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प्रवीण नारायण चौधरी

रामचरितमानस मोतीः तारा केँ श्री रामजी द्वारा उपदेश आर सुग्रीव केर राज्याभिषेक तथा अंगद केँ युवराज पद

स्वाध्याय – प्रवीण नारायण चौधरी रामचरितमानस मोती तारा केँ श्री रामजी द्वारा उपदेश आर सुग्रीव केर राज्याभिषेक तथा अंगद केँ युवराज पद १. बालि केँ अपन लोक पठेबाक गति देलाक बाद श्री रामचन्द्रजी बालिपत्नी तारा केँ व्याकुल देखि हुनका ज्ञान देलनि आर हुनकर माया (अज्ञान) हरि लेलनि। ओ कहलखिन – “पृथ्वी, जल, अग्नि, आकाश आ रामचरितमानस मोतीः तारा केँ श्री रामजी द्वारा उपदेश आर सुग्रीव केर राज्याभिषेक तथा अंगद केँ युवराज पद

जेहेन खायब अन्न तेहेन होयत मनः संस्कृति पर भोजनक प्रभाव

विचार – संजय कुमार झा संस्कृति पर भोजनक प्रभाव मिथिला संस्कार आ संस्कृति लेल विश्वव्यापी आ सुप्रसिद्ध अछि। मिथिलाक भोजनक सहचार आर पहुनाय सेहो कम लोकप्रिय नहि छैक। मुदा आजुक सांस्कृतिक अपक्षरण भोजनक व्यवस्था केँ कोना प्रभावित कय रहल अछि? एहि पर एकटा विमर्श के जरूरत बुझि ई लेख राखि रहल छी। वर्तमान समाज मे जेहेन खायब अन्न तेहेन होयत मनः संस्कृति पर भोजनक प्रभाव

रामचरितमानस मोतीः बालि-सुग्रीव युद्ध, बालि केर बध आ तारा विलाप

स्वाध्याय – प्रवीण नारायण चौधरी रामचरितमानस मोती बालि-सुग्रीव युद्ध, बालि केर बध आ तारा विलाप १. सुग्रीवक ललकार सुनि आ ताराक बुझेबाक स्थिति देखि बालि बजलाह – अरे भीरु! (डरपोक) प्रिये! सुनू! श्री रघुनाथजी समदर्शी छथि। जँ कदाचित्‌ ओ हमरा मारिये देता तँ हम सनाथ भ’ जायब, परमपद केँ पाबि जायब। एतेक कहिकय ओ महान्‌ रामचरितमानस मोतीः बालि-सुग्रीव युद्ध, बालि केर बध आ तारा विलाप

बिहार मे उद्योग – इतिहास सँ वर्तमान धरिक सामान्य ज्ञान

लेखः साभार डीएस गुरु Bihar has agro-based industries like Sugar Industries, Jute Industries, Silk Industries, etc, Forest-based Industries like Paper and Pulp Industries, Timber Industry, etc, Mineral-based Industries like Cement Industry, Crusher Industry, Oil Refining Industry, Glass Industry and many other industries. There are some important support organisation like Udyog Mitra, District Industries Centre and बिहार मे उद्योग – इतिहास सँ वर्तमान धरिक सामान्य ज्ञान

रामचरितमानस मोतीः सुग्रीवक वैराग्य

स्वाध्याय – प्रवीण नारायण चौधरी रामचरितमानस मोती सुग्रीवक वैराग्य १. सुग्रीव श्री रामजी सँ कहलखिन – हे रघुवीर! सुनू! बालि महान्‌ बलवान्‌ आर अत्यन्त रणधीर अछि। से कहि सुग्रीव श्री रामजी केँ दुंदुभि राक्षस केर हड्डी आ ताल केर वृक्ष देखेलखिन। श्री रघुनाथजी ओहि सब केँ बिना कोनो परिश्रमहि कएने आसानीपूर्वक ढाहि देलखिन्ह। ई देखि रामचरितमानस मोतीः सुग्रीवक वैराग्य

