विधक विधान तक बदैल देबाक सामर्थ्य होएत छैक ‘अतिथि सत्कार’ सँ अर्जित पुरुषार्थ मे
आध्यात्मिक कथा – प्रवीण नारायण चौधरी लिखल नहियो रहैत छैक तैयो भेटैत छैक….. जी! एक बेर नारदजी पृथ्वीलोक भ्रमण करय लेल एलाह। भैर दिन घुमघाम केलाक बाद, कहू न, अपनहि मिथिलाक एकटा सुन्दर गाम पहुँचि गेलाह। इच्छा भेलन्हि जे भगवान् राम कहियो मिथिलाक पहुनाई केर चर्चा करथि से कनेक अपनो एक दिन पहुनाइ कइये … विधक विधान तक बदैल देबाक सामर्थ्य होएत छैक ‘अतिथि सत्कार’ सँ अर्जित पुरुषार्थ मे









