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प्रवीण नारायण चौधरी

मिथिलाक स्थापना – संरक्षण – संवर्धन सदा सदा सँ सामूहिकताक संग भेल अछि

सामूहिकता के लाभ   मानव सभ्यताक विकास मे सामूहिकता पर कियो लेखकक लेखनी द्वारा लाभ के चर्चा करब आजुक आवश्यकता किन्नहु नहि, तथापि समाज मे सब तरहक लोक होइछ आ बेर-बेर के चर्चा सँ कतेको लोकक हनुमानशक्ति (जे सुसुप्तावस्था मे रहैछ) जागि सकैत अछि।   सन्दर्भ लेब ‘दहेज मुक्त मिथिला’ केर। एकर परिकल्पना जहिया आरम्भ मिथिलाक स्थापना – संरक्षण – संवर्धन सदा सदा सँ सामूहिकताक संग भेल अछि

रामायणक अद्भुत रहस्य – पढिकय कियो भावुक भऽ जायत

स्वाध्याय आलेख – अखिलेश कुमार मिश्र रामायण के सार – अद्भुत रहस्य एक राति के बात अछि। माता कौशल्याक नींद अचानक खुजि गेल। हुनका अप्पन छत पर केकरो चलs के पदचाप सुनाई देलक। पता केलैथि तs पता चलल जे ओ शत्रुघ्नजीक अर्धांगिनी श्रुतिकीर्ति जी छैथि। हुनका माँ कौशल्या नीचा बजेलैथि। श्रुतिकीर्ति जी, सभ सँ छोटकी पुतौहु रामायणक अद्भुत रहस्य – पढिकय कियो भावुक भऽ जायत

मैथिल संस्कृतिक दर्पण : अरिपन

साहित्य लेख “मैथिल संस्कृतिक दर्पण : अरिपन” – सुरेन्द्र झा, ग्राम + पो० – डखराम, बहेड़ा, दरभंगा । मकर संक्रांति, दि० – १४.०१.२०१८ (लेख संकलन एवं सम्पादनः श्री राज कुमार झा, मुम्बई) मैथिल संस्कृति अत्यन्त प्राचीन अछि । विद्वान लोकनि एहि तथ्यकेँ एकस्वरसँ स्वीकार करैत छथि । ई संस्कृति कतS आ कहिया आरंभ भेल ई मैथिल संस्कृतिक दर्पण : अरिपन

Dowry System in Mithila – Sweta Jha, Rambhadrapur Darbhanga

हमर नाम श्वेता झा गांव – रामभद्रपूर दरभंगा *Dowry* *System* *In* *Mithila* Dowry System is an ancient culture of India performed during marriages . This system consists of cash, jewelries, furniture as gifts from the bride’s side to the groom . In Mithila the *Khoinch* Pratha (system) was performed in ancient times give some cash Dowry System in Mithila – Sweta Jha, Rambhadrapur Darbhanga

आइ हम हिन्दू धर्मावलम्बी अपन कतेक नियम निष्ठा निर्वाह करैत छी

हम सब कतय छी   समस्त सृष्टि – समस्त प्रकृति – समस्त स्थिति आदिक एकमात्र आधार भगवती आदिशक्ति जगदम्बा केर स्तुति मे ‘दुर्गा सप्तशती’ केर पाठ सब कियो बुझिते छी। भगवतीक विभिन्न अवतार आ दानव-दैत्यक संहार केर चरित्र वर्णन अछि। मधु-कैटभ केर बद्ध प्रथम चरित्र, महिषासुर आ ओकर सेनाक बद्ध मध्यम चरित्र आ फेर शुम्भ-निशुम्भ आइ हम हिन्दू धर्मावलम्बी अपन कतेक नियम निष्ठा निर्वाह करैत छी

घटकैती आ वरक बाप (मैथिली कविता)

साहित्य सृजन – पल्लवी झा जखने बेटी जन्म भेल छल, बच्चे से ने पाय जुटैतियै यौ अइछ नै जमीन त खून पसीना, बहाक अहाँ कमैतियै यौ   समधी सुनू नै लोभ ये हमरा, अहाँ के एक्को पाय से मुदा समाज के नियम त मानब, जे देब से अपने जमाय के   हमरो शौक ये अप्पन घटकैती आ वरक बाप (मैथिली कविता)

मैथिली जिन्दाबाद न्यूज पोर्टल केर छः वर्ष पूरा

मैथिली जिन्दाबाद केर ६ वर्ष   अप्रैल ११ – २०१५ केँ लोकार्पण कयल गेल मैथिलीक नागरिक संवाददाता व योगदानदाता आधारित एक संचार माध्यम “मैथिली जिन्दाबाद” – एखन सातम वर्ष मे छी हम सब।   मैथिली लेल अधिक सँ अधिक सामग्री (कन्टेन्ट्स) समेटल गेल अछि एहि ६ साल मे। लगभग ५००० आलेख आ समाचारमूलक पोस्ट्स आदि मैथिली जिन्दाबाद न्यूज पोर्टल केर छः वर्ष पूरा

सीता (मैथिली कविता)

साहित्य सृजन – पल्लवी झा मिथिलेश्वर अप्पन खेत में हल के शिरा घुमाओल जहिना जनकनन्दिनी भेली अवतरित धरा के भीतर सँ हे बहिना धन्य भेल मिथिला के धरती जन जन गाबै ये बधैया अन धन सोनवा लुटबै खुशी में झूमी सुनैना मैया   जनकसुता ओ चारू चंचला लक्ष्मी के अवतारी सेहो सात बरख आयु में सीता (मैथिली कविता)

साहित्यकार कामेन्द्रनाथ झाक निधन

18 मई 2021, मैथिली जिन्दाबाद!! साहित्यकार कामेन्द्रनाथ झाक निधन मधुबनी : मैथिली कथा-संग्रह ग्रिभाँस केर लेखक कामेंद्रनाथ झाक रवि दिन दरभंगा मे स्वर्गीय हेबाक दुखद समाचार अछि। ओ पचासी वर्षक रहथि। कोइलख गाम के निवासी कामेन्द्रनाथ झा विगत छह माह सँ बीमार रहथि और अपन ज्येष्ठ पुत्र साहित्यकार हीरेन्द्र कुमार झा संग हुनक दरभंगा आवास साहित्यकार कामेन्द्रनाथ झाक निधन

समाज मे सभक योगदान छैक – सभक प्रति स्वीकार्यताक भाव सब व्यक्ति मे जरूरी

जड़ व्यक्ति मे सेहो अनेक सद्गुण आ वैशिष्ट्य छैक – प्रवीण नारायण चौधरी एहि संसार मे भिन्न-भिन्न प्रकारक मनुष्य रहैछ। ओकर वृत्ति (कर्म) सेहो भिन्न-भिन्न होइछ। साधारण जनजीवन मे सभक आजीविका चलेबाक काज कतेको रंग के छैक। सामाजिक व्यवहार मे लोकवृत्तिक आधार पर केकरो सभ्य, केकरो असभ्य, केकरो ऊँच, केकरो नीच हेबाक बात प्रचलित सामाजिक समाज मे सभक योगदान छैक – सभक प्रति स्वीकार्यताक भाव सब व्यक्ति मे जरूरी