लिटरेचर फेस्टिवलक तेसर दिन, भोजपुरी संग सहोदरी आ मैथिली रैम्प केर नव प्रयोग रहल आकर्षक

मैथिली लिटरेचर फेस्टिवल दिल्ली मे ३ दिनक भव्यतम आयोजन

नई दिल्ली, मार्च १८, २०१८. मैथिली जिन्दाबाद!!

आइ तेसर दिन पुनः अलग-अलग सत्रक प्रखर प्रस्तुतिक संग मैथिली लिटरेचर फेस्टिवल भारतक राजधानी नई दिल्ली स्थित इन्दिरा गाँधी राष्ट्रीय कला केन्द्र मे समदाउन गाबि भिजल आँखिये सम्पन्न भेल। एहि मे सहभागी सैकड़ों साहित्यकार, कवि, कलाकार, अभियानी लोकनि एक-दोसर सँ गला मिलैत विगत ३ दिन सँ निरन्तरता मे रहल फेस्टिवल केर सफलता सँ प्रेरणा भेटबाक समाद एक-दोसर सँ शेयर करैत रहलाह।

तेसर आ अन्तिम दिन सेहो मैथिली भाषा ओ साहित्य सँ जुड़ल विभिन्न विषय पर विमर्श आ प्रश्नोत्तरीक गरमागरम सत्र सब चलैत रहल। पहिल सत्र मे सांस्कृतिक संस्थाक संस्कृति विषय पर डा. कैलाश कुमार मिश्र दिल्ली स्थित विभिन्न महत्वपूर्ण संस्था सभक क्लास लगौलनि। समय सँ उपस्थिति सिर्फ अखिल भारतीय मिथिला संघक अध्यक्ष विजय चन्द्र झा तथा मैथिली साहित्य महासभाक अध्यक्ष अमर नाथ झा केर रहलनि परञ्च कनेकालक बाद क्रमशः दीपक फाउन्डेशनक संस्थापक दीपक झा तथा विश्व मैथिल संघक अध्यक्ष अनिला झा केर सेहो उपस्थिति भेल। एहि सत्र मे मुख्यतया संचालक विद्यापति स्मृति समारोहक प्रस्तुति ओ संस्थाक कार्यशैली पर प्रश्न ठाढ करैत आयोजक वर्गक सर्वाधिक अनुभवी विजय चन्द्र झा सँ सवाल पूछलनि। सवाल सँ पहिने ओ अपन चतुर संचालन सँ ई सिद्ध कय देने छलाह जे वर्तमान समय जाहि रूप मे महाकवि विद्यापतिक स्मृति दिवस संस्था आदि द्वारा मनायल जा रहल अछि एहि सँ समाज केँ कोनो हित नहि भऽ रहल अछि, उन्टा अपसंस्कृतिक झमार सहैत मैथिली भाषा ओ साहित्यक बेस नोकसानी भऽ रहल अछि। सुधार लेल पूछल गेल सवालक जबाब केँ टारैत विजय चन्द्र झा अपन अनुभवक पिटारा खोलैत अपना केँ दोसर सँ अलग सिद्ध करबाक प्रयास करब शुरू कयलाह जेकर प्रतिवाद केलाक कारण ओ संचालक केँ हुनका बाजय नहि देबाक आरोप लगबैत विमर्श सत्रक बहिष्कारक धमकी दैत यथार्थतः अपन लाठी फरकाबैत कुर्सी सँ उठि गेलाह। ताहिपर मैथिली लेखक संघक बड़-बुजुर्ग अभियानी अभिभावक लोकनि हुनका अपन बात पूरा करबाक लेल नैतिक समर्थन दैत संचालक कैलाश कुमार मिश्र सँ अनुरोध करैत कोहुना फेर सँ सत्र केँ सही स्थान पर आनल जा सकल।

