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प्रवीण नारायण चौधरी

रामचरितमानस मोतीः लंका वर्णन, लंकिनी वध, लंका मे प्रवेश

स्वाध्याय – प्रवीण नारायण चौधरी रामचरितमानस मोती लंका वर्णन, लंकिनी वध, लंका मे प्रवेश १. अनेकों प्रकारक वृक्ष फल-फूल सँ शोभित अछि। पक्षी आर पशु सभक समूह देखि मनहि-मन बड प्रसन्नता भेलनि। सोझेँ एक गोट विशाल पर्वत देखिकय हनुमान्‌जी भय त्यागि कय ओहि पर दौड़िकय जा चढ़लथि। शिवजी कहैत छथि – हे उमा! एहि मे रामचरितमानस मोतीः लंका वर्णन, लंकिनी वध, लंका मे प्रवेश

दशकों सँ लाखों युवा केँ अनागरिक बनेबाक खतरनाक राजनीति आ दुष्परिणाम

नेपाल मे अनागरिक के पीड़ा विगत १६ वर्ष सँ नेपाल मे नागरिकता के नाम पर अनेकन राजनीति सँ लाखों नागरिक पीड़ित अछि । कहियो जन्मसिद्ध नागरिकता के वितरण मे विवाद सँ, कहियो जन्मसिद्ध आ एकल महिलाक सन्तान केँ नागरिकता के किसिम सँ, कहियो वैवाहिक अंगीकृत नागरिक केँ कतेक दिन धरि बसोवास कयला उपरान्त नागरिकता देल दशकों सँ लाखों युवा केँ अनागरिक बनेबाक खतरनाक राजनीति आ दुष्परिणाम

दाम्पत्य जीवनक जहरः विवाहेतर सम्बन्ध (स्त्री दृष्टिकोण)

लेख – संगीता मिश्र विवाहेतर सम्बन्ध – दाम्पत्य जीवन लेल जहर (स्त्री दृष्टिकोण) विवाह ओ थिक जे स्त्री-पुरुष दुनू केँ बंधन मे बान्हि एकजुट करैत अछि । एहि बंधन केँ “विवाह” कहल जाइत छैक आ एकर बादक जीवन केँ वैवाहिक जीवन कहल जाइत छैक । दंपति माने स्त्री-पुरुषक जोड़ी, जे धार्मिक, पारिवारिक, सामाजिक, नैतिक, कानूनी दाम्पत्य जीवनक जहरः विवाहेतर सम्बन्ध (स्त्री दृष्टिकोण)

रामचरितमानस मोतीः सुन्दरकाण्ड मंगलाचरण आ हनुमान्‌जीक समुद्र पार जायब

स्वाध्याय – प्रवीण नारायण चौधरी रामचरितमानस मोती सुन्दरकाण्ड आरम्भ – पंचम सोपान-मंगलाचरण श्लोक : शान्तं शाश्वतमप्रमेयमनघं निर्वाणशान्तिप्रदं ब्रह्माशम्भुफणीन्द्रसेव्यमनिशं वेदान्तवेद्यं विभुम्‌। रामाख्यं जगदीश्वरं सुरगुरुं मायामनुष्यं हरिं वन्देऽहं करुणाकरं रघुवरं भूपालचूडामणिम्‌॥१॥ शान्त, सनातन, अप्रमेय (प्रमाण सब सँ परे), निष्पाप, मोक्षरूप परमशान्ति देनिहार, ब्रह्मा, शम्भु आर शेषजी सँ निरन्तर सेवित, वेदान्त द्वारा जानय योग्य, सर्वव्यापक, देवता लोकनि मे सबसँ रामचरितमानस मोतीः सुन्दरकाण्ड मंगलाचरण आ हनुमान्‌जीक समुद्र पार जायब

पति-पत्नीक सम्बन्धविक्षेद मे दोसर स्त्री (ओ) के भूमिका

लेख – अखिलेश कुमार मिश्र पति-पत्नीक सम्बन्धविक्षेद मे दोसर स्त्री (ओ) के भूमिका हम अपन मंच “दहेजमुक्त मिथिला” पर श्रीमती संगीता मिश्रा जीक लिखल दू तीन टा लेख पढ़लहुँ अछि जाहि मे “महिले महिलाक दुश्मन”, “सिंगल मदर के आंतरिक पीड़ा आ संघर्षक कथा” आ “गृहस्थीक अवलंबा स्त्री शक्ति: दुराचारिणी सं सावधान” आदि अछि। संगीता जी पति-पत्नीक सम्बन्धविक्षेद मे दोसर स्त्री (ओ) के भूमिका

