महाकवि विद्यापतिक एकटा अत्यन्त भावपूर्ण रचना – राधाकृष्णक अलौकिक प्रेमक वर्णन – गीत
विद्यापति गीत सुन्दरि, अबहु बचन सुन सबे परिहरि तोहि इछ हरि आपु सराहहि पुन । लाखे तरुअर कोटिहि लता जुबति कत न लेख । सब फूल मधु मधुर नहि फूलहु फूल बिसेख ॥ सुन्दरि, अबहु बचन सुन… जे फुल भमर निन्दहु सुमर बासि न बिसरए पार । जाहि मधुकर उड़ि उड़ि पड़, सेहे संसार क … महाकवि विद्यापतिक एकटा अत्यन्त भावपूर्ण रचना – राधाकृष्णक अलौकिक प्रेमक वर्णन – गीत