मैथिली साहित्य महासभाक अध्यक्ष अमर नाथ झा नेतृत्व ईमानदार रहैत संस्थाक उद्देश्य केर पोषणक बात कयलन्हि, तहिना दीपक फाउन्डेशनक संस्थापक दीपक झा द्वारा अलग-अलग संस्थाक अलग-अलग उद्देश्य प्रति समर्पित रहिकय मातृ अस्मिताक रक्षा लेल कार्य करबाक संस्कार अपनेबाक विन्दु पर बल देलनि; तहिना विश्व मैथिल संघ केर अध्यक्ष अनिल झा युग अनुरूप संस्था अपन सदस्यक हित आ कल्याण लेल समर्पित बनिकय कार्य आगू बढेबाक विन्दु पर सभक ध्यानाकर्षण कयलन्हि। संचालक कैलाश कुमार मिश्र द्वारा बेर-बेर एहि सब संस्था केँ कन्सोर्टियम कल्चर आ तेकर लाभ पर प्रेरणादायक उदाहरण रखलाक बादहु विमर्शी मे श्रेष्ठतर विजय बाबू अपन अनुभव सँ मैथिलक संस्था मे एकताक अभाव केर कतेको रास व्यवहारिक उदाहरण दैत – पूर्वहु मे बनल मैथिल महासंघ केर असफलताक दृष्टान्त रखलनि। कोलकाता आइआइएम केर प्राध्यापक विद्यानन्द झा संचालक कैलाश कुमार मिश्रक अनुरोध आ विजय चन्द्र झा द्वारा प्रस्तुत नकारात्मक परिणाम बीच समन्वय स्थापित करबाक लेल मैथिल संस्थाक संचालक सब केँ एकटा निःशुल्क प्रशिक्षण देबाक प्रस्ताव दैत ओहि दिशा मे कार्य करबाक लेल उर्जा प्रदान कयलन्हि। तहिना मैथिली जिन्दाबाद केर संपादक प्रवीण नारायण चौधरी द्वारा ईमानदारीक बात सिर्फ मंच सँ करब आ व्यवहार मे केवल दंभ आ अहंकारक प्रदर्शन करबाक विन्दु पर मैसाम अध्यक्ष अमर नाथ झा सहित अन्य विमर्शी लोकनि केँ सावधान करैत विजय चन्द्र झा द्वारा लगभग हरेक मैथिलक कार्यक्रम जाहि मे अखिल भारतीय मिथिला संघ स्वयं आयोजना नहि कयने रहैत अछि ताहि मे विरोध करबाक अजीबोगरीब शैलीपर सवाल पूछैत हुनका सँ एकर कारण जनबाक जिज्ञासा कयलनि, संगहि ओ विश्व मैथिल संघक अध्यक्ष अनिल झा सँ स्पष्ट करबाक अनुरोध कयलन्हि जे सदस्यक हित सँ सम्बन्धित कोनो कार्यक्रम हुनक संस्था विश्व मैथिल संघ द्वारा कयल गेल अछि वा नहि ताहि पर संबोधन करथि। एहि समस्त प्रश्नक जबाब मे विमर्शी लोकनि अपन-अपन विचार रखलनि, एहि सत्र केँ भव्य सफल मानल गेल आ दिल्ली मे चलि रहल गतिविधि पर सेहो दर्शक लोकनि केँ नीक जनतब भेटल। प्रश्नकर्ता मे संजीव सिन्हा सहित आरो किछु दर्शक छलाह। सत्र अत्यन्त सारगर्भित आ अन्तर्क्रिया सँ भरल रहल।

