साधनोपयोगी पत्र – मानव जीवन केँ सफल बनेबाक सहज सूत्र (अवश्य पठनीय)
स्वाध्याय स्रोतः कल्याण, अनुवादः प्रवीण नारायण चौधरी १. वैराग्य आर भजन केना हो? प्रिय महोदय! सप्रेम हरिस्मरण! अपनेक एक पत्र पहिने भेटल छल। किछु समयक बाद दोसर सेहो भेटल। पहिले पत्रक जबाब नहि देल जा सकल, एकरा लेल कोनो तरहक विचार नहि करबा चाही। अहाँ हमर पत्रक प्रतीक्षा करैत रहैत छी, ई अहाँक बड पैघ … साधनोपयोगी पत्र – मानव जीवन केँ सफल बनेबाक सहज सूत्र (अवश्य पठनीय)







