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प्रवीण नारायण चौधरी

रामचरितमानस मोतीः तापस प्रकरण

स्वाध्याय – प्रवीण नारायण चौधरी रामचरितमानस मोती तापस प्रकरण पिछला अध्याय मे श्री रामजी जानकीजी, लक्ष्मणजी आ निषादराज गुह सहित यमुना पार कय ओतय स्नान-ध्यान कयलनि आ तेकर बाद…. १. ताहि अवसर ओतय एक तपस्वी अयलाह जे तेजक पुंज, छोट अवस्थाक आर सुन्दर छलथि। हुनक गति कवि नहि जनैत छथि, या फेर ओ कवि रहथि रामचरितमानस मोतीः तापस प्रकरण

सगर राति दीप जरय द्वारा मैथिली भाषा-साहित्य सँ आमजन केँ जोड़ल जा रहल अछि

यैह जमीनी काज होइत रहबाक चाही मैथिली भाषा-साहित्यक उत्थान संग एकर लाभ जमीनी स्तर पर समाजक हर वर्ग केँ प्राप्त हो ताहि अभियानक नाम थिक “सगर राति दीप जरय”। परसू ३१ दिसम्बर २०२२ मधुबनी जिलाक रहुआ संग्राम मे एकर ११२म् आयोजन सम्पन्न भेल अछि। नियमानुसार हर आयोजन मे आगूक आयोजन लेल एक संयोजक आ स्थान सगर राति दीप जरय द्वारा मैथिली भाषा-साहित्य सँ आमजन केँ जोड़ल जा रहल अछि

मैथिली भाषा साहित्य के जमीनी अभियान: सगर राति दीप जरय 112म् सम्पन्न

साभार फेसबुक: श्री नारायण झा के रिपोर्ट 【 ‘सगर राति दीप जरय’- आयोजन क्रम सं. 112 】 【 दिनांक – 31 दिसम्बर 2022】 ‘सगर राति दीप जरय’ मैथिलीक कथा-कार्यक्रम जे 31 दिसम्बर 2022केँ पारसमणि धाम रहुआ संग्रामक अन्तर्गत आदिनाथ मधुसूदन पारसमणि संस्कृत महाविद्यालय, रहुआ-संग्रामक परिसरमे अशोक अविचलक संयोजकत्वमे सम्पन्न भेल। विधिवत कार्यक्रमक शुभारम्भ दीप प्रज्वलनसँ मैथिली भाषा साहित्य के जमीनी अभियान: सगर राति दीप जरय 112म् सम्पन्न

समूह एक गतिविधि अनेकः दहेज मुक्त मिथिला समूहक साप्ताहिक समीक्षा

सामाजिक संजालः दहेज मुक्त मिथिला समूह के साप्ताहिक समीक्षा – कीर्तिनारायण झा ३१ दिसम्बर २०२२ । “हमर पिया, हरलैथि जिया, बांचत कोना प्राण? सदिखन हुनके याद करै छी, आर किछु नै ध्यान” कलम सँ निकलल काव्यक धार कार्यक्रम में हमर सभक गुणी भाई श्री अखिलेश कुमार मिश्र जी के एहि पांती सँ आजुक साप्ताहिक समीक्षा समूह एक गतिविधि अनेकः दहेज मुक्त मिथिला समूहक साप्ताहिक समीक्षा

भाषा के भ’ओ नहि बुझनिहार नेताजी केँ भाषिक अधिकार सँ कोन मतलब, बस वोट टा चाही

भाषाक महत्व सब बुझथि (भाषा विमर्श) – प्रवीण नारायण चौधरी * शिक्षा आ संस्कारक काज अनधिकृत लोक नहि कय सकैछ * खाली मैथिली अभियानी टा कियैक हल्ला मचेने अछि सामाजिक संजाल आ नागरिक पत्रकारिता के लोकप्रियता दिनानुदिन बढ़ैत गेला सँ सक्षम-साकांक्ष मैथिलीभाषी मे अपन भाषा प्रति चिन्ता-चिन्तन स्वाभाविक रूप सँ बढ़ल अछि। पूर्वक समय सँ भाषा के भ’ओ नहि बुझनिहार नेताजी केँ भाषिक अधिकार सँ कोन मतलब, बस वोट टा चाही