पुनः दोसर सत्र मे लेखक रमेश केर संचालन मे विमर्शी कथाकार अशोक, हिरेन्द्र कुमार झा तथा पन्ना झा ‘सोझाँ-सोझी’ नामक सत्र मे मैथिली उपन्यासक इतिहास आ शिल्प पर चर्चा कयलन्हि। एहि सत्र मे उपन्यासकार पद्मश्री उषाकिरण खान केर सेहो अबैया छलन्हि जे कोनो कारणवश नहि आबि सकलीह। एहि सत्र मे मैथिली उपन्यासक आरम्भिक इतिहास सँ लैत दशक-दशक केर पृथक् चर्चा करैत विज्ञजन लोकनि बहुत रास महत्वपूर्ण साहित्यिक रहस्य सभ उजागर कयलन्हि। बीसम शताब्दीक आरम्भहिकाल सँ एक्कैसम शताब्दी अद्यावधिकाल धरिक उपन्यासक विभिन्न कृत्ति सब पर कथाकार अशोक द्वारा अत्यन्त सारगर्भित समीक्षा प्रस्तुत कयल गेल छल। उपन्यासक मैथिली शैली आ देशक आन-आन भाषाक शैलीपर सेहो विमर्शी लोकनि अपन विचार रखलनि। तहिना उपन्यासकार आ हुनक विशिष्टता सहित समस्त पक्ष पर सान्दर्भिक विचार सँ ई सत्र अत्यन्त मूल्यवान् मानल गेल।

अन्तिम दिवसक तेसर सत्र अन्तर्राष्ट्रीय मैथिली विमर्श मे योजनाकारक त्रुटि जे पहिने सँ संचालनकर्ताक नाम निर्धारण नहि कयल गेल छल तेकर परिणाम स्वरूप बिना कोनो अध्ययन आ समुचित विषय निर्धारणक विमर्शी लोकनि अपन-अपन तैयारी वस्तु-सामग्री सँ दर्शक लोकनि केँ बोर करैत रहला। काफी ज्यादा फझगज देखल गेल एहि सत्र मे। संचालनक भार जतय योगानन्द झा सम्हारलनि आ अन्तर्राष्ट्रीय मैथिली विमर्श केँ सीधा-सीधी नेपाल मे साहित्यिक गतिविधि पर आनिकय पटैक देलनि, तहिना वक्ता-विमर्शी साहित्यकार-अभियानी चन्द्रेश अपन मित्र राम भरोस कापड़ि भ्रमर केर रचना सँ ऊपर अन्य कोनो रचनाकारक रचनादिक चर्चा तक प्रस्तुत कयने बिना पहिने सँ लिखिकय आनल कागजक टुकड़ा पढि-पढि सत्र केँ ऊबाउ बना देलनि। एहि सत्र मे संयोगवश नेपाल सँ विमर्शी श्याम शेखर झा केर सहभागिताक कारण नेपालक वस्तुस्थिति, एकल भाषा नीति, शाहवंशीय राजकाल मे मैथिलीक शोषण, पूर्व मे मल्लकालीन राजाक समय मैथिलीक वर्चस्व आदिक संग वर्तमान साहित्यिक अवस्थापर गोटेक सान्दर्भिक बात केँ छुऔलनि। परञ्च दर्शक दीर्घा सँ नेपाल मे मैथिलीक प्रगतिशीलता आ राजनीतिक मांग जे ई दोसर राजभाषाक रूप मे संघीय नेपालक संविधान मे दर्जा प्राप्त करैत सेवा आयोगक परीक्षा आ प्राथमिक सँ लैत उच्च शिक्षा मे माध्यम तथा ऐच्छिक विषयक रूप मे पठन-पाठन मे आबय, संगहि प्रदेश १ तथा प्रदेश २ केर सेहो कामकाजक भाषाक रूप मे ई स्थान पाबय, इत्यादि विषय पर संछिप्त विमर्श केँ बढेबाक प्रयास कयल गेल छल। एहि सत्र मे ओना त स्थिति अराजक लागल, परन्तु अन्ततोगत्वा महत्वपूर्ण बात सभ दुनू कातक साहित्यकार लोकनिक सोझाँ मे आबि सकल। एकटा आरोप जे मैथिलीक छपल पोथी एहि कात सँ ओहि कात या ओहि कात सँ एहि कात आबय मे सरकार बाधक बनैत अछि, तेकरा जोरदार ढंग सँ खण्डन कयल गेल छल। संगहि, चन्द्रेशजी सँ निवेदन कयल गेल छल जे अन्तर्राष्ट्रीय मैथिली सम्मेलन राजविराजक घोषणापत्र आ आरो-आरो महत्वपूर्ण बात सब पर वृहत् दृष्टि राखथि। अन्यथा मैथिलीक अन्तर्राष्ट्रीय विमर्श मे कच्चा आ अधूरा जनतब देला सँ सन्देहक माहौल बनत।

