प्रभुक प्राप्ति साधना सँ नहि, सिर्फ मान्यता सँ – एक सहज आ सुन्दर दर्शन
स्वाध्याय – श्रीरामसुखदासजी महाराज लिखित ‘जीनव का सत्य’ पुस्तक केर दोसर अध्याय “प्रभुकी प्राप्ति साधनासे नहीं, केवल मान्यतासे’ केर अनुवाद – अनुवादः प्रवीण नारायण चौधरी प्रभुक प्राप्ति साधना सँ नहि, सिर्फ मान्यता सँ हमरा लोकनिक अनुभव यैह अछि जे हम वैह छी जे बाल्यकाल मे रही, मुदा ई शरीर आर संसार प्रतिक्षण बदैल रहल अछि। … प्रभुक प्राप्ति साधना सँ नहि, सिर्फ मान्यता सँ – एक सहज आ सुन्दर दर्शन









