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प्रवीण नारायण चौधरी

ऐतिहासिक नगरी विराटनगर मे काली पूजा मनेबाक इतिहास बनेलक अप्पन ब्राह्मण समाज

८ नवम्बर २०२१ । मैथिली जिन्दाबाद!! विराटनगर मे काली पूजा   अप्पन ब्राह्मण समाज – नामहि सँ सब केँ अपनाबयवला, सब मे अपनत्व केर सुन्दर भाव प्रदान करयवला एक नवस्थापित संस्था द्वारा ऐतिहासिक-औद्योगिक महानगरी विराटनगर केर एक कमी केँ पूर्ति करयवला ऐतिहासिक संस्था बनि गेल अछि। एहि महानगर मे ओना त नित्य कोनो न कोनो ऐतिहासिक नगरी विराटनगर मे काली पूजा मनेबाक इतिहास बनेलक अप्पन ब्राह्मण समाज

युवा राजनीतिकर्मी जयराम यादव बनलाह सामाजिक विकास मंत्री – युवा लेल प्रेरणाक सन्देश

८ नवम्बर २०२१ । मैथिली जिन्दाबाद!! विचार – प्रवीण नारायण चौधरी युवा लेल विशेष प्रेरणाः जयराम यादव   पाबनि-तिहारक समय व्यस्तताक कारण अपन पाठक लोकनि सँ ई साझा समय सँ नहि कय सकल छलहुँ… गाँधीवादी विचारधाराक युवा राजनीतिकर्मी तथा नेपालक वंचित-शोषित समुदाय मधेशी सहित आदिवासी, जनजाति, दलित, मुस्लिम, आदिक आवाज बनिकय अत्यन्त कम उमेर सँ युवा राजनीतिकर्मी जयराम यादव बनलाह सामाजिक विकास मंत्री – युवा लेल प्रेरणाक सन्देश

9म राम थाईलैंड के राजा?

साभार हिन्दी संस्थान कनाडा फेसबुक पेज   भारत के बाहर थाईलेंड में आज भी संवैधानिक रूप में राम राज्य है । वहां भगवान राम के छोटे पुत्र कुश के वंशज सम्राट “भूमिबल अतुल्य तेज ” राज्य कर रहे हैं , जिन्हें नौवां राम कहा जाता है । -भगवान राम का संक्षिप्त इतिहास- वाल्मीकि रामायण एक 9म राम थाईलैंड के राजा?

कोरोना महामारी सँ निजात लेल बिहार में सिसिडब्ल्यूजी द्वारा राज्य स्तरीय ई-ग्रैंड राउंड केर संचालन

पटना, 3 नवम्बर 2021 । मैथिली जिन्दाबाद । एम्स पटना के अगुवाई में यूएसएड (यूएसएआईडी) राइज तथा झपियेगो केर संयुक्त प्रयास सँ बिहार राज्य में गठित क्रिटिकल केयर वर्किंग ग्रुप (सिसिडब्ल्यूजी) द्वारा प्रत्येक जिला आ पब्लिक हेल्थ सेंटर केर स्वास्थ्यकर्मी सब केँ महामारी सँ ग्रसित रोगी केँ इमरजेंसी सेवा संग एकाएक जरूरी पड़ि सकय वला कोरोना महामारी सँ निजात लेल बिहार में सिसिडब्ल्यूजी द्वारा राज्य स्तरीय ई-ग्रैंड राउंड केर संचालन

मातृभाषाक महत्व

अपन मातृभाषा केर महत्व की?   मातृभाषा पर बहुत रास लेख अछि। हमर आग्रह जे एक बेर आर्ट अफ लिविंग श्री-श्री रविशंकर संग वार्ता पर आधारित एहि लेख केँ जरूर पढू। लिंकः https://www.artofliving.org/in-hi/wisdom/why-is-it-important-to-learn-mother-tongue   मातृभाषा सँ लोक केँ जे पहिचान भेटैत अछि वास्तव मे वैह आत्मसम्मान सेहो प्रदान करैत अछि। लेकिन दुर्भाग्य सँ आइ मिथिला मातृभाषाक महत्व

दहेज मुक्त मिथिला पूजा मिलन समारोह मधुबनीक सम्पूर्ण प्रतिवेदन (रिपोर्ट)

मधुबनी मे मिलन समारोह – कि सब उपलब्धि भेटल   दहेज मुक्त मिथिला पूजा मिलन समारोह पूर्व निर्धारित स्मारिका विमोचन तिथि अर्थात् १६ अक्टूबर २०२१ केँ तय समय आ तय स्थान ‘अतिथि होटल’ केर सभागार मे सम्पन्न भेल। एकर अध्यक्षता समूह संचालिका वन्दना चौधरी कयलीह आ कार्यक्रम संचालन नीरज कुमार झा संग हम प्रवीण नारायण दहेज मुक्त मिथिला पूजा मिलन समारोह मधुबनीक सम्पूर्ण प्रतिवेदन (रिपोर्ट)

