नेपालक मिथिला ‘प्रदेश २’ मे मैथिली लेल प्रयासक संग-संग षड्यन्त्रकारी विरोध निरन्तरता मे

मैथिली संग भोजपुरी हो प्रदेश २ (नेपाल) केर राजकाजक भाषा, देल गेल मुख्यमंत्री केँ ज्ञापन पत्र

मैथिलीक समर्थन आ विरोधः नेपाल मे बड पैघ इतिहास कायम होबय जा रहल अछि

एक दिश मैथिली भाषा आ साहित्य लेल निरन्तर चिन्ता कयनिहार वर्ग द्वारा प्रदेश २ केर सरकार सँ मैथिली संग-संग भोजपुरी भाषा केँ राजकाजक भाषा बनेबाक मांग करैत जनताक मौलिक मातृभाषा आ शिक्षा पद्धतिक संग अपन भाषिक पहिचान केर आधार पर सरकारी कामकाज करैत राज्यक दीर्घगामी विकासक गारन्टी करबाक काज कयल जा रहल अछि। एहि मे डा. राम भरोस कापड़ि ‘भ्रमर’ जनकपुर, काठमान्डू, बीरगंज, राजविराज, भारतक कइएक स्थान आदि पर मुहिम चलेबाक भार सम्हारने छथि। आरो कइएक सकारात्मक आ निजताक महत्व बुझनिहार लोक एहि लेल अपना-अपना तरहें भाषा आयोग, प्रदेश सरकार, केन्द्रीय सरकार आदिक ध्यानाकर्षण करबाक संग-संग व्यक्तिगत स्तर पर सेहो भाषा-साहित्यक चिन्तन केँ सम्हारबाक उदाहरण बना रहला अछि।

श्री राम भरोस कापड़ि ‘भ्रमर’ द्वारा फेसबुक स्टेटस मे आइ ई जानकारी देल गेल अछिः “आई मुख्य मंत्री लालबाबू राउत के दू नंबर प्रदेश में बाजल जाईत भाषा के ब्याबस्थपन अा मैथिली प्रति विकसित भ रहल सोच स अवगत करबैत प्रतिनिधि मंडल दिश सं राम भरोस कापड़ी भ्रमर । भाषा समस्या प्रति गंभीर होइत मुख्य मंत्री जी जलदीय एकर निदानक आश्वासन देलैन । दू नंबर प्रदेशक अस्मिता बचायबक के हेतु हुनकर अडान प्रति सभ गोटे बधाई ज्ञापन कैलकैन । प्रतिनिधि मंडल में डॉ पशुपतिनाथ झा, डॉ रेवतिरमन लाल, अयोध्या नाथ चौधरी, बिजयेता झा, अनिल कर्ण, राजाराम सिंह राठौड़, कलाकार रितेश साह आ उद्योगपति ओम प्रकाश सर्राफ सामेल छलाह ।”