रामचरितमानस मोतीः समुद्र लँघबाक परामर्श, जाम्बवन्त केर हनुमान्‌जी केँ बल याद दियाकय उत्साहित करब, श्री राम-गुण केर माहात्म्य

स्वाध्याय – प्रवीण नारायण चौधरी रामचरितमानस मोती समुद्र लँघबाक परामर्श, जाम्बवन्त केर हनुमान्‌जी केँ बल याद दियाकय उत्साहित करब, श्री राम-गुण केर माहात्म्य १. सम्पाती सँ समुद्र कछेर पर भेटि रहल बानर सब केँ ओ बतेलनि – “हम हुनका (सीताकेँ) देखि रहल छी, अहाँ सब नहि देखि सकैत छी, कियैक त गिधक दृष्टि अपार (बड रामचरितमानस मोतीः समुद्र लँघबाक परामर्श, जाम्बवन्त केर हनुमान्‌जी केँ बल याद दियाकय उत्साहित करब, श्री राम-गुण केर माहात्म्य

स्त्री विमर्शः महिले महिलाक दुश्मन

लेख – संगीता मिश्र स्त्री विमर्शः महिले महिलाक दुश्मन (महिला सच मे दोसर महिलाक दोस्त होइत छथि आ कि दुश्मन? हमर कटु अनुभव) आइ जतेक टूटल-बिखड़ल परिवार देखाइत अछि तेकर जड़ि मे महिलाक भूमिका रहिते टा छैक। आ सब सँ दुखद बात ई जे बेसी केस मे कोनो महिले दोसर महिलाक हक-अधिकार आ इच्छा-मनोरथ विपरीत स्त्री विमर्शः महिले महिलाक दुश्मन

विमर्शः जनकपुर मे ३ दिवसीय साहित्यिक-सांस्कृतिक महोत्सवः स्त्री आ दलित विमर्शक आकर्षण

६ जून २०२३ । मैथिली जिन्दाबाद!! विमर्श फाउन्डेशन द्वारा यैह ९ जून २०२३ शुक्र दिन सँ ११ जून २०२३ रवि दिन धरि तीन दिवसीय साहित्यिक-सांस्कृतिक महोत्सव ‘विमर्श’ केर आयोजन होमय जा रहल अछि। ई आयोजन मिथिला यात्री निवास, जनकपुरधाम, नेपाल मे होयत। विमर्श कार्यक्रमक आरम्भ शुक्र दिन ९ जून २०२३ केँ सन्ध्या ४ बजे सँ विमर्शः जनकपुर मे ३ दिवसीय साहित्यिक-सांस्कृतिक महोत्सवः स्त्री आ दलित विमर्शक आकर्षण

समाजक लोक मे दोहरा चरित्रः दोसरक कष्ट प्रति असंवेदनाक विचित्र अमानवीय व्यवहार

कष्ट ई ‘कष्ट’ शब्द बजितो या सुनितो, अथवा सोचितो मोन केँ भयभीत करैत अछि, हृदयक धड़कन बढ़ा दैत अछि आ पूरे सिस्टम केँ एलर्ट पर दय दैत अछि। कष्ट शरीर मे सेहो होइत छैक आ मोन-मस्तिष्क मे सेहो। सामान्य सँ अधिक शारीरिक तापक्रम केँ बुखार कहल जाइछ, आ बुखार मे मोन बौएनाय, माथ औनेनाय, शरीर समाजक लोक मे दोहरा चरित्रः दोसरक कष्ट प्रति असंवेदनाक विचित्र अमानवीय व्यवहार

रामचरितमानस मोतीः गुफा मे तपस्विनी सँ भेंट उपरान्त बानर सभक समु्द्रक कछेर पर पहुँचब

स्वाध्याय – प्रवीण नारायण चौधरी रामचरितमानस मोती गुफा मे तपस्विनीक दर्शन, वानर सभक समुद्र तट पर आयब, सम्पाती सँ भेंट आर बातचीत १. ताकैत-ताकैत बानर सब केँ बड जोर सँ प्यास लागि गेलैक। ओ सब बहुते व्याकुल भ’ गेल। कतहु जल नहि भेटि रहल छलैक। घनगर जंगल मे सब कियो रस्तो बिसरि गेल छल। हनुमान्‌जी रामचरितमानस मोतीः गुफा मे तपस्विनी सँ भेंट उपरान्त बानर सभक समु्द्रक कछेर पर पहुँचब