अत्यन्त पठनीय-मननीय आलेखः ‘दान-धर्म’ (महर्षि दयानन्द सरस्वतीकृत्)
स्वाध्याय लेख अनुवादः प्रवीण नारायण चौधरी दान-धर्म (ब्रह्मलीन स्वामी श्रीदयानन्दजी सरस्वती, भारतधर्म महामण्डल) धर्मक तीन प्रधान अंग छैक – यज्ञ, तप आ दान। श्रीगीतोपनिषद् मे कहल गेल अछि – ‘यज्ञो दानं तपश्चैव पावनानि मनीषिणाम्’। एहि तीन प्रकार प्रधान धर्मांग सब मे दान-धर्म सब प्रकारक अधिकारी लेल प्रथम व कलियुग मे परम सहायक अछि। भगवान् … अत्यन्त पठनीय-मननीय आलेखः ‘दान-धर्म’ (महर्षि दयानन्द सरस्वतीकृत्)