मैथिली लिटरेचर फेस्टिवल २०१८ केर दिल्ली मे आयोजन मे समेत सहभागी मैथिली भोजपुरी अकादमीक अनुरोध पर एकटा सत्र भोजपुरी भाषा आ मैथिली भाषाक अन्तर्संबंध पर सेहो ‘सहोदरी’ शीर्षक सँ राखल गेल छल। एकर संचालन मुन्ना पाण्डे कयलन्हि, विमर्शीक तौर पर मैथिली भोजपुरी अकादमीक पूर्व अध्यक्ष अजित दूबे, मैथिली कवि अरुणाभ सौरभ, दिलीप पांडेय तथा निरालाजी भाग लेने छलाह। मैथिली आ भोजपुरी भाषाक अन्तर्संबंध मे साहित्यिक, सामाजिक, सांस्कृतिक – सब तरहक अकाट्य पक्षपर सकारात्मक चर्चा राखल गेल छल। भोजपुरी भाषा केँ सेहो संविधानक आठम् अनुसूची मे स्थान भेटय ताहि विषय दिस ध्यानाकर्षण करैत एक तरहक जनादेश संकलन करबाक उद्देश्य सेहो छल ई स्पष्ट भेल। बहुत रास नव बातक जनतब वक्ता लोकनिक संबोधन आ विचार-अभिव्यक्ति सँ श्रोता लोकनि केँ भेटलनि। मैथिली सँ भोजपुरी मे अनुवादक आवश्यकता तक नहि पड़ैछ, तहिना भोजपुरी सँ मैथिली मे सेहो कोनो सामग्रीक अनुवाद नहि होएछ – ई सहजहि भाषिक सामीप्यता केँ स्पष्ट करैत अछि, विशेषज्ञ वक्ता लोकनि बजलाह। मुन्ना पांडेय केर संचालन तथा अजित दूबे केर ओजपूर्ण अध्यक्षीय संबोधन सच मे प्रशंसनीय छल।

तदोपरान्त मैथिली नाटक विमर्श सत्र केर संचालन मैलोरंग केर निर्देशक प्रकाश झा द्वारा कयल गेल जाहि मे शम्भुनाथ झा ‘साँवरिया’, कमल मोहन चुन्नू, मुकेश झा तथा आनन्द मोहन झा विमर्शीक तौरपर भाग लेने छलाह। संचालक प्रकाश झा द्वारा नाटकक टेक्स्ट (लिखित सामग्री) पर केन्द्रित प्रश्नक जबाब मे साँवरियाजी अपन लेखकीय योगदानक बात शुरू कय देलनि जाहि पर हुनका रोकैत अभिनेता मुकेश झा सँ वैह प्रश्न यानि टेक्स्ट सँ सम्बन्धित अनुभव पर चर्चा कयल गेल। पुनः नाटककार आनन्द कुमार झा सँ संचालक प्रकाश झा केर प्रश्न एक जबाब अनेक केर स्थिति स्पष्ट छल। हलाँकि नाटककार आनन्द कुमार झा सेहो स्वयं कोना उपन्यासकार प्रभाष कुमार चौधरीक कहल बात मानिकय नाट्य लेखन मे एलाह, कोना ओ ग्रामीण परिवेश मे एक सँ बढिकय एक नाटक देलनि आर तेकर प्रभाव केहेन भेल ताहि तरहक विषय सँ जुड़ल बात-विचार राखि कोहुना टिकल रहलाह। हलाँकि बहुत काल धरि विमर्श एम्हर-ओम्हर होइत देखि अन्ततोगत्वा विज्ञ-विशेषज्ञ कमल मोहन चुन्नू द्वारा सब बात केँ खोंइचा छोड़ाकय बुझायल गेल। ओ नाटक लेखन शैली, ओकर अलग-अलग स्वरूप आ रंगकर्मीक सहजता आदि केँ ध्यान मे राखि मैथिली नाटकक विमर्श केँ अत्यन्त महत्वपूर्ण दिशा प्रदान कयलन्हि। दर्शक दीर्घा सँ सेहो बहुत रास सम्बन्धित प्रश्न सभक जबाब कमल मोहन चुन्नू व प्रकाश झा कुशलतापूर्वक दैत एहि सत्र केर महत्व केँ स्थापित कय देलन्हि।

