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प्रवीण नारायण चौधरी

जितिया पाबनि आ नव परम्परा मे जितिया पाबनि महोत्सव

जितिया पर्व महोत्सव विराटनगर मे काल्हि आयोजित होयत महेन्द्र मोरंग कैम्पस के हाता मे सब साल जेकाँ अहु बेर वृहत् स्तर पर जितिया पर्व महोत्सव केर आयोजन ‘अपन विराटगढ़ परोपकार समाज’ एवं सामाजिक नेतृ वसुन्धरा झाक अगुवाई मे कयल जायत। एहि बेर नेपालक पूर्व प्रधानमंत्री श्री के पी ओली एहि महोत्सवक मुख्य अतिथि हेताह। जन-जन जितिया पाबनि आ नव परम्परा मे जितिया पाबनि महोत्सव

रामचरितमानस मोतीः सीताजी द्वारा गौरी पूजन एवं वरदान प्राप्ति तथा श्री राम-लक्ष्मण संवाद

स्वाध्याय – प्रवीण नारायण चौधरी रामचरितमानस मोती श्री सीताजी द्वारा गौरी पूजन एवं वरदान प्राप्ति तथा राम-लक्ष्मण संवाद पैछला अध्याय मे सीताजी श्रीराम एवं लक्ष्मण केँ फुलवारी मे देखलथि… आगूः १. मृग, पक्षी और वृक्ष केँ देखबाक बहाने सीताजी बेर-बेर घुमि जाइत छथि आ श्री रामजीक छबि देखि-देखिकय हुनकर प्रेम खूब बढ़ि जाइत छन्हि। शिवजीक रामचरितमानस मोतीः सीताजी द्वारा गौरी पूजन एवं वरदान प्राप्ति तथा श्री राम-लक्ष्मण संवाद

रामचरितमानस मोतीः पुष्पवाटिका-निरीक्षण, सीताजीक प्रथम दर्शन, श्री सीता-रामजीक परस्पर दर्शन

स्वाध्याय – प्रवीण नारायण चौधरी रामचरितमानस मोती पुष्पवाटिका-निरीक्षण, सीताजीक प्रथम दर्शन, श्री सीता-रामजीक परस्पर दर्शन १. राति बीतल, मुर्गाक शब्द कान सँ सुनिकय लक्ष्मणजी उठलाह। जगत केर स्वामी सुजान श्री रामचन्द्रजी सेहो गुरु सँ पहिने जागि गेलाह। सब शौचक्रिया कय नहा लेलाह। फेर संध्या-अग्निहोत्रादि नित्यकर्म समाप्त कय केँ ओ मुनि केँ मस्तक नमाकय प्रणाम कयलनि। रामचरितमानस मोतीः पुष्पवाटिका-निरीक्षण, सीताजीक प्रथम दर्शन, श्री सीता-रामजीक परस्पर दर्शन

रामचरितमानस मोतीः श्री राम व लक्ष्मण द्वारा जनकपुर निरीक्षण

स्वाध्याय – प्रवीण नारायण चौधरी रामचरितमानस मोती श्री राम-लक्ष्मण केर जनकपुर निरीक्षण रामचरितमानस मोतीक पैछला अध्याय मे हम सब देखलहुँ जे केना राजा जनक मुनि विश्वामित्र जीक स्वागत लेल स्वयं हुनका लग आबि नगर मे लय गेलाह, हुनका लोकनिक निवास लेल सुन्दर व्यवस्था कयलनि आ जखन दुनू राजकुमार केँ देखलाह त सुइध-बुइध सबटा हेरा गेलनि। रामचरितमानस मोतीः श्री राम व लक्ष्मण द्वारा जनकपुर निरीक्षण

मिथिला राज्यक मांग एकटा आर्थिक ओ सामाजिक आन्दोलन थिक

विचार – दिलीप कुमार झा मिथिला राज्यक मांग एकटा आर्थिक ओ सामाजिक आन्दोलन थिक कोनो राज्यक निर्माण दू तीन कारण सं होइत अछि। पहिल कारण होइत अछि ओहि क्षेत्रक एकटा भौगोलिक पहचान जे चिन्हित राज्यक निवासीक भरन पोषण लेल आर्थिक आधार तैयार करैत अछि। दोसर कारण होइत अछि ओहि क्षेत्रक फराक सांस्कृतिक पहिचान से अनेक मिथिला राज्यक मांग एकटा आर्थिक ओ सामाजिक आन्दोलन थिक

