Search

प्रवीण नारायण चौधरी

भीड़ कतेक जुटल – देखाबा के राजनीति

भीड़ जुटाउ राजनीति चमकाउ   एहि मे कतहु दुइ मत नहि जे शिक्षा आ संस्कार केर बल पर स्वाभिमानी छी हम समस्त मिथिलावासी अर्थात् मैथिल। परन्तु ‘अहंता’ केर कारण ‘उच्चताबोधी ग्रन्थि’ तथा ‘लघुताबोधी ग्रन्थि’ केर अति सक्रिय होयबाक कारण हम सब अपन मूल्य-मान्यता आ अस्तित्व प्रति साकांक्ष कम, अपने-अपने बुद्धिक लड़ाई मे बेसी मुग्ध भेल भीड़ कतेक जुटल – देखाबा के राजनीति

भदवा के पावर – पारम्परिक प्रथाक माहात्म्य

कथा – पंडित दयानन्द झा भदबा महरानिक पावर – प्रवीण जिक विमोचन रूकि गेल गौरी कतेको बेर महादेव केँ एकटा घर बन्हबाक लेल कहलखिन्ह, लेकिन महादेव एहिपर ध्यान नहि देथिन्ह। जखन गणेश जी कने नम्हर भेला ते माइक बात रखबा लेल एक दिन बाँस काठक ओरियान कए घर बान्हए लगलाह। महादेव कतहु सँ गाम पर अएलाह भदवा के पावर – पारम्परिक प्रथाक माहात्म्य

केकरो धार्मिक आस्था या धार्मिक महापुरुष केर गलत चित्रांकन करब गलते कहल जाय

एहेन मृत्यु सँ शिक्षा लेब जरूरी   स्वीडन के कलाकार ‘लार्स विल्क्स’ जे इस्लामक पैगम्बर मोहम्मद साहेब पर आधारित निन्दित कार्टून बनेने छलाह से आइ एक सड़क दुर्घटना मे मारल गेलाह। दुर्घटना कोनो अन्य कारण सँ नहि बल्कि जाहि पुलिस सुरक्षा सहितक गाड़ी मे ओ यात्रा कय रहल छलाह से स्वयं अनियंत्रित होइत एकटा ट्रक केकरो धार्मिक आस्था या धार्मिक महापुरुष केर गलत चित्रांकन करब गलते कहल जाय

चीनक पारम्परिक विवाह पद्धति संग मिथिला पद्धतिक तुलना

लेख – प्रवीण नारायण चौधरी कोन नीक, हम या ओ   विवाहक तौर-तरीका सेहो विभिन्न सभ्यताक विशिष्टता होइत छैक। हम-अहाँ मिथिला सभ्यताक लोक मे विवाहक परम्परा अति-विशिष्ट अछि। लेकिन अपने मोने मियाँ मुंह मिट्ठू भेला सँ त काज नहि चलत, एहि लेल हम सब अपन मिथिलाक वैवाहिक विध-विधान, परम्परा, तौर-तरीका, शैली, विशेषता आदि केँ कोनो चीनक पारम्परिक विवाह पद्धति संग मिथिला पद्धतिक तुलना

ई जातीय व्यवस्था सिर्फ हिन्दुस्तानहि टा मे छैक या अन्तहु

वर्ण व्यवस्था आ चीनक कथा – प्रवीण नारायण चौधरी समाजक संरचना आ संचालन देखि स्पष्ट छैक जे एहि मे सभक सामुहिक योगदान रहैत छैक। सब जाति, सब धर्म, सब वर्ग, निर्बल-सबल, होशियार-जोशियार कि बकलेल-बुधियार – सभक। तखन मानव प्रकृति मे अपन जाति के नाम पर कखनहुँ श्रेष्ठताक भावना (Superiority Complex) या फेर हीन भावना (Inferiority ई जातीय व्यवस्था सिर्फ हिन्दुस्तानहि टा मे छैक या अन्तहु

वर्तमान समय परिवार मे कलह केर मुख्य कारण की?

विचार – प्रवीण नारायण चौधरी पारिवारिक कलह सँ बचबाक विवेक   कतेक बेर देखल गेलैक अछि जे दहेज दय कय विवाह भेल कनियाँ अपन सासु-ससुर सँ एहि बात लेल घोर घृणा आ विद्रोह बाद मे करैत छथिन, सासु किछु बजली कि टप् दय जवाब दय देल करैत छथिन पुतोहु जे कोनो हमर माय-बाप मंगनी मे वर्तमान समय परिवार मे कलह केर मुख्य कारण की?

मनक गति सँ जीवनक गति – महत्वपूर्ण दर्शन

एकटा सहज लेकिन महत्वपूर्ण दर्शन   (A Simple But Significant Philosophy) – प्रवीण नारायण चौधरी जबानीक जोश जखन माथ पर सवार रहैछ त लोक केवल इन्द्रिय केर विषय-भोग मे रमण करैत अछि। पुनः भोगक विन्यास सँ जखन जीवन यात्रा प्रभावित होबय लगैत छैक, यानि शरीर अस्वस्थ भेल या कतहु जोरदार धक्का लागल, तखन लोक के मनक गति सँ जीवनक गति – महत्वपूर्ण दर्शन

मिथिला के भोर जरूर हेतय

दर्शन-विचार – प्रवीण नारायण चौधरी अपनहि हाथ मे सब बात होइछ दिन बितैत जा रहल अछि। दिन-दिन जिम्मेदारी बढ़ैत जेबाक फील (अनुभूति) सेहो भ’ रहल अछि। उच्च रक्तचाप के स्वास्थ्य सम्बन्धी समस्याक अतिरिक्त चिन्ता आ तनाव केर कतिपय स्थिति नहियो चाहैत बेर-बेर आबि जाइछ सोझाँ। एहेन सब स्थिति मे अपना मात्र केँ सन्तुलित आ नियंत्रित मिथिला के भोर जरूर हेतय

अन्तर्राष्ट्रीय बेटी दिवसः बेटी होइछ प्रकृतिक सर्वोत्तम उपहार

विचार – प्रवीण नारायण चौधरी अन्तर्राष्ट्रीय बेटी दिवसः बेटी होइछ प्रकृतिक सर्वोत्तम उपहार   आइ सितम्बर मासक चारिम रवि दिन – जेकरा विश्व भरि मे बेटी लेल समर्पित करैत ‘अन्तर्राष्ट्रीय बेटी दिवस’ केर रूप मे मनायल जेबाक एकटा मान्यता स्थापित कयल गेल छैक – बेटी दिवस एहि लेल जे बहुतो स्थान पर एहि बेटी प्रति अन्तर्राष्ट्रीय बेटी दिवसः बेटी होइछ प्रकृतिक सर्वोत्तम उपहार

कलिंग लिटरेरी फेस्टिवल मे मैथिलीक दुइदिवसीय सहभागिता

(समाचार हिन्दी मे अछि, समयाभाव मे मैथिली अनुवाद नहि कयल जा सकल) नई दिल्ली। कलिंग लिटरेरी फेस्टिवल के तत्वावधान में आयोजित मैथिली लिटरेरी फेस्टिवल के वर्चुअल आयोजन का आगाज सोशल मीडिया के सभी वैश्विक पटल पर बीते दिन 11-12 सितंबर को हुआ। पूर्ण रूप से युवा पीढ़ी पर केंद्रित इस महत्वपूर्ण आयोजन की रूपरेखा निश्चित कलिंग लिटरेरी फेस्टिवल मे मैथिलीक दुइदिवसीय सहभागिता