मैथिलीक संरक्षणार्थ फेर एक ऐतिहासिकता सहरसाक नाम, कोर्ट मे मैथिली मे याचिका स्वीकृत

मैथिली मे पहिल बेर कोर्ट मे प्रस्तुत भेल याचिका, सुनबाई सेहो मैथिली भाषा मे जिरह सँ

२७ जून २०१८. मैथिली जिन्दाबाद!!

मैथिली भाषा आ मिथिला संस्कृति केर प्राचीनता अत्यन्त पुरान आ समृद्ध रहितो कालान्तर मे दुनू पर संकट देखल जाइत रहल अछि। बहरिया शासक त पहिने सँ चाहैत रहल अछि जे ई भाषा-संस्कृतिक लोप भऽ जाइक, तखन विगत किछु समय सँ आन्तरिक समस्या मे सेहो अपनहि मिथिलाक लोक सब जातिक नाम पर आ वर्गीय विभेदक प्रतिशोध मे एहि भाषा आ संस्कृति पर आक्रमण सेहो करैत देखाइत अछि। परञ्च १९२० ई. सँ आरम्भ मातृभाषा मैथिलीक रक्षार्थ विभिन्न अभियान आब लगभग १०० वर्ष पूरा करय लेल जा रहल अछि आर ताहि मे पूर्वी मिथिलाक सहरसा (पूर्वनाम भागलपुर जिला) – कोसी क्षेत्रक भूमिका अत्यन्त महत्वपूर्ण रहल अछि। एहि क्रान्तिक एकटा नव स्वरूप मैथिली भाषा मे कोर्ट मे याचिका दर्ज करेबाक काज पुनः सहरसाक नाम मे दर्ज भेल अछि।

युवा अभियानी राजन झा एहि बातक सूचना एकटा पेपर कटिंग मार्फत मैथिली जिन्दाबाद केँ उपलब्ध करौलनि अछि जाहि सँ ई महत्वपूर्ण बातक जनतब भेटल अछि। एहि पेपर कटिंग सँ स्पष्ट अछि जे भारतक संविधानक आठम् अनुसूची मे दर्ज संवैधानिक भाषा मैथिली मे सेहो कोर्ट कार्रबाही कयल जा सकैत अछि, लेकिन सामान्य व्यवहार मे सिर्फ अंग्रेजी आ हिन्दी बेसी चलबाक कारण एहि सँ पहिने कतहु मैथिली मे कोनो याचिका दर्ज करेबाक वा स्वीकार कयल जेबाक समाचार नहि भेटल छल। यैह कारण छैक जे पेपर केर समाचार मे शीर्षक सेहो मैथिली मे लगबैत एहि क्रान्तिकारी प्रयास केँ सम्मान देल गेल अछि। बाकी समाचारक पूर्ण पाठ पेपर कटिंग मे उपलब्ध अछि।