Search

प्रवीण नारायण चौधरी

आउ किछु सुनबैत छी – किसलय कृष्ण

गीत – किसलय कृष्ण मांगी नइ हम जे सुरूज की चान द’ दिअ । हेरायल सन हमर मैथिल पहिचान द’ दिअ । चाही नइ ग्लोबल वा त्लोबल जेना कोनो गाम, कने अंगना- दलान संग मचान द’ दिअ । हेरायल सन हमर मैथिल पहिचान द’ दिअ । सुआद ओ कहाँ छै एहि पेटीस आ पिज्जामे, बरु आउ किछु सुनबैत छी – किसलय कृष्ण

नेपालक प्रदेश 2 में 8 गोट पर्यटक स्थल जोड़ल गेल, भोरक प्रयास सफल

जनकपुर, नवम्बर 1, 2018 । मैथिली जिन्दाबाद!! मिथिला पयर्टन अभियान में काफी समय सँ अथक प्रयास स्वरुप नेपाल सरकार तथा सरोकारवाला सभक संग कयल गेल वकालत तथा प्राविधिक सहयोगक योगदानक प्रतिफल आइ भेेेटबाक जाानकारी भोर संस्थाक संस्थापक राजकुमार महतो देलनि अछि। एहि अभियान में लागल सभ सहभागी तथा सहयोगी केँ धन्यवाद दैत ओ कहलनि जे नेपाल सरकार नेपालक प्रदेश 2 में 8 गोट पर्यटक स्थल जोड़ल गेल, भोरक प्रयास सफल

नेपालक प्रसिद्ध पुरातत्वविद् डा. तारानन्द मिश्र केँ भेटतनि चेतना समिति पटना सँ सम्मान

नवम्बर १, २०१८. मैथिली जिन्दाबाद!! मैथिलीक वरिष्ठ साहित्यकार तथा सामाजिक संजाल मे सेहो अतिलोकप्रिय महत्वपूर्ण जानकारी सँ मैथिली दर्शक-पाठक लेल सूचनाक मुख्य स्रोत डा. रमानन्द झा रमण अपन फेसबुक स्टेटस मार्फत जनतब दैत कहलनि अछि जे नेपालक प्रसिद्ध पुरातत्वविद् डा. तारानन्द मिश्र केँ एहि वर्ष चेतना समिति द्वारा सम्मानित कयल जायत। डा. रमण केर अपडेट: नेपालक प्रसिद्ध पुरातत्वविद् डा. तारानन्द मिश्र केँ भेटतनि चेतना समिति पटना सँ सम्मान

कौआ आ मोर केर ओ कथा जेकर नैतिक शिक्षाक प्रासंगिकता आइ किछु बेसी बढल देखाइत अछि

नैतिक कथा (संकलन व अनुवाद: प्रवीण नारायण चौधरी) कौआ आ मोर एक दिन एक गोट कौआ जंगल मे मोर केर बहुतेरास पाँखि एम्हर-ओम्हर खसल देखि प्रसन्न होइत कहय लागल –   “वाह भगवान्!! बड पैघ कृपा केलहुँ अपने जे हमर मोनक बात सुनि लेलहुँ। हम एखनहिं ई पाँखि पहिरिकय खूब सुन्दर मोर बनि जाइत छी।” कौआ आ मोर केर ओ कथा जेकर नैतिक शिक्षाक प्रासंगिकता आइ किछु बेसी बढल देखाइत अछि

प्रेमक बसातक ऐतिहासिक प्रदर्शन: कुणाल ठाकुर

नवम्बर १, २०१८. मैथिली जिन्दाबाद!! मैथिली जिन्दाबाद डेस्क । मैथिली सिनेमाक इतिहासमे ई पहिल घटना थीक जे एक संग भारतीय आ नेपालीय मिथिलाक करीब तीन दर्जन सिनेमाहॉलमे प्रेमक बसात एक संग प्रदर्शित भ रहल अछि । सामाजिक विषय पर केन्द्रित मैथिली फिल्म प्रेमक बसात काल्हि दू नवम्बरसँ पूर्णिया, सुपौल, मधेपुरा, बेगूसराय, मुजफ्फरपुर, दरभंगा, मधुबनी संग प्रेमक बसातक ऐतिहासिक प्रदर्शन: कुणाल ठाकुर

