आजुक दुइ विशेष चिन्तन – अहाँ सेहो अपन महत्वपूर्ण राय जरूर दी कमेन्ट मे

आजुक चिन्तन
 
मिथिलाक लोक कतबो घटल मे कियैक नहि रहय, लेकिन ओकर जीवनशैली एहेन सुन्दर छैक जे सब कियो स्वाभिमानी आ आत्मविवेकी जरूर भेटैत अछि। जेना-जेना लोकक भौतिक आवश्यकता बढैत चलि जा रहल छैक, तहिना-तहिना मिथिला हेराइत चलि जा रहल अछि। आइयो जे कियो विदेहक देखायल बाट पर चलब पसिन करैत अछि, ओकरा मिथिला जीबित रखबाक वा देखबाक बेगरता बुझाइत छैक। नहि जानि आगाँ ई आर कतेक जियत, कारण एतय जाहि द्रुत गति सँ राजनीति हावी भेल आ समाज जाति-पाति मे बँटैत जा रहल य, ताहि सँ जनकक समाजवाद आ श्रम-आधारित जातीय वर्गीकरण वास्ते रोजी-रोटीक व्यवस्था लेल बनाओल गेल अन्तर्घुलन आइ छहोंछित भेल देखाइत अछि। यैह अव्यवस्था अराजक छैक जाहि सँ एहि सुन्दर आ समृद्ध सभ्यताक जीर्ण स्वरूप हम सब देखि रहल छी। पता नहि एकरा विकसित मानव सभ्यताक मापदंड पर तौलिकय हमरा लोकनि आगाँ बढि रहल छी से मानी या फेर ओ पौराणिक समृद्धि आ विदेहपंथ सँ दूर होयबाक बात केँ अभगदशा मानी! सवाल सदैव दिमाग मे दौड़ि रहल अछि।
कतय भेटत मुसकान एहेन आ कतय भेटत ई प्रेमक धार
जतय भुजा सऽ छुधा मेटैय जन-जन लेल भेटय रोजगार
कियो लाय-मुरही बेचय छै कियो चलाबय मिल-कनसार
सभक पेट भरय मेहनति सऽ पूछय नहि कोढिया नरनार
ओ नहि आन कोनो संसारा वैह कहबै छैय मिथिला यार!

जय मैथिली! जय मिथिला!!

फोटो (साभार अजित मिश्रा) में सभक मधुर मुस्कान देखि रहल नहि गेल, एकदम परमानन्दक प्राप्ति भेल। बुढ, बच्चा, जवान, औरत, पुरुष, अन्जान, गामक बथान, दूरमें बस्ती, पगडंडी, टाट-फरक, खेत, खलिहान… आह!! कतेक सुन्दर मिथिला!!

बार-बार तुमको प्रणाम मिथिला!!

आजुक दोसर चिन्तनः
 
दहेज मुक्त मिथिला लेल पैतृक सम्पत्ति मे बेटीक हिस्सा दियौक कहब व्यवहार मे कतेक मोस्किल काज छैक ताहि पर मंथन!
 
ई सूत्र सफल नहि भेलैक समाज मे। एकर बहुत रास व्यवहारिक पक्ष एहेन छैक जे माता-पिताक सम्पत्ति मे बेटीक अधिकार कानूनी रूप सँ रहितो ओ जमीनक विवाद केर कारण व्यवहार मे नहि उतारल जा सकलैक। एखन पितृसत्तात्मक समाज मे पुरुषहि टा केँ पैतृक सम्पत्ति मे अधिकार सँ आगू जखन बेटी आ ओकर सासूर वर्ग द्वारा अपन फाँट-बखरा हासिल करबाक परम्परा आरम्भ भऽ जाय तऽ हरेक घर मे ता-उम्र जमीनी विवादक घोल-फचक्का बनल रहत, लोक ओहि मे लागल रहि जायत, कारण जमीनक झगड़ा एक गाम मे मात्र नहि, अनेक गाम मे पसैर जेतैक आ खून-खराबा केर मात्रा सेहो बढि जेतैक।
 
एकटा उदाहरण लेल जाउः
 
दिनेश चौधरी केर ३ बालक २ कन्या। जेठक विवाह दरभंगाक हरिहरपुर, माझिलक विवाह समस्तीपुरक सिंघिया, तेसर केर विवाह नेपालक सप्तरी जिलाक तिलाठी, १ बेटीक विवाह महोत्तरी जिलाक बथनाहा आ दोसर बेटीक विवाह सहरसा जिलाक महिषी। दिनेश बाबू केँ ३ बालक सँ ३ पुतोहुक हिस्सा ३ अलग गाम मे जाय केँ हासिल करबाक छन्हि। २ बेटीक सासूर वला हुनका सँ जमीनक हिस्सा-बखरा प्राप्त करता। आब हिस्सा-बखरा मे दियादी झंझटि आ केस-मोकदमाक हालत सेहो कतहु-कतहु अभरतैन। हुनका अपनो भैयारी मे जे बँटवारा भेल छन्हि ताहि मे गोइरा आ चउरी बाधक जमीन मे एखन धरि विवाद छन्हिये। आब दिनेश बाबू जँ अपन विवाद केँ कोहुना सलटैयो लेथिन तखन अपन बेटा आ बेटी बीच जमीनक बँटवारा आ लेन-देन कोना फरिछेथिन से कनेक विचार करू। एम्हर जीवन चलैत छैक गार्हस्थ धर्म केँ निभेने। जमीनक विवाद कतेक दूर धरि चलि गेलनि दिनेश बाबूक घर मे से स्वतः सोचय योग्य विषय छैक।
 
आब अहाँ बुझि गेल हेबैक जे खाली पोन पर तबला बजाकय दहेज मुक्ति लेल ई सूत्र बाजि टा देला सँ काज बनलैक आ कि बिगड़लैक।
 
हरिः हरः!!