आम आदमी – मैथिली कविता

आम आदमी – मैथिली कविता – मीना मिश्रा “मुक्ता”पटना, पटेल नगर। ” आम आदमी” अभावक चौकी पर नृत्य करैतभावनाक उछाह केँ के देखत? गरीबीक धरातल पर चित्कार मारैतमोनक आर्तनाद केँ के सुनत? बीत जाइत अछि जीनगीदालि -रोटीक जोगार करैत। दम तोड़ि दैत अछि जवानीजीनगीक पसीनाक धारक प्रवाह करैत। कहाँ रहि पबैत अछि मनुखमनुखक पहचान में। आम आदमी – मैथिली कविता

रामचरितमानस मोतीः जनकजीक राम-लक्ष्मण केँ देखि मुग्धताक कथा

स्वाध्याय – प्रवीण नारायण चौधरी रामचरितमानस मोती श्री राम-लक्ष्मण केँ देखिकय जनकजीक प्रेम मुग्धता १. मन प्रेम मे मग्न जानि राजा जनक विवेकक आश्रय लय धीरज धारण कयलनि आर मुनिक चरण मे सिर नमाकय गद्‍गद्‍ (प्रेमभरल) गंभीर वाणी बजलाह – हे नाथ! कहू, ई दुनू सुन्दर बालक मुनिकुल केर आभूषण छथि या कोनो राजवंश केर रामचरितमानस मोतीः जनकजीक राम-लक्ष्मण केँ देखि मुग्धताक कथा

अर्जुन दृष्टि मे मिथिला राज्य एकमात्र लक्ष्य

ई त सब जानैत आ मानैत होयब जे –   हम मैथिलीभाषीक जन्म किछु विशेष कारण सँ मिथिला पुण्यक्षेत्र मे भेल अछि। पूर्वजन्म के किछु विशेष कर्म आ प्रारब्ध के चलते एहि धर्मक्षेत्र मे मनुष्य रूप मे पदार्पण कय सकल छी। जन्म भेटब प्रकृति आ ईश्वर केर ब्रह्माण्डीय संरचनाक एकटा विलक्षण आ विचित्र घटना होइत अर्जुन दृष्टि मे मिथिला राज्य एकमात्र लक्ष्य

रामचरितमानस मोतीः श्री राम-लक्ष्मण सहित विश्वामित्र जीक जनकपुर मे प्रवेश

स्वाध्याय – प्रवीण नारायण चौधरी रामचरितमानस मोती श्री राम-लक्ष्मण सहित विश्वामित्र जीक जनकपुर मे प्रवेश रामचरितमानस मोती अन्तर्गत हमरा लोकनि मर्यादा पुरुषोत्तम रामचन्द्र जीक जीवन लीला पढ़ि रहल छी। ताहि मे सँ अपना वास्ते ज्ञानामृत सन्देश (सनेश) ग्रहण करबाक ध्येय अछि। मोती तेँ सम्बोधित कयल अछि। विगत के अध्याय मे पढ़लहुँ केना भगवान् श्री रामचन्द्र रामचरितमानस मोतीः श्री राम-लक्ष्मण सहित विश्वामित्र जीक जनकपुर मे प्रवेश

दृष्टि आ समझ सभक अलग होइत छैक – दार्शनिक दृष्टान्त

स्वाध्याय – प्रवीण नारायण चौधरी यात्री हम सब जीवन यात्रा मे छी। ई यात्रा पृथ्वी पर भिन्न-भिन्न जीवरूप मे प्राप्त अछि। ठीक तहिना एहि ब्रह्माण्डक अनन्त संरचना मे अनन्त पृथ्वीक परिकल्पना आ अनन्त जीवनयात्राक कल्पना यथार्थ सत्य थिक। बुझनिहार बुझैत छथि। अबुझ भटैक रहल छथि। बुझ-अबुझ केर स्थिति सेहो महान सत्य थिक। जरूरी नहि जे दृष्टि आ समझ सभक अलग होइत छैक – दार्शनिक दृष्टान्त