चारि वेद – अनन्त वेदक मुख्य शाखा एवं उपशाखा पर संछिप्त विश्लेषण
चारि वेद “अनन्तावै वेदाः” – “वेद अनन्त अछि”, लेकिन ऋषिगण हमरा सभक लेल एहि असीम वेद मे सँ मात्र किछुए मंत्र सब संकलन कय (पकड़ि) सकल छथि । ई मंत्र हमरा सब लेल एहि लोक मे सुख आ परलोक मे मोक्षक संग-संग सर्वजन (सम्पूर्ण ब्रह्माण्डक) कल्याण लेल पर्याप्त अछि । यद्यपि हम सब वेद केँ … चारि वेद – अनन्त वेदक मुख्य शाखा एवं उपशाखा पर संछिप्त विश्लेषण