दोसर दिश किछु विचित्र बात सब सेहो खूब घटैत देखि रहल छी। यथा –

१. किछु विचित्र विद्वान् (गूगली मास्टर*) भाषा वैज्ञानिक बनिकय ई सिद्ध करबाक लेल प्रदेश केर सरकार गठन होइते उपरान्त मैथिली केँ सामन्तीवर्गक भाषा होयबाक तर्क सब राखय लगलाह आर एकर असैर आम जनमानस मे आपसी विभाजन नित्य-प्रतिदिन बढैत चलि जा रहल अछि। नेपालक मिथिलाक्षेत्र मे एहेन-एहेन विद्वान् सभ राजनीतिक एजेन्डा लय केँ अपन काज सुतारैत छथि – ताहि लेल समाज केँ तोड़िकय अपन स्वार्थ सिद्धि आ विद्वता केँ प्रमाणित करय मे ओ केकरो सँ पाछाँ नहि रहय चाहि रहला अछि। ई अलग बात भेल जे छद्म विद्वता हुनकर कोनो उचित मंच पर नहि टिक पबैत छन्हि, मुदा लोकक मोन मे दुविधा आ समाज केँ विखंडित करबाक दुष्प्रयास मे ओ आंशिक सफलता पाबि कन्हा कुकूर जेकाँ माँड़हि पीबि तिरपित होइत रहैत छथि।
२. गोटेक वर्ग मैथिली भाषाक ठेंठ बोली बजनिहार केँ आब ‘मगहीभाषी’ कहिकय संबोधित करबाक एकटा एकदम विचित्र रेखा खींचय लागल छथि। एहि क्रम मे प्रदेश २ केर वर्तमान गृहमंत्री सेहो कोनो सार्वजनिक भाषण मे ई कहैत अभरलाह अछि जे मैथिली सभक भाषा नहि थिक। प्रा. डा. रामावतार यादव वा डा. योगेन्द्र प्रसाद यादव सहित अनेकानेक भाषा-वैज्ञानिक सँ भरल पड़ल ई नेपालक मिथिला-मधेश भूमि मे नेताजी नहि जानि कोन शिक्षा आ डिग्री अथवा शोधक आधार पर ‘मगहीभाषा’ केर नव परिकल्पना अपन क्रान्तिकारी नेतृत्व सँ मिथिलाक्षेत्र मे थोपय चाहि रहला अछि। किछु दिन एकटा पिछड़ावर्ग प्रकोष्ठक नेताक नाम एहि मामिला मे सुनी, तऽ सन्देह हुअय जे भऽ सकैत छैक जे गंगापार मगह क्षेत्र सँ ई लोकनि आबिकय नेपाल मे पीढी-दर-पीढी बसि गेल हेताह ताहि लेल मगहीभाषीक रूप मे परिचिति तकैत छथि, लेकिन हुनकर लिखल-बाजल बात सब पढि-सुनि एना लागल जे मैथिलीक मानदंड सँ अपना केँ नीचाँ मानि ई सब स्वयंकल्पना सँ आहत भऽ अलगे एकटा पहिचान स्थापित करय चाहि रहल छथि।
३. एम्हर – किछु लोक केँ मधेश आन्दोलनक एजेन्डा प्रदेश २ धरि सीमित होयबाक सच्चाई बड अखरैत छन्हि। ओ, समग्र मधेश एक प्रदेश केर एक एजेन्डा सँ हारिकय मधेश २ प्रदेश तक गेलाह। फेर मधेश आन्दोलन आ आन्तरिक नाकाबन्दी कय ६-६ मास धरि नेपाल मे बन्दी कय केँ एतुका राज्य, ओकर पुलिस, ओकर सेना आ पहाड़ मे बसनिहार विभिन्न समुदाय सँ एकटा अन्तर्विभाजनक झगड़ा मोल लय संविधान मे अपना लेल समानता पेबाक न्याय लेल लड़लनि। दर्जनों आदमी शहीद भेल। आर, जबरदस्ती संविधान घोषणा कय देलाक बाद संपन्न चुनाव मे वैह मधेशवादी नेतृत्व सिर्फ प्रदेश २ केर स्थानीय प्रदेश सरकार धरि गठबंधन सँ सत्तासीन भेलाक बाद आब अपन आन्दोलन केँ स्थापित करबाक लेल बलजोरी मिथिलाक्षेत्र टा केँ मधेश मानिकय अपन पीठ थपथपाबय चाहैत छथि। तैँ, हुनका मैथिली-मिथिला केर नाम सँ खौंझी छुटैत छन्हि। ओ कोहुना अपन ‘जय मधेश’ नारा केँ स्थापित करय लेल प्रदेश २ केर जमीन आ लोक केँ भड़काकय गोटी लाल करबाक चक्कर मे छथि।
४. एकटा विशेष गिरोह जे जन्म भरि नेपाली बाजिकय-लिखिकय आ बड़का-बड़का गप्प छाँटिकय खरखाँही लूटय मे व्यस्त रहलाह – जिनकर अनेकों आलेख, विचार आदि प्रकाशित अछि जाहि मे मैथिलीक हित अथवा मैथिल पहिचान केर पृष्ठपोषण लेल आइ धरि एको आखर कतहु नहि भेटैत अछि – तिनका लोकनि केँ नेपालक नव संविधान मे समानुपातिक समावेशिकताक मान्यता भेटलाक बाद मैथिलीक अधिकारसम्पन्नता सँ एहेन खौंझी छुटि रहलनि अछि जेकर परावार जुनि पुछू। ओ लोकनि किनको व्यक्तिगत समारोह तक मे किनका बजेबाक चाही, के विद्वान् कोन विषय पर बजताह, भोज मे दालि बनय वा झोर वला तरकारी आ कि बरी कि माछ…. इत्यादिक हिसाब-किताब अपन कुतर्क सँ करय मे व्यस्त छथि। ई लोकनि अपन पुछ नहि हेबाक कारण जेकर पुछ होइत छैक तेकरा पर अरगासन ढारय लेल हाथ मे आगि सँ भरल कोहा-गोइठा-लुकाठी-ऊक आदि लेनहिये सोशल मीडिया पर घिना रहल छथि। तर्क-कुतर्क मे मैथिली समान प्राचीन भाषा आ स्थापित सत्य – यथा विद्यापति आदि पर भोजपुरीक कथित विद्वान् आ भाषाविद् लोकनिक आलतू-फालतू तर्क सँ गपबाजी-लफ्फाबाजी मे लागल देखाइत छथि। सृजनकर्म छोड़िकय ई लोकनि सिर्फ बहस आ गलत समीक्षा ओ आलोचना मे समय खर्च करैत कथित ‘शुद्धीकरण’ अभियान चलेबाक दम्भ सेहो भरैत छथि। नेपालक एहि परिवर्तनशील राजनीतिक परिदृश्य मैथिली समान विश्वप्रसिद्ध सुस्थापित आ संसार भरिक कतेको विश्वविद्यालयक बौद्धिक सामग्री मे अपन स्थान ग्रहण कएने भाषा-साहित्य पर नव-नव तर्क आ बौद्धिकता प्रस्तुत कय अपन पीठ अपनहि सँ ठोकि वैह ऊपर कहल राजनेताक वोटबैंक पोलिटिक्स आ समाज केँ विखंडित करू आ सत्तासुख भोगैत रहू एहि पाँति केँ हृष्ट-पुष्ट बना रहल छथि। धरि मैथिली हिनका सँ कय डेग घुसकत से एहि जन्म केर तँ बाते छोड़ू सात जन्म धरि पार लागयवला विषय नहि बुझाइत अछि।
एहि तरहक बहुतो रास बात एक साथ मैथिली भाषा पर होइत देखि रहल छी नेपाल मे। आब आगू देखू जे यथार्थ मे केकर जीत होइत अछि। सत्य केर आ कि बनावटी कुतर्क केर!
हरिः हरः!!