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प्रवीण नारायण चौधरी

१७म अन्तर्राष्ट्रीय मैथिली सम्मेलन लेल आम बैसार काल्हि

सूचना प्रातःकाल केर प्रणाम विराटनगर एवं आसपासक मैथिलीभाषाभाषी व सहयोगी-शुभेच्छु लोकनि केँ!   काल्हि शनि दिन मिति सावन १८ गते – ३ अगस्त २०१९ केँ बखरी स्थित मैथिली स्टडी प्वाइन्ट मे १७म अन्तर्राष्ट्रीय मैथिली सम्मेलन सम्बन्ध मे महत्वपूर्ण बैसार १ बजे होमय जा रहल अछि, कृपया अपने लोकनि अधिक सँ अधिक संख्या मे उपस्थित भऽ १७म अन्तर्राष्ट्रीय मैथिली सम्मेलन लेल आम बैसार काल्हि

प्रत्येक नारीक जीवन मे तीन चरण – जे बुझत से जियत जीवन

लेख-विचार – ममता झा “नारी अहाँक रूप अनेक” – हम पुछलहुँ लोक सब सँ जे नारीक कतेक रूप अइ… कियो माँ कहलक, कियो बहिन कहलक, कियो हमसफर, कियो ममता के मूरत त कियो दोस्त त कियो सच के सुरत कहलक। सब अपना-अपना हिसाब सँ वर्णन केलक। नारीक जन्म आ जीवनक पड़ाव तीन बेर अबैत अइ। प्रत्येक नारीक जीवन मे तीन चरण – जे बुझत से जियत जीवन

एतेक मे वर कि बरदो नहि भेटत आइ

लघुकथा – रूबी झा दहेज के मूल अर्थ बिसैर हम मिथिलावासी बेटा केँ बरद-महिस जेकाँ अपन दाम लगबैत छी। बेटा केँ बाप बेचैय छथि आ बेटी केँ बाप खरीदैत छथि। ई घृणीत कार्य सब सँ बेसी हमर सबहक ब्राह्मण समाज में होइत अछि। वर केँ दहेज जतेक देल गेल ओहि हिसाबे कनियाँ केँ नुवा, गहना, एतेक मे वर कि बरदो नहि भेटत आइ

श्रीहित ध्रुवदासजी – भगवान् केर एक अनुपम भक्त केर कथा

स्वाध्याय लेखः श्रीहित ध्रुवदासजी – संकलनः कल्याण, अनुवादः प्रवीण नारायण चौधरी श्रीध्रुवदासजीक घरक कि नाम रहनि, किछु पता नहि। हिनकर पूर्व-संस्कार हिनका मे मात्र ५ वर्षक अवस्था मे उत्कट वैराग्य आर प्रभु-प्रेमक लगन उत्पन्न कय देने रहय। बालकभक्त ध्रुव सेहो ५ वर्ष मे अपना मे एहेन लगन पेने रहथि। एहि साम्य केर कारण हिनका लोक श्रीहित ध्रुवदासजी – भगवान् केर एक अनुपम भक्त केर कथा

मुजफ्फरपुरक बरुराज मे काँवरिया पर पथराव सँ स्थिति तनावग्रस्त

३१ जुलाई २०१९. मैथिली जिन्दाबाद!! मुजफ्फरपुर केर बरुराज मे महादेव केर पूजा-अर्चना लेल जा रहल महिला कांवरिया पर समुदाय विशेष द्वारा पथराव आर तदोपरान्त आपसी तनावक स्थितिक समाचार अछि। ५००+ महिला एवं लड़की काँवड़िया पर मस्जिद केर पास सँ पथराव, बचाव मे आयल पुलिस केँ दौड़ायल गेल   “काँवड़िया पर पथराव करैत राष्ट्र विरोधी नारा मुजफ्फरपुरक बरुराज मे काँवरिया पर पथराव सँ स्थिति तनावग्रस्त

