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प्रवीण नारायण चौधरी

सिंगल मदर के आन्तरिक पीड़ा आ संघर्षक आत्मकथा

लेख – संगीता मिश्र सिंगल मदर के आन्तरिक पीड़ा आ संघर्षक कथा आजुक स्थिति-परिस्थिति मे गामक शिक्षा व्यवस्था पर बड़ा भारी सवाल ठाढ़ भेल छैक । एहेन नहि छैक जे गाम-घर मे पढाई करबाक माहौल नहि छैक, लेकिन शहरी परिवेश संग शहरी विद्यालयक एडवान्स्ड शिक्षा प्राप्त कयल लोक लेल करियर बनबय सँ लयकय शहरहि मे सिंगल मदर के आन्तरिक पीड़ा आ संघर्षक आत्मकथा

हम आबि रहल छी – मैथिली धारावाहिक भाग १३ आ १४

मैथिली धारावाहिक – हम आबि रहल छी – रबीन्द्र नारायण मिश्र हम आबि रहल छी भाग- तेरह/चौदह 13 गंगा आ दीपेंदु चलि जाइत छथि । हम दलानपर ओछाओल पटिआपर ओहिना बैसल रहि जाइत छी । हमर हाथमे दीपेंदुक देल लिफाफा अखनो ओहिना अछि । लिफाफा नीकसँ साटि देल गेल अछि । ओहिमे बेस मोट किछु हम आबि रहल छी – मैथिली धारावाहिक भाग १३ आ १४

रामचरितमानस मोतीः श्रीराम-सुग्रीव संवाद आ सीताजी केँ तकबाक लेल बन्दर सभक प्रस्थान

स्वाध्याय – प्रवीण नारायण चौधरी रामचरितमानस मोती श्रीराम-सुग्रीव संवाद आ सीताजी केँ तकबाक लेल बन्दर सभक प्रस्थान १. लक्ष्मणजी द्वारा सुग्रीव, अंगद, तारा ओ हनुमान संग भेंट कय श्री रामजीक काज करबाक खोज-खबरि लेला उपरान्त अंगद आदि बानर सब केँ संग लयकय श्री रामजीक छोट भाइ लक्ष्मणजी केँ आगू करैत हुनकर पाछू-पाछू सुग्रीव हर्षित होइत रामचरितमानस मोतीः श्रीराम-सुग्रीव संवाद आ सीताजी केँ तकबाक लेल बन्दर सभक प्रस्थान

रामचरितमानस मोतीः श्री रामजीक सुग्रीव सँ तमसायब, श्री लक्ष्मणजीक कोप

स्वाध्याय – प्रवीण नारायण चौधरी रामचरितमानस मोती श्री राम केर सुग्रीव पर तमसायब आ लक्ष्मणजी द्वारा कोप १. वर्षा बिति गेल, निर्मल शरद्ऋतु आबि गेल, लेकिन हे तात! सीताक कोनो खबरि एखन धरि नहि भेटल। एक बेर कोहुना खबरि टा भेटि जाय त फेर कालहु केँ जीतिकय पलहि भरि मे जानकी केँ लय आनी! कतहु रामचरितमानस मोतीः श्री रामजीक सुग्रीव सँ तमसायब, श्री लक्ष्मणजीक कोप

नेपालक नव जनगणनाक तथ्यांक भेल सार्वजनिक, मैथिली कायम अछि दोसर स्थान पर

मैथिली जिन्दाबाद!! नेपालक जनगणनाक तथ्यांक मुताबिक देश मे बाजल जायवला मातृभाषा (कुल १२४) मध्य मैथिली ‘दोसर’ स्थान पर फेरो आबि गेल अछि। बड़ा भारी भ्रम पसारल गेल छल, कतेक लोक त अपन नेतागिरी चमकेबाक लेल आ वोट बैंक बनेबाक लेल मैथिली भाषा केँ तोड़िकय ओहि मे सँ अनेकों भाषा सभक अलगे कित्ता ठाढ़ करबाक अभियाने नेपालक नव जनगणनाक तथ्यांक भेल सार्वजनिक, मैथिली कायम अछि दोसर स्थान पर

