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प्रवीण नारायण चौधरी

सिर्फ जय मिथिला सँ मिथिलाक जय कहियो हेतैक, मधुबनीक अनुकरण आवश्यक

विशेष सम्पादकीय मधुबनी सँ सीखू मिथिलाक समस्त जिलावासी *वर्तमान जिलाधिकारी मधुबनी कियैक कहाइत छथि डा. जार्ज अब्राहम ग्रियर्सनक पुनर्अवतार *सरकारी योजनाक पैसा कतय खर्च होएत अछि *कियैक छी हमरा लोकनि एखन धरि विपन्न, कियैक पलायन रोग डसैत अछि हमर मिथिला समाज केँ अपने जागब त संसार जागल देखब, अपने जँ सूतल रहब त संसार सँ सिर्फ जय मिथिला सँ मिथिलाक जय कहियो हेतैक, मधुबनीक अनुकरण आवश्यक

मिथिलाक लोककला मे ‘सिक्की कला’ केर स्थान आ महत्व

आलेख अनुवाद – प्रवीण नारायण चौधरी, मूलः हिन्दी आलेख, साभारः मिथिला कनेक्ट दहेज मुक्त मिथिलाक एक प्रशाखा ‘जानकी वाहिनी’ जेकर उद्देश्य मिथिलाक ग्रामीण घरेलू-कामकाजी महिला लोकनिक खाली समयक उपयोग कय मिथिलाक लोककला व अन्य दक्ष शीप सँ संभव उत्पादन बढाकय ओकर बाजार-वितरणक व्यवस्था आर एहि तरहें उपलब्ध आमदनी सँ महिला लोकनि केँ स्वाबलंबी-स्वरोजगारी बनबैत महिला मिथिलाक लोककला मे ‘सिक्की कला’ केर स्थान आ महत्व

व्यंग्य प्रसंगः फल्लाँ बाबू मैथिल केर कथा

व्यंग्य प्रसंग – प्रवीण नारायण चौधरी फल्लाँ बाबू मैथिल   कहियो-कहियो फल्लाँ बाबू मैथिल हमरा लंबा-लंबा गप दैत भेटि जाइत छथि। गप एहि द्वारे जे सब दिन ओ गपे टा मारलनि। काजक बेर ओ पतनुकान लय लेलनि। जे सिर्फ बाजय आ करय किछो नहि तेकरे न गप्पी कहल जाइत छैक। गप्पीक गप सुनय मे बड व्यंग्य प्रसंगः फल्लाँ बाबू मैथिल केर कथा

मैथिली साहित्य मे ‘मणि-श्रृंखला’क ऐगला कड़ी ‘बालमणि’, ई १४म मणि थिक

२९ जून, २०१८. मैथिली जिन्दाबाद!! मणि श्रृंखलाक १४म मणि (कड़ी) ‘बालमणि’ केर लोकार्पण काल्हि ३० जून २०१८ केँ मधुबनीक जीबछ चौक स्थित रिजनल सेकेन्ड्री स्कूलक प्रांगण मे समारोहपूर्वक कयल जायत। एहि समाचारक संग लेखक साहित्यकार सह आकाशवाणी दरभंगाक संचारकर्मी मणिकान्त झा एहि अवसर पर आम आमंत्रण सहितक स्टेटस फेसबुक सँ अपडेट कयलनि अछि। ओ कहलनि मैथिली साहित्य मे ‘मणि-श्रृंखला’क ऐगला कड़ी ‘बालमणि’, ई १४म मणि थिक

मानव जीवन लेल बहुमूल्य

विचार – प्रवीण नारायण चौधरी बहुमूल्य वस्तु   जन्म देनिहाइर माय आ पिताक चरण मे बेर-बेर प्रणाम करैत हुनका लोकनि सँ प्राप्त बहुमूल्य जीवन केँ बुझैत, मनन करैत आजुक ई लेख ‘बहुमूल्य वस्तु’ आरम्भ कय रहल छी।   बहुमूल्य परिजन – समस्त सम्बन्ध भाइ-बहिन, काका-काकी, बाबा-बाबी, दीदी-पीसा, मामा-मामी, मौसी-मौसा – सभक स्नेह आ पालन-पोषण जे मानव जीवन लेल बहुमूल्य

