काठमांडू मे ‘मैथिली मचान’ – काल्हि सँ १० दिन धरि

एक मिथिलानीक गंभीर अपील

अपील – आरती झा, बीरगंज, नेपाल मित्र लोकनि, मिथिला/मैथिलीमे बहुत कियो लागल छी, किछु सार्थक काजो भ’ रहल अछि। मिथिला/मैथिलीसँ संबंधित सब काज आवश्यक आ प्रशंसनीय अछि। हमर अनुभव कहैत अछि अहि काज सबमे संसाधनक(खास क’ अर्थ) अभाव प्रमुख बाधक तत्व बुझायत अछि। कोनो राजनीतिक दल अथवा व्यक्तिक आर्थिक सहयोग रहैत छैक त’ अक्सरहां देखल एक मिथिलानीक गंभीर अपील

काशी मे गंगालाभ सँ मुक्ति

स्वाध्याय (अनुवादः प्रवीण नारायण चौधरी) काशी मे गंगालाभ सँ मुक्ति ई कथा कल्याण मे श्रीसत्यजी ठाकुर लिखने छथि –   काशी मे एक साध्वी वृद्धा विधवा रहैत छलीह। हम सब हुनका ‘खालिसपुराक माँ’ केर नाम सँ जनैत छियन्हि। सब प्रकार सँ सम्बलहीन भऽ कय केवल धर्मक ऊपर निर्भर रहिकय ओ काशीसेवन करैत छलीह। हमरा लोकनिक काशी मे गंगालाभ सँ मुक्ति

डा. जयकान्त मिश्र केर एक महत्वपूर्ण प्रतिवेदन

A Significant Article from the book: Jaykant Mishra Samajna A Report by Dr. Jaykant Mishra The languages of India were made an important part of world culture and history years ago. The British Government was conscious of finding out and making them known. In this regard the contribution of Sir George Abraham Grierson was memorable डा. जयकान्त मिश्र केर एक महत्वपूर्ण प्रतिवेदन

चनमा आयोजनक अत्यन्त सकारात्मक पक्ष जाहि लेल ‘पूर्ण सफल’ कहल

चनमा आयोजनक अत्यन्त सुखद पक्ष   कोनो कार्यक्रम मे नीक आ बेजा दुए तरहक अनुभव होएत छैक। नीक ओ भेल जे आत्मा केँ संतोष प्रदान करय, बेजा ओ भेल जे मोन तक केँ दुःखी कय दियए। आइ भोर मे असन्तुष्टिक गोटेक रास विन्दु पर विचार रखने रही। आब एकर सकारात्मक पक्ष पर सेहो जानकारी देला चनमा आयोजनक अत्यन्त सकारात्मक पक्ष जाहि लेल ‘पूर्ण सफल’ कहल

चनमा आयोजन केर किछु नकारात्मक पक्ष

चनमा आयोजन पर सोशल मीडिया मे खूब चर्चा चलि रहल अछि। कतहु-कतहु वक्ता लोकनिक ‘प्रगतिशील विचारधाराक’ प्रदर्शन आलोचनाक विषय बनि रहल अछि त किनको द्वारा मैथिली केँ जातीयता सँ जोड़बाक बातक विरोध देखल जा रहल अछि। विषय सँ हँटिकय अलट-बलट बजबाक कारणे विरोध स्वाभाविके छैक। आयोजन पहिल दिन मोटा-मोटी बड़ा गंभीर आ उपयोगी लागल। वक्ता चनमा आयोजन केर किछु नकारात्मक पक्ष

भाइ-भाइ मे फूट, आजुक विडंबना

स्वाध्याय-विचार – प्रवीण नारायण चौधरी   ठीक छैक, मानि लेलहुँ… हम सब कलियुगी जीव छी। मुदा कल्याणक मार्ग जाहि स्वाध्याय सँ भेटैत अछि तेकर आनन्द-परमानन्द मे डूबय सँ कतहु मना नहि अछि। हम मानैत छी, जानैत छी, देखैत आ भोगैत छी – भाइ-भाइ मे स्नेह खत्म भऽ रहल अछि। विरले कतहु कोनो भाइ अपन भाइ भाइ-भाइ मे फूट, आजुक विडंबना

विद्यापति समारोह सँ मैथिलीभाषी मे नव क्रान्तिक संचार

विचार – प्रवीण नारायण चौधरी अपन ठेकाने नहि आ सूरदास केर घटकैती! स्वयं केर योगदान बिना कएने हमरा ई अधिकार के देलक जे हम समाज मे प्रचलित व्यवहार पर सवाल ठाढ करब? सन्दर्भ उठबैत छी विद्यापति स्मृति पर्व समारोहक आयोजन सँ प्रवासक क्षेत्र पर मैथिल जनसमुदाय केँ जोड़बाक आधुनिक आयोजन पर व्यर्थक टीका-टिप्पणी कयनिहार छूछ विद्यापति समारोह सँ मैथिलीभाषी मे नव क्रान्तिक संचार

मैथिली लघु फिल्म ‘इतिहास’ केर प्रीमियर शो पर विभिन्न समीक्षक लोकनिक विचार

मई २९, २०१८. मैथिली जिन्दाबाद!! हालहि २५ जून केँ मिथिलाक लोकदेवता ‘लोरिकदेव’ केर जीवनपर आधारित लघु फिल्म ‘इतिहास’ केर प्रीमियर शो दिल्ली मे संपन्न भेल, जाहि मे वरिष्ठ साहित्यकार डा. शेफालिका वर्मा, मैथिली लेखक संघक महासचिव विनोद कुमार झा सहित अनेकों गणमान्य व्यक्तित्व लोकनि भाग लेने छलाह। फिल्म केर प्रीमियर शो देखलाक बाद अलग-अलग समीक्षा मैथिली लघु फिल्म ‘इतिहास’ केर प्रीमियर शो पर विभिन्न समीक्षक लोकनिक विचार

मैथिली पर पटना उच्च न्यायालयक ओ ऐतिहासिक फैसला, सरकारक बदनियत पर कठोर टिप्पणी

विशेष संपादकीय बिहार मे भाषा-राजनीति केर बड पैघ इतिहास भेटैत अछि। मैथिली भाषा जे कि बिहार केर विरासत थिक ताहि पर बदनियतपूर्ण ढंग सँ कतेको तरहक कूतर्की निर्णयक जँ सूची बनायल जायत त एकटा महाग्रन्थ तैयार भऽ सकैत अछि। अफसोस जे मैथिली लेखन मे निपुण कतेको सर्जक आन-आन विषय पर लेखनी करैत छथि, मुदा मैथिली मैथिली पर पटना उच्च न्यायालयक ओ ऐतिहासिक फैसला, सरकारक बदनियत पर कठोर टिप्पणी