औनलाइन योग शिविर – दहेज मुक्त मिथिला समूह तरफ सँ योगगुरु काजल चौधरीक योगदान

करू योग – रहू निरोग (सन्ध्या ६ः३० बजे सँ ७ः३० बजेक बैच मे ज्वाइन करू, कमेन्ट मे अपन नाम लिखाउ) दहेज मुक्त मिथिला समूह पर अपने समस्त सदस्य लोकनि लेल एक बेर फेर योगगुरु काजल चौधरीजी अपन अमूल्य योगदान लेल तैयार छथि। अपने सब २५ आदमी प्लस जँ भ’ जायब त आदरणीया काजलजी सन्ध्याकालीन ६ः३० औनलाइन योग शिविर – दहेज मुक्त मिथिला समूह तरफ सँ योगगुरु काजल चौधरीक योगदान

मनुष्य केँ दोसरक मन पर पकड़ नहि रहैछ

ताहि दिनक बात आइयो टटके अछि   आइ अचानक भेटल २००७ अक्टूबर अंक के ‘विजडम’ – हमर युवाकाल सँ हाल तक केर अति प्रिय मैगजीन (अन्तर्राष्ट्रीय अंग्रेजी पत्रिका)। करीब १६ साल बाद जखन पन्ना उल्टेलहुँ त पुनः प्रस्तुत भ’ आयल एक अति सुन्दर सन्देशमूलक लेख – जेम्स एलन के। हम चाहब जे ई मैथिली व मनुष्य केँ दोसरक मन पर पकड़ नहि रहैछ

मनुष्यक उमेर केर खिस्सा

खिस्सा – प्रवीण नारायण चौधरी ओ कथा जे सुनने रही   एकटा खिस्सा मे कहल गेल छैक जे मनुष्यक उमेर भगवान् मात्र २० वर्ष देलखिन। गदहा केँ ५० वर्ष। बानर केँ ३० वर्ष। कुकूर केँ सेहो २० वर्ष। भगवान् सभक जीवन मे केहेन भोग भेटतैक सेहो वर्णन कय देलखिन। मनुष्य केँ कहलखिन जे तोरा सब मनुष्यक उमेर केर खिस्सा

रामचरितमानस मोतीः सुग्रीव केर दुःख सुनायब, बालि बध केर प्रतिज्ञा, श्री रामजीक मित्र लक्षण वर्णन

स्वाध्याय – प्रवीण नारायण चौधरी रामचरितमानस मोती सुग्रीव केर दुःख सुनायब, बालि बध केर प्रतिज्ञा, श्री रामजीक मित्र लक्षण वर्णन १. हनुमान्‌जी दुनू दिशक सबटा कथा सुना अग्नि केँ साक्षी राखि आपस मे दृढ़ताक संग प्रीति जोड़ि देलनि। यानि अग्नि केँ साक्षी राखि प्रतिज्ञापूर्वक हुनका लोकनिक मैत्री करबा देलनि। दुनू हृदय सँ प्रीति कयलनि, कनिकबो रामचरितमानस मोतीः सुग्रीव केर दुःख सुनायब, बालि बध केर प्रतिज्ञा, श्री रामजीक मित्र लक्षण वर्णन

सन्तान आ जनक – एक छोट परञ्च महत्वपूर्ण दर्शन

सन्तान आ जनक   जखन-जखन चिन्तन करब आ स्वयं पर केन्द्रित होयब त पता लागत जे हम-अहाँ वास्तव मे के छी। के छी हम-अहाँ? हम प्रवीण, हम वन्दना, हम पंकज, हम कल्पना, हम रूबी त हम रंजना… ई ‘हम आ विभिन्न नाम’ यथार्थतः एहि सुन्दर संसारक सुन्दर सन्तान सब छी। सन्तान जँ अपन कर्तव्य बुझि सन्तान आ जनक – एक छोट परञ्च महत्वपूर्ण दर्शन