नेपालक मिथिला ‘प्रदेश २’ मे मैथिली लेल प्रयासक संग-संग षड्यन्त्रकारी विरोध निरन्तरता मे

मैथिलीक समर्थन आ विरोधः नेपाल मे बड पैघ इतिहास कायम होबय जा रहल अछि एक दिश मैथिली भाषा आ साहित्य लेल निरन्तर चिन्ता कयनिहार वर्ग द्वारा प्रदेश २ केर सरकार सँ मैथिली संग-संग भोजपुरी भाषा केँ राजकाजक भाषा बनेबाक मांग करैत जनताक मौलिक मातृभाषा आ शिक्षा पद्धतिक संग अपन भाषिक पहिचान केर आधार पर सरकारी नेपालक मिथिला ‘प्रदेश २’ मे मैथिली लेल प्रयासक संग-संग षड्यन्त्रकारी विरोध निरन्तरता मे

नवतुरिया मैथिल सर्जक लेल सन्देश – सकारात्मक सृजनशीलता सँ सार्थक दिशा मे अग्रसर होउ

विचार नवतुरिया मैथिली साहित्यकार (नेपाल) प्रति लक्षित संबोधन – प्रवीण नारायण चौधरी नेपाल सँ मैथिली लेखकक परिचय संकलन मे एक अनुज शिवम प्रशान्त मैसेज कय केँ बतेलथि जे भाइजी – अपन किछु रचना अहाँ केँ मेल पर पठेने छी। तहिना विगत २-३ दिन मे आरो बहुत रास रचनाकार लोकनि अपन-अपन रचना मेल द्वारा पठौलनि अछि। नवतुरिया मैथिल सर्जक लेल सन्देश – सकारात्मक सृजनशीलता सँ सार्थक दिशा मे अग्रसर होउ

मैथिली बालकथा – बुधियार डाक्टर

मैथिली बालकथा – बुधियार डाक्टर – सुजीत कुमार झा, जनकपुर ‘दाई एकरा खिस्सा नहि कहिए ?’ ‘किए रे !’ ‘ई हमरा मारलक अए ।’ ‘हँ गै मुन्नी, भैयाके मारलिहए ? ’ ‘भैया हमर फित्ता तानि देलन्हि अछि ।’ ‘अएँ रे टिंकु तो बहिनके फित्ता तानि देलिहए, आ उल्टे कहैत छए मारलकौए ?’ दाई कनि तमसाईत मैथिली बालकथा – बुधियार डाक्टर

सुरुजक छाहरि कृति लेल कवि मनोज शाण्डिल्यकेँ भेटतनि कीर्तिनारायण मिश्र साहित्य सम्मान

किसलय कृष्ण, समाचार सम्पादक, मैथिली जिन्दाबाद । अक्टूबर २५, २०१८ ।  मैथिली साहित्यक क्षेत्रमे कविता विधाक लेल विशेष रूपसँ देल जायवला किर्तिनारायण मिश्र साहित्य सम्मान एहि बेर युवा कवि मनोज शाण्डिल्यकेँ प्रदान कयल जेतन्हि । चेतना समिति पटना द्वारा ई सम्मान प्रतिवर्ष आयोजित विद्यापति स्मृति पर्वक अवसर पर प्रदान कएल जाइत अछि । साहित्य अकादमी सुरुजक छाहरि कृति लेल कवि मनोज शाण्डिल्यकेँ भेटतनि कीर्तिनारायण मिश्र साहित्य सम्मान

दरभंगा मे झिलमिल झिझियाः झिझिया केर झंकार सँ मिथिला मे बहार

दरभंगा, २५ अक्टूबर २०१८ । मैथिली जिन्दाबाद!! शरद पूर्णिमा, पोखरीक महार, जगमगाइत इजोरिया, संस्कृति प्रेमी लोकनिक उमड़ल भीड़ और लोक संस्कृति प्रति हृदय सँ छलकैत अपनत्व भरल सिनेह …. एहेन दृश्य जँ कतहु देखा जाय तँ बुझू जे सोन मे सोहाग अछि । ओना तँ ई कोनो काव्य-कल्पना समान बुझय मे अबैत अछि, मुदा एहि कल्पना दरभंगा मे झिलमिल झिझियाः झिझिया केर झंकार सँ मिथिला मे बहार