मिथिला मे खराब पक्ष कि-कि अछि? – सवालक उत्तर मे एक कवित
कविता – प्रवीण नारायण चौधरी मिथिलाक हाल बदहाल जतय लोक केँ अपन भाषा, भेष आ भूषण सँ स्वयं लज्जा बोध होइत अछि जतय दूरक ढोल सोहाओन आ बारीक पटुआ तीत होइत अछि जतय सब जाति आ समुदाय में अंतर्विरोध आ अन्तर्विभाजन चरम पर अछि जतय जनकक समाजवाद आ सामाजिक न्याय कम बाहरी शासक केर फूट … मिथिला मे खराब पक्ष कि-कि अछि? – सवालक उत्तर मे एक कवित