सफलता केना भेटैत छैक, नैतिक शिक्षा कियैक आवश्यक

सक्सेसः गेट इट बाइ हूक एन्ड क्रूक!! सफलता भेटय ई सभक लक्ष्य रहैत छैक। लेकिन सफलता पेबाक लेल जे योग्यता छैक ताहि लेल परिश्रम आ लगन केकरा मे कतेक छैक, ताहि बात पर निर्भर करैत अछि। परिश्रम आ लगन बीचक केमिस्ट्री केँ जे कियो बुझैत अछि, ओ सफल हेब्बे टा करैत अछि। जा धरि ई सफलता केना भेटैत छैक, नैतिक शिक्षा कियैक आवश्यक

एमएसयू केर लोकप्रियता सँ घबरायल छथि किछु राजनीतिक दल आ समर्थकः रौशन मैथिल

साक्षात्कार मिथिला स्टूडेन्ट यूनियन (भारत) केर अध्यक्ष रौशन मैथिल संग संपादक प्रवीण नारायण चौधरीक अन्तर्वार्ता मैथिली जिन्दाबाद पर प्रकाशित विचार पर मिथिला स्टूडेन्ट यूनियन (भारत) द्वारा तीव्र प्रतिक्रिया दैत एकर राष्ट्रीय अध्यक्ष रौशन चौधरी उर्फ रौशन मैथिल अपन पक्ष पर खुलिकय विचार रखलनि अछि। ओ कहलनि अछि जे ई सब आरोप-प्रत्यारोप सिर्फ एमएसयू केर मिथिलावादक एमएसयू केर लोकप्रियता सँ घबरायल छथि किछु राजनीतिक दल आ समर्थकः रौशन मैथिल

राजनीतिक दलाल आ लव-जेहादी गतिविधि मिथिला मे?

विचार – प्रवीण नारायण चौधरी सचेतना आ सावधानी लेल जनहित मे जारी!!   मिथिला मे ‘लव-जेहाद’ आ ‘मिथिलावाद’ केर नाम पर राजनीतिक दलाली केर संगीन आरोप लगबैत गोटेक सूचना प्राप्त भेल अछि।   विस्मित त छी लेकिन हैरान नहि छी! सामान्यतया केकरो बारे मे चरित्र चित्रण करब अपना सूट नहि करैत अछि, कारण सूप दूसलनि राजनीतिक दलाल आ लव-जेहादी गतिविधि मिथिला मे?

मैथिलीक संरक्षणार्थ फेर एक ऐतिहासिकता सहरसाक नाम, कोर्ट मे मैथिली मे याचिका स्वीकृत

२७ जून २०१८. मैथिली जिन्दाबाद!! मैथिली भाषा आ मिथिला संस्कृति केर प्राचीनता अत्यन्त पुरान आ समृद्ध रहितो कालान्तर मे दुनू पर संकट देखल जाइत रहल अछि। बहरिया शासक त पहिने सँ चाहैत रहल अछि जे ई भाषा-संस्कृतिक लोप भऽ जाइक, तखन विगत किछु समय सँ आन्तरिक समस्या मे सेहो अपनहि मिथिलाक लोक सब जातिक नाम मैथिलीक संरक्षणार्थ फेर एक ऐतिहासिकता सहरसाक नाम, कोर्ट मे मैथिली मे याचिका स्वीकृत

दिनक आरम्भ आ पुस्तक संग दोस्ती – स्वाध्यायक परम्परा

शुभ दिनक शुरुआत शुभ कार्य सँ…   नित्य भोरे उठि करदर्शन, आत्मदर्शन, ईश्वरदर्शन, पृथ्वी-प्रणाम, तुलसी-दर्शन, सूर्य-दर्शन, प्रकृति-दर्शन आ वायू-पान, जल-पान, नित्यकर्म आदि संपन्न कय अहाँ सदैव स्वाध्याय करू। पुस्तक सब सँ पैघ मित्र होएत छैक, कियैक? कियैक तँ पुस्तक मे सदिखन एक सँ बढिकय एक ज्ञानक बात भेटैत छैक। जहिना एकटा नीक मित्र सदिखन नीक दिनक आरम्भ आ पुस्तक संग दोस्ती – स्वाध्यायक परम्परा