रामचरितमानस मोतीः बालि-सुग्रीव युद्ध, बालि केर बध आ तारा विलाप
स्वाध्याय – प्रवीण नारायण चौधरी रामचरितमानस मोती बालि-सुग्रीव युद्ध, बालि केर बध आ तारा विलाप १. सुग्रीवक ललकार सुनि आ ताराक बुझेबाक स्थिति देखि बालि बजलाह – अरे भीरु! (डरपोक) प्रिये! सुनू! श्री रघुनाथजी समदर्शी छथि। जँ कदाचित् ओ हमरा मारिये देता तँ हम सनाथ भ’ जायब, परमपद केँ पाबि जायब। एतेक कहिकय ओ महान् … रामचरितमानस मोतीः बालि-सुग्रीव युद्ध, बालि केर बध आ तारा विलाप






