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प्रवीण नारायण चौधरी

आखिर नेपाल-भारत मैत्री केकरा खटैक रहल छैक आ कियैक ?

नेपाली राजनीति आ भारत ‘भारतवर्ष’ अन्तर्गतक अनेकों देश मे आइ अपना – अपना भूगोल अनुसारक अनेकों दावी आ गाथा सब पर आधारित बात-विचार सब सुनि-देखि रहल छी हम सब । कहल जाइत छैक – भारत बीच मे, आजू-बाजू विभिन्न देश । उत्तर नेपाल, पूब बंगलादेश, पच्छिम पाकिस्तान आ दक्षिण म्यांमार । सीमा सँ जुड़ल आरो आखिर नेपाल-भारत मैत्री केकरा खटैक रहल छैक आ कियैक ?

Mahabharat: Chapter 1 – Devavrata

Mahabharata – by C. Rajagopalachari  Chapter 1 Devavrata “You must certainly become my wife whoever you may be.” Thus said the great king Santanu to the Goddess Ganga who stood before him in woman form, intoxicating his senses with her superhuman loveliness. The king earnestly offered for her love, his kingdom, his wealth, his all, Mahabharat: Chapter 1 – Devavrata

सम्पूर्ण वेदक अनुवाद – आरम्भ मे स्रोत अनुवादकक कृतिक प्रस्तुति

ऋग्वेद – संहिता ॥ अथ प्रथमं मण्डलम् ॥ [ सूक्त – १ ] ऋषि मधुच्छन्दा वैश्वामित्र । देवता – अग्नि । छन्द – गायत्री । १. ॐ अग्निमीळे पुरोहितं यज्ञस्य देवमृत्विजम् । होतारं रत्नथातमम् ॥ १ ॥ हम अग्निदेव की स्तुति करते हैं । (कैसे अग्निदेव ?) जो यज्ञ (श्रेष्ठतम पारमार्थिक कर्म) के पुरोहित (आगे सम्पूर्ण वेदक अनुवाद – आरम्भ मे स्रोत अनुवादकक कृतिक प्रस्तुति

Mahabharat: Ganapati, The Scribe

Mahabharat – by C. Rajagopalachari Ganapati, The Scribe Bhagavan Vyasa, the celebrated compiler of the Vedas, was the son of the great sage Parasara. It was he who gave to the world the divine epic of the Mahabharata. Having conceived the Mahabharata he thought of the means of giving the sacred story to the world. Mahabharat: Ganapati, The Scribe

बलिराजगढ़ मे पुरातात्विक उत्खनन सन्दर्भित साहित्यकार डा. महेन्द्र नारायण रामक प्रतिवेदन

बलिराजगढ परिभ्रमण – डा. महेन्द्र नारायण राम बलिराजगढ, बाबूबरही जिला-मधुबनी, बिहार केर खुदाइ ऐतिहासिक ओ पुरातात्विक दृष्टि सं अत्यंत महत्वपूर्ण रहल अछि । मार्च, 2026 मे एकर दोसर चरणक खुदाइ फेर सं आरंभ भेल अछि, जे एहि क्षेत्रक प्राचीन गौरव कें उजागर करबा मे पैघ भूमिका निबहा रहल अछि । एकर पुरातात्विक महत्व पर विचार बलिराजगढ़ मे पुरातात्विक उत्खनन सन्दर्भित साहित्यकार डा. महेन्द्र नारायण रामक प्रतिवेदन

INDIA’S NURSING FUTURE: BUILDING A STRONGER HEALTHCARE WORKFORCE

Article: Health Services Why Skilled Nurses Are the Backbone of Modern Healthcare By Dr. A kumar Director (Opration) MSPL India’s healthcare sector is witnessing one of the fastest transformations in its history. From advanced super-specialty hospitals and medical colleges to expanding rural healthcare systems and digital health services, the country is rapidly strengthening its healthcare INDIA’S NURSING FUTURE: BUILDING A STRONGER HEALTHCARE WORKFORCE