आखिरी दिवसक आगाँक सत्र मे लोकगायक गिरीश चन्द्र मिश्र केर आवाज आ कमल मोहन चुन्नू केर संचालन मे मिथिलाक लोकगायकीक बहुत रास मिठगर प्रस्तुति सब श्रोता लोकनि केँ दिल्ली सँ खींचिकय सीधे मिथिलाक अपन गाम पहुँचा देने छलन्हि। सुन्दर प्रस्तुति आ ततबे सहज संचालनक बीच ईहो सत्र मैथिली लिटरेचर फेस्टिवल केर अनुपम परिचिति करौलक। एहि बीच अनेकों प्रमुख व्यक्तित्व लोकनिक उपस्थिति भऽ चुकल छल तथा समापन सत्रक तैयारी आरम्भ भऽ गेल रहय। अन्तिम प्रस्तुति मैथिली रैम्प छल जाहि मे सीताराम, सल्हेश, बटगबनी, लगनी, आदि मिथिला संस्कृति केँ झलकाबैत मैलोरंग केर निर्देशन आ प्रस्तुति मे फैशन शो प्रस्तुत कयल गेल।

समापन सत्र मे समय समन्वयक श्याम दरिहरे द्वारा अत्यन्त सारगर्भित शब्द मे आयोजक, सहयोगी, सब केँ धन्यवाद दैत पुनः अजित आजाद केर संचालन मे वक्ता प्रवीण नारायण चौधरी, देवेन्द्र कुमार देवेश, कथाकार अशोक, कैलाश कुमार मिश्र, धनाकर ठाकुर, दिलीप पाण्डेय, के श्रीनिवास राव द्वारा आयोजनक सम्बन्ध मे भाव-उद्गार प्रकट कयल गेल। एहि समापन सत्र मे पन्ना झा केर संपादन एवं संजीव सिन्हाक सह-संपादन मे प्रकाशित मैथिली लिटरेचर फेस्टिवल केर स्मारिकाक विमोचन सेहो भेल छल। अन्त मे संयोजक एवं मैथिली लेखक संघ केर महासचिव विनोद कुमार झा द्वारा धन्यवाद ज्ञापन करैत एहि आयोजन मे तिल सँ ताड़ धरिक सहयोगी लोकनि केँ धन्यवाद देल गेल छल। तहिना अन्त कमल मोहन चुन्नू द्वारा समदाउन गाबिकय कयल गेल। विदित हो जे समापन सत्र मे काँग्रेसक पूर्व सांसद महाबल मिश्रा सहित आरो महत्वपूर्ण व्यक्तित्व लोकनिक उपस्थिति अलग-अलग समय पर होइत रहल छल। कार्यक्रमक पूरा अवधि धरि सह-आयोजक एवं वित्तीय सहयोग उपलब्ध करेनिहार संस्था मैथिली भोजपुरी अकादमीक उपाध्यक्ष एवं मैथिलीक जानल-मानल अभियन्ता नीरज पाठकक उपस्थिति काफी उत्साहवर्धक रहल। ओ अपन घोषणा मे आगामी समय कोलकाता, मुम्बई, वाराणसी आ मधुबनी मे मैथिली लेखक संघ संग सहकार्य करैत एहि आयोजन केँ पुनरावृत्ति करबाक बात कहलनि।