मैथिली भाषा लेल चिन्ता आ चिन्तन – भाषिक एकरूपता कोना बनत

मैथिली लेखन मे एकरूपताक अभाव कोना दूर हो?     भाषा-विमर्श मे अक्सरहाँ ई चर्चा कयल जाइत अछि जे मैथिलीक कतेको रास शब्द अलग-अलग लेखक द्वारा अलग-अलग हिज्जे मे लिखल जाइछ। एहि सँ पाठक भ्रमित भेल करैत अछि आर मैथिलीक पठनीयता मे कतहु न कतहु कमी एबाक किंवा एकर अध्ययन मे लोकक रुचि घटि जेबाक मैथिली भाषा लेल चिन्ता आ चिन्तन – भाषिक एकरूपता कोना बनत

प्राकृतिक सुन्दरताक संरक्षण मानवोचित कर्म – कस्मेटिक सुन्दरता सँ बचू

विचार – प्रवीण नारायण चौधरी सुन्दरता सुन्दर माने देखिते आकर्षित करयवला – कोनो वस्तु, व्यक्ति या स्थान जे आकर्षक लागय, नीक लागय, वैह भेल सुन्दर। आर ई आकर्षण करयवला जे गुण-विशेषता छैक से कहाइत छैक सुन्दरता।   एहि जीवमंडल मे एहेन कतेको जीव अछि जे बड़ा आकर्षक लगैत छैक, चाहे रूप, चाहे गुण, चाहे धर्म, प्राकृतिक सुन्दरताक संरक्षण मानवोचित कर्म – कस्मेटिक सुन्दरता सँ बचू

मैथिल साम्प्रदायिक श्रीदुर्गासप्तशती-२ः सप्तशतीन्यास एवं नवार्ण विधि

सप्तशतीन्यास अथ सप्तशतीन्यासः श्री दुर्गायाः दुर्गासप्तशतीस्तोत्रमन्त्रात्मकानां प्रथम-मध्यमोत्तरचरित्राणां ब्रह्म-विष्णु-महेश्वरा ऋषयो, गायत्र्युष्णिगनुष्टुभश्छन्दांसि, महाकाली-महालक्ष्मी-महासरस्वत्यो देवता, नन्दा-शाकम्भरी-भीमाः शक्तयो, रक्तदन्तिका-दुर्गा-भ्रामर्यो बीजानि, ऐँ ह्रीँ क्लीमिति कीलकानि, अग्नि-वायु-सूर्यास्तत्त्वानि, ऋग्यजुःसामवेदा ध्यानानि सकलकामनासिद्धये महाकाली-महालक्ष्मी-महासरस्वतीप्रीत्यर्थे जपे विनियोगः॥ करन्यासः खड्गिनी शूलनी घोरा गदिनी चक्रिणी तथा। शंखिनी चापिनी बाणा भुशुण्डी परिघायुधा॥ अंगुष्ठाभ्यां नमः॥ शूलेन पाहि नो देवि पाहि खड्गेन चाम्बिके। घण्टास्वनेन नः पाहि चापज्या-निःस्वनेन च॥ तर्ज्जनीभ्यां स्वाहा॥ मैथिल साम्प्रदायिक श्रीदुर्गासप्तशती-२ः सप्तशतीन्यास एवं नवार्ण विधि

मैथिलसाम्प्रदायिक श्री दुर्गासप्तशती-१: अर्गला, कीलक तथा कवच

मैथिलसाम्प्रदायिक श्री दुर्गासप्तशती (मैथिली भाषात्मक ‘सांगदुर्गाप्रकाशिका’ व्याख्या सहितं) व्याख्याकारः महाकवि लालदास (१८५६ ई. – १९२१ ई.) सम्पादकः पं. (डा.) शशिनाथ झा “विद्यावाचस्पति” प्रकाशकः उर्वशी प्रकाशन   भूमिकाः   अपार-संसार-महोग्रसागरा-दुपैतिपारं जडबुद्धयोऽप्यहो। पादारविन्दं मनसापि वन्दयन् यस्याश्शिवां तां प्रणतोऽस्मि सिद्धिदाम्॥   वीरयसं. तारालाही ग्राम निवासी, कर्णकुलोद्भव, देवभक्ति-परायण, शूर, औदार्य्य गुणसम्पन्न “बलभद्र” प्रसिद्ध वल्लीदास छलाह, जे श्रीमान् दिल्लीपति बादशाहक मैथिलसाम्प्रदायिक श्री दुर्गासप्तशती-१: अर्गला, कीलक तथा कवच