अपन पुरखाजनक महत्वपूर्ण परम्परा प्रति सचेत रहनाय परम जरूरी अछि
मोक्षदा एकादशीक प्रातक एकटा छोट प्रवीण सन्देश बन्धुगण, जीवन मे कर्म अनेकों करय पड़ैछ मनुष्य केँ । कर्महि गुणे धर्म होइछ । धर्मक सेहो कतेको रूप-रंग हम-अहाँ मिथिलावासी अपन पुरखाजन सँ सिखैत आयल छी । हमरा त सच पुछू माँ सेहो धार्मिक आ पिता सेहो धार्मिक भेटलथि । हालांकि माँ आ पिताक धार्मिकता मे फर्क … अपन पुरखाजनक महत्वपूर्ण परम्परा प्रति सचेत रहनाय परम जरूरी अछि