वेद – मैथिली अनुवाद पुस्तक मादे वरिष्ठ साहित्यकार केदार काननक संछिप्त समीक्षा

वेद – केदार कानन प्रिय‌ प्रवीण‌ नारायण‌ चौधरी‌ एक‌ विलक्षण‌ काज‌ कयलनि‌ अछि‌ । हालमे‌ मुम्ब‌ईमे‌ सम्पन्न‌ भेल‌ मैथिली‌ साहित्योत्सवमे‌ एहि‌ वेद‌ केर‌ लोकार्पण‌ भेल‌ छल‌ । ताहिमे‌ हमहूं‌ उपस्थित‌ छलहुं‌ । आइ‌ दूपहरमे‌ एहि‌ पोथीकें‌ जतय‌-ततयसं‌ पढलहुं‌ । अनुवाद‌ बढिया‌ लागल‌ । प्रवीण‌ जी‌ अभियानी‌ छथि‌ ।मैथिलीक‌ हित‌ चिन्तनमे‌ सदैव‌ लागल‌ रहैत‌ छथि‌ । वेद – मैथिली अनुवाद पुस्तक मादे वरिष्ठ साहित्यकार केदार काननक संछिप्त समीक्षा

‘वेद’ – कांची कामकोटि पीठक शंकराचार्य श्री चन्द्रशेखरेन्द्र सरस्वतीक लिखल ‘द वेदाज’ केर मैथिली अनुवाद

:: संक्षिप्त समीक्षा::::’वेद’/श्री श्री 1008 श्री चन्द्रशेखरेंद्र सरस्वती/अंग्रेजी::(मैथिली अनुवाद/श्री प्रवीण ना.चौधरी):: रमेश ::कोनो भाषा,तखन धनीक मानल जाइत अछि, जखन ओकर व्यवस्थित भाषाविज्ञानी आ व्याकरण-प्रारुपक संगहिं,अप्पन देस आ क्षेत्रक प्राचीन सभ्यता-संस्कृति स’ सम्बन्धित, आदिकालीन/प्राचीन शास्त्रीय साहित्यक ग्रंथ सबहक अनुवाद,ओइ जमीनक क्षेत्रीय भाषा मे उपलब्ध भ’ गेल हो!अइ मे,तें आ तखन सम्बन्धित क्षेत्रीय भाषा मे, अनुवाद-कार्यक महत्ता,बहुत ‘वेद’ – कांची कामकोटि पीठक शंकराचार्य श्री चन्द्रशेखरेन्द्र सरस्वतीक लिखल ‘द वेदाज’ केर मैथिली अनुवाद

सत्चिन्तनः दुर्गा पाठक तत्क्षण लाभ केना भेटैछ

सत्चिन्तनः दुर्गापाठ केर लोक-प्रासंगिकता (सन्दर्भ उत्तर चरित्र – महासरस्वतीक प्रीति-प्रसन्नता लेल सत्चिन्तन) असुर सभक उत्पात बढ़ि गेला पर देवलोक मे हड़कम्प मचि जाइछ । एहिना भेल छल जखन शुम्भ आ निशुम्भ नाम्ना दुइ असुर केर प्रकोप बढ़ि गेल । इन्द्रक गद्दी छिना गेलनि । इन्द्रक हाथ सँ तीनू लोकक राज्य आ यज्ञभाग छिना गेलनि । सत्चिन्तनः दुर्गा पाठक तत्क्षण लाभ केना भेटैछ

साधनाक साधन उपलब्ध रहितो समाधान नहि निकालि सकब हमरा लोकनिक दुर्भाग्य मात्र थिक

आध्यात्मिक चिन्तन – प्रवीण नारायण चौधरी सत्चिन्तनः माता दुर्गाक तीन चरित्रक विनियोग आ मानव जीवन आउ, आइ फेर किछु महत्वपूर्ण आध्यात्मिक चिन्तन आ मिथिलाक शाक्ता-साधना परम्परा मे दुर्गा पाठक महत्व पर चर्चा करी । ध्यान दियौक तीन विनियोग परः प्रथम चरित्र – ॐ प्रथमचरित्रस्य ब्रह्मा ऋषिः, महाकाली देवता, गायत्री छन्दः, नन्दा शक्तिः, रक्तदन्तिका बीजम्, अग्निस्तत्त्वम्, साधनाक साधन उपलब्ध रहितो समाधान नहि निकालि सकब हमरा लोकनिक दुर्भाग्य मात्र थिक