कियैक कयल जाइछ सोम प्रदोष व्रत – एक विशेष माहात्म्य

स्वाध्याय लेख – सावन विशेष साभार – वेबदुनिया सोम प्रदोष व्रत केर पौराणिक व्रतकथा केर अनुसार एक नगर मे एक ब्राह्मणी रहैत छलीह। हुनक पति केर स्वर्गवास भऽ गेल छलन्हि। हुनकर आब कियो आश्रयदाता नहि रहलन्हि ताहि सँ भोर होइत देरी ओ अपन पुत्र संग भीख मांगय निकलि पड़ैत छलीह। भिक्षाटन सँ मात्र ओ स्वयं आर कियैक कयल जाइछ सोम प्रदोष व्रत – एक विशेष माहात्म्य

अटल मिथिला सम्मान समारोह दिल्ली मे १७ अगस्त केँ होयत: उपराष्ट्रपति सेहो संभावित अतिथि

३१ जुलाई २०१९. मैथिली जिन्दाबाद!! मैथिली भाषा केँ संवैधानिक मान्यता दियौनिहार प्रखर भारतीय नेता, पूर्व प्रधानमंत्री एवं भारत रत्न अटल विहारी बाजपेयी जी केर नाम पर एहि भाषा केँ आगाँ बढेनिहार विभिन्न व्यक्तित्वक संग आनहु भाषा-संस्कृति केर ओहेन महत्वपूर्ण व्यक्ति जे मैथिली-मिथिला प्रति सद्भावना रखैत छथि तिनका सभ केँ ‘अटल मिथिला सम्मान’ देल जेबाक लेल अटल मिथिला सम्मान समारोह दिल्ली मे १७ अगस्त केँ होयत: उपराष्ट्रपति सेहो संभावित अतिथि

जनकपुर मे मधुश्रावणी पूजनिहारि नव-विवाहिताक सम्मान लेल समारोह

ऋषिकेश झा, ३० जुलाई २०१९. मैथिली जिन्दाबाद!! मैथिल ब्राह्मण महासभा नेपाल द्वारा जनकपुरक जानकी मन्दिर प्रांगण मे मधुश्रावणी उत्सव पर नवविवाहिता पबनैतिन लोकनि केर सम्मान आ शुभकामना आदान-प्रदान कार्यक्रमक आयोजन कयल गेल अछि। जानकी मन्दिर प्रांगण मे काल्हि श्रावण मासक सोमवारी प्रदोष व्रतक दिवस पर आयोजित मधुश्रावणी पाबनि पूजनिहाइर लोकनिक अपार भीड़ लागल। मिथिला मे जनकपुर मे मधुश्रावणी पूजनिहारि नव-विवाहिताक सम्मान लेल समारोह

सावन महीना मे कि खाय आ कि नहि खाय – कियैक नहि खाय

सावन विशेष आलेख सावन मास मे कि खाय, कि नहि खाय – साभारः वेब दुनिया, अनुवादः प्रवीण नारायण चौधरी   श्रावण मास मे किछु खास चीज बिल्कुल नहि खायल जाइत अछि। एहि बरसैत-गरजैत मौसम मे किछु फल सब्जी केँ नहि खेबाक चाही। कियैक तँ एहि सब्जी सभ मे एहि समय विषैलापन बढ़ि जाइत छैक जे सावन महीना मे कि खाय आ कि नहि खाय – कियैक नहि खाय

युवा रचनाकार बीरेन्द्र कुमार सिंह केर मैथिली रचना

साहित्य युवा कवि-लेखक बीरेन्द्र कुमार सिंह केर साहित्य रचना १. कविता – “सहोदर सँ लगियौ छाती” प’ह फटलै कोइली कुहकलै सिहरि उठलै छाती मीठे-मीठे कूक सुनादे बगड़िया गबैत चल सुन्दर पाँती कोसी कमला झिर-झिर बहैय’ एहि मिथिला-मधेशक माटी खा ले हमर किरिया सप्पत हम सभ नाती-परनाती जागू यौ कक्का डेग उठबियौ “सहोदर सँ लगियौ छाती” युवा रचनाकार बीरेन्द्र कुमार सिंह केर मैथिली रचना