गृहस्थीक अवलम्बा स्त्री शक्तिः दुराचारिणी सँ सावधान

लेख – संगीता मिश्र गृहस्थीक अवलम्बा स्त्री शक्तिः दुराचारिणी सँ सावधान ‘पति-पत्नी आ ओ’ ‍– फिल्मक लोकप्रियता संग मिथिला समाज मे सेहो ई ‘ओ’ प्रकरण आ ‘प्रेम प्रकरण’ कतेको रास परिवार केँ ध्वस्त कय देलक। ई ‘ओ’ के कारण बहुतो गृहस्थी खराब हेबाक बात सर्वविदिते अछि। ‘ओ’ के कारण पति-पत्नी बीच दरार अबैत अछि आ गृहस्थीक अवलम्बा स्त्री शक्तिः दुराचारिणी सँ सावधान

रामचरितमानस मोतीः शरद ऋतुक वर्णन

स्वाध्याय – प्रवीण नारायण चौधरी रामचरितमानस मोती शरद ऋतुक वर्णन (पूर्व अध्याय मे वर्षा ऋतुक वर्णन भगवान् राम केर श्रीमुख सँ भेल आ तकर बाद…..) १. हे लक्ष्मण! देखू, वर्षा बिति गेल आ परम सुन्दर शरद् ऋतु आबि गेल। फुलायल कास सँ सम्पूर्ण पृथ्वी आच्छादित भेल बुझाइत अछि, मानू वर्षा ऋतु कासरूपी उज्जर केस रूप रामचरितमानस मोतीः शरद ऋतुक वर्णन

महिला मे आत्मनिर्भरता कतेक जरूरी – पुरुषक गैरजिम्मेवारी आ परिवारक उपेक्षाक स्थिति मे

लेख – संगीता मिश्र महिला आत्मनिर्भरता आइ अपन मिथिला समाज मे पुरुष पर आर्थिक उपार्जनक एकल भार (जिम्मेदारी) रहबाक कारण समाज मे असन्तुलन स्पष्ट अछि। एकर कतेको प्रकार के दुष्परिणाम सब सेहो सोझाँ अभैर रहल अछि। मिथिला मे, खास कय केँ कथित बड़का जाति के लोक महिला केँ बाहरी संसार मे अन्य क्षेत्रक महिला सँ महिला मे आत्मनिर्भरता कतेक जरूरी – पुरुषक गैरजिम्मेवारी आ परिवारक उपेक्षाक स्थिति मे

रामचरितमानस मोतीः वर्षा ऋतु वर्णन

स्वाध्याय – प्रवीण नारायण चौधरी रामचरितमानस मोती वर्षा ऋतु वर्णन १. देवता लोकनि पहिनहि सँ ओहि पहाड़ पर एक गोट गुफा केँ खूब बढियाँ सँ बना (सजा) रखने छलथि, ई सोचिकय जे कृपाक खान श्री रामजी अओता आ किछु दिन एतय रहता। सुन्दर वन फूलायल बहुत सुशोभित अछि। मधुक लोभ सँ भँवराक समूह गुंजार कय रामचरितमानस मोतीः वर्षा ऋतु वर्णन

मिथिला मे बिहारी राजनीति आ मिथिला राज्य

बात जानू स्पष्ट!! ब्राह्मण समुदाय कि अगड़ा-पिछड़ा कियो लोक सब जे मिथिला-मैथिली करैत छथि से या त अपन स्वार्थ सिद्धि लेल या फेर अपन जीवनक सुन्दर अभीष्ट के रूप मे, समर्पण भाव सँ करैत छथि। बाकी लोक व समुदाय सब जे नहि करैत छथि से राज्य कथी होइत छैक ततेक ज्ञाने नहि हासिल कय सकल मिथिला मे बिहारी राजनीति आ मिथिला राज्य