जनकपुरमें होयत होरी महोत्सव आ महामूर्ख सम्मेलन

 

मनीष कर्ण ,जनकपुरधाम16मार्च,2022.मैथिलीजिन्दाबाद।।

प्रत्येक वर्ष होरीक  अवसरपर मिथिला नाट्यकला परिषद् (मिनाप) जनकपुरधाममें आयोजना करैत आएल दुई दिवसीय होरी महोत्सव आ महामुर्ख सम्मेलन अहु वर्ष सेहो भव्यतापूर्वक मनयबाक निर्णय कायल गेल अछि।मिनाप अहि वर्ष होरी महोत्सव चैत ३ गते( तदनुसार 17 मार्च 2022) बृहस्पति दिन आ महामुर्ख सम्मेलन ४ गते(18मार्च 2022) शुक्रदिन मनयबाक निर्णय भेल मिनापक महासचिव शैलेन्द्र मल्लिक जानकारी देलथि।

ओ पहिल दिन बृहस्पति दिन डम्फा वादन आ उद्घाटन, होलीउपर विशेष चर्चा परिचर्चा, हास्य कवि गोष्ठी, निश्चित मापदण्ड अनुसार होली गायन, उत्कृष्टाक चयनसँगहि पुरस्कार वितरण कार्यक्रम  रहल जानकारी देलैन्ह।

तहिना, दोसर दिन शुक्रदिन विशिष्ट शैलीमें उद्घाटन, होली गायन, मिनापक हास्य शैली व्यंग्यपूर्ण नाट्य प्रस्तुती, मूर्ख एवं महामूर्खक उपाधि वितरण संगहि मूर्ख आ महामूर्खसभकेँ सम्मान तथा प्रमोपहार वितरण करबाक महासचिव मल्लिक जनोलैन्ह।वि.सं. २०६१(सन्२००५) सालसँ जनकपुरधाममें महामूर्ख सम्मेलनक आरम्भ भेल ।

वि.सं.२०६१सालमेँ महामूर्खक उपाधी मैथिली कवि नरेश ठाकुर, २०६२ मेँ तत्कालीन नेकपा एमालेक नेता शीतल झा, २०६३मेँ तत्कालीन जनकपुर नगरपालिकाक मेयर हरिबहादुर बिसी, २०६४ मेँ तत्कालीन सदभावना पार्टीक नेता ओमकुमार झा, २०६५ मेँ वरिष्ठ साहित्यकार डॉ.राजेन्द्र विमल, २०६६ मेँ पूर्वमन्त्री रामचन्द्र झा, २०६७ मेँ नेपालक चर्चित राजनीतिक विश्लेषक सिके लाल, २०६८ मेँ साहित्यकार रामभरोष कापड़ि “भ्रमर”, २०६९ मेँ नेपाली काँग्रेस केर संसदीय दलक नेता रामसरोज यादव, २०७० मेँ डॉ. विजयकुमार सिंह, २०७१ मेँ उद्योग, पर्यटन, वन तथा वातावरण मन्त्री शत्रुधन महतो, २०७२ मेँ समसानघाटक स्वरुप परिवर्तन कय आधुनिक स्वर्गद्वार बनाक चर्चा रहल पवन सिंघानीया केँ महामुर्खक उपाधी प्रदान काएल गेल छल।

तहिना २०७३ सालमें सप्तरी जिलाक मलेठमेँ भेल नेकपा एमालेले द्वारा मेची महाकाली अभियानक क्रममें पुलिसक गोली लागि ५ गोटें  मृत्यु भेला कारणे अन्तिम समयमें आबि होली महोत्सव कार्यक्रम मिनाप स्थगित काएल गेलै छल।

२०७४ मेँ महामुर्खक उपाधी तमलोपाक अध्यक्ष वृषेशचन्द्र लाल, २०७५ मेँ जनकपुरधाम उपमहानगरपालिकाक मेयर लालकिशोर साहकेँ देल गेल छल।

तहिना २०७६ सालमेँ मधेस प्रदेशक मुख्यमन्त्री लालबाबु राउत आ २०७७ सालमेँ महजोडी मदन कृष्ण श्रेष्ठ आ हरिवंश आचार्यकेँ महामुर्खक उपाधि देल गेल छल।