रामचरितमानस मोतीः प्रयाग पहुँचब, भरद्वाज संवाद, यमुनातीरक निवासी लोकनिक प्रेम

स्वाध्याय – प्रवीण नारायण चौधरी रामचरितमानस मोती प्रयाग पहुँचब, भरद्वाज संवाद, यमुनातीरक निवासी लोकनिक प्रेम १. प्रभु श्री रघुनाथजी गणेशजी और शिवजीक स्मरण कयकेँ गंगाजी केँ मस्तक नमा सखा निषादराज, छोट भाइ लक्ष्मणजी और सीताजी सहित वन लेल चलि पड़लाह। ओहि दिन गाछक नीचाँ निवास भेलनि। लक्ष्मणजी और सखा गुह विश्रामक सब सुव्यवस्था कय देलखिन्ह। रामचरितमानस मोतीः प्रयाग पहुँचब, भरद्वाज संवाद, यमुनातीरक निवासी लोकनिक प्रेम

कतेक जिबैया मैथिली – अहमदाबाद सँ उदित मिथिला-मैथिलीक नव सूर्य

कतेक जिबैया मैथिली शाश्वत मिथिला फाउन्डेशन आ माँ जानकी सेवा समिति अहमदाबाद केर विभिन्न आयोजन मिथिला लेल पश्चिम सँ नव सूर्योदयक विशेष अलंकार दैत पूर्व मे कतिपय सूचना प्रवाह कएने छी। हमर पाठक लोकनि केँ नीक सँ पता छन्हि जे मैथिली के काज करय लेल कथमपि कोनो व्यक्ति केकरो प्रेरित नहि कय पबैत छैक। बल्कि कतेक जिबैया मैथिली – अहमदाबाद सँ उदित मिथिला-मैथिलीक नव सूर्य

मैथिल युवजनक नाम हमर जरूरी पत्र

प्रिय युवजन, जेकरा अपन मौलिकता के कोनो भान नहि, निजता प्रति कोनो सम्मान नहि, ओकरा लेल आली-हौसे छोड़िकय बाकी दोसर कोनो काम नहि। ई महावाक्य याद राखू। नजरि खोलिकय इतिहास देखू। आइ तक भाषा तोड़निहार कोनो दोसर विकल्प केकरो देने हुए, जीवनस्तर मे कोनो सुधार अनने हुए, शिक्षा आ साक्षरता दोसर कोनो भाषा केँ गुलामी मैथिल युवजनक नाम हमर जरूरी पत्र

भाषा तोड़ब – समाज टूटतः विध्वंसक विचारधारा पर रोक आवश्यक

मैथिली केँ खन्डित करनिहार ध्यान देब हमरा सब के भाषा ‘मैथिली भाषा’ के नाम बिगाड़य के लेल किछु लोक जातीय आधार पर बड़ा उद्यत् देखाइत छथि। हमरा मोन पड़ैत अछि ‘संस्कृत भाषा’। संस्कृत भाषा केँ एकल जातीय भाषा, उच्चवर्ग द्वारा बाजल जायवला भाषा कहिकय एहिना समाप्त कयल गेल। लोकक मन-मस्तिष्क मे एहि महत्वपूर्ण भाषा प्रति भाषा तोड़ब – समाज टूटतः विध्वंसक विचारधारा पर रोक आवश्यक

ओ नरमुन्ड आ नेपालक राजनीतिक अवस्था

विचार – प्रवीण नारायण चौधरी ओ नरमुन्ड आ नेपालक राजनीतिक अवस्था एक अन्वेषक पंडितजी केँ भिक्षाटन लेल नित्य जाय पड़नि यजमानक खोज मे। जैह माँगि आनथि ताहि सँ परिवार चलि पाबैत छलन्हि। मुदा पंडितजी केँ भिक्षाटन सँ बेसी अन्वेषण कार्य मे रुचि लगैत छलन्हि। एहि कारण घर मे अभावक कारण बेसीकाल कलह-विवाद भेल करन्हि। एक ओ नरमुन्ड आ नेपालक राजनीतिक अवस्था