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आब कहिया होयत मैथिली लिटरेचर फेस्टिवल ?

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मैथिली लिटरेचर फेस्टिवल

– मैथिली भाषा-साहित्य व कला-फिल्म आदिक क्षेत्र मे क्रान्तिक नव संचार करयवला आयोजन

मिथिलाभाषा यानि मैथिली – विश्व भरि मे पूर्ण भाषा रूप मे सुस्थापित अछि । एहि लेल कतेको महापुरुष लोकनि, कतेको लेखक-साहित्यकार व भाषाप्रेमी लोकनि विगत १०० वर्ष सँ बेसी सँ अनेकों महत्वपूर्ण कार्य कयलनि, कतेको रास शोध आलेख व भाषा विज्ञान आधारित विषय-वस्तु सब समेटिकय मैथिली एक स्वतंत्र भाषा थिक तेकरा अत्यन्त गणमान्य भाषाविद् यथा डा. सुभद्र झा, डा. अमरनाथ झा, डा. जयकान्त मिश्र, डा. हेतुकर झा आदि विद्वान् सब द्वारा प्रस्तुत कयल गेल । अपन अल्प अध्ययन मे जे किछु पढ़ि-बुझि सकलहुँ ताहि मे उपरोक्त विज्ञजन लोकनिक कार्य १९२० सँ १९६५ धरि, तत्पश्चातो अनेकों कार्य कयल गेल ।

किछु कार्य आनों-आनों भाषाविद् लोकनि द्वारा आइयो धरि होइत जा रहल अछि, जाहि मे पंडित गोविन्द झा, डा. राम अवतार यादव, डा. योगेन्द्र प्रसाद यादव, डा. रमानन्द झा ‘रमण’, डा. उदय नारायण सिंह ‘नचिकेता’, आदिक नाम मन-मस्तिष्क मे अभरैत अछि । एकर अलावे आरो कतेको गणमान्य शोधकर्ता एवं विद्वान् लोकनि छथि जे निरन्तर मैथिली भाषा-साहित्यक विभिन्न पक्ष पर अपन महत्वपूर्ण शोध एवं थिसिस सब प्रस्तुत कएने छथि ।

नवतुरिया मे सेहो अरुणाभ सौरभ द्वारा भाषाविज्ञान पक्षक किछु कार्य, डा. मिथिलेश झा द्वारा किछु कार्य – आरो जिनकर नाम हमरा नजरि मे नहि आबि सकल अछि से सब मैथिली लेल निरन्तर कार्य करैत रहला अछि । एहि तरहें मैथिली अपन स्वतंत्र आ सामर्थ्यवान् अस्तित्वक रक्षा करैत अछि, आगुओ करैत रहत ।

साहित्य लेखन मे त अनगिनत लोक छथि, तेँ नाम लिखिकय भावोद्गार प्रकट करब प्रवीण लेल सम्भव नहि । कतेको दावेदारी एहनो अछि जे ‘एकोऽहं द्वितीयोनाऽस्ति’, यानि हमहीं जे कयलहुँ तेँ ई एना ओ एना भेल, भ’ सकल आदि । मुदा हम मिथिलाभाषा रामायणक रचयिता कविश्वर चन्दा झा केँ ससम्मान ओ स्थान दैत छी जे मैथिली साहित्य केँ आधुनिक कालखंड मे अमरता प्रदान कयलनि ।

ज्योतिरिश्वर ठाकुर, विद्यापति, व प्राचीन समयक अन्यान्य विद्वान् लोकनिक मिथिलाभाषा सेवाक अलावे वर्तमान युगक ३०० प्रति किताब छपा साहित्य अकादमीक पुरस्कारक होड़ मे पड़निहार कतेको पुरस्कारलोभी लेखक समुदाय धरि आउ, मैथिली साहित्यक सेवा मे हजारों लोक लागल देखाइत छथि । मैदान एखनहुँ बुझू खालिये अछि । जखन मोन हो, जेना मोन हो, लिखू आ छपाउ, आगू बढ़ि जाउ । जमीन पर भले पाठक हो, साहित्य सँ सभक हित भेल या नहि, ई सब कोनो देखबाक जरूरत नहि छैक – हम लेखक छी, एहि अन्तर्भान लेल स्वहितपोषण कखनहुँ कयल जा सकैछ । ताहि पर सँ पीठ ठोकनिहारक कोनो कमी नहि आइ । बस, बढ़ि जाउ आ साहित्यकार बनि जाउ ।

२०१४ सँ आरम्भ ‘एमएलएफ’ केर भूमिका

मैथिली भाषा-साहित्य केँ विश्वपटल पर स्थापित करबाक लेल, मैथिलीक बाजार-विस्तार हेतु आ नव पीढ़ीक लोक मे निजभाषा प्रति आकर्षणक संग लेखक-साहित्यकार, संचारकर्मी, रंगकर्मी, कलाकर्मी, फिल्मकर्मी व भाषा सम्बन्धी विभिन्न आयाम सँ जुड़िकय ‘मैथिली जिन्दाबाद’ करनिहार कतेको झंडाबरदार लोकनि केँ जोड़बाक लेल ‘मैथिली लिटरेचर फेस्टिवल’ नव क्रान्ति अनलक एहि मे दुइ मत नहि । पूर्वहु मे प्रचलित अनेकों उपक्रम सब सँ मैथिलीक हितपोषण भेल, सगर राति दीप जरय केँ याद नहि करब त अपने दोष लागत । किछु लोक संचारसेवा – पत्र-पत्रिकाक प्रकाशनक सफल-असफल प्रयास कतेको ठाम सँ कयलनि, हुनका श्रेय नहि देब त अपने कलंक लागत ।

जयपुर (राजस्थान), काशी (यूपी), इलाहाबाद (यूपी), कोलकाता (बंगाल), गुआहाटी (आसाम), नई दिल्ली, जमशेदपुर (झारखंड), राँची (झारखण्ड), पटना (बिहार) केर अतिरिक्त नेपालक जनकपुर, काठमांडू, विराटनगर, राजविराज, बीरगंज, आदि सँ कतेको रास प्रकाशन सम्भव भेल । मिथिलाक मूल भूभाग दरभंगा, मधुबनी, सहरसा, सुपौल, आदिक स्वतःस्फूर्त सेवा प्रति त हजारों बेर नमन करबाक भाव जाग्रत भ’ रहल अछि प्रवीण हृदय मे । हर ओ व्यक्ति कि समूह कि संस्था – जे सब प्रकाशनकार्य मे समय-साधनक संयोग कयलनि ओ सब नमन योग्य छथि, अमर छथि, स्वर्ग आ मोक्षक भागी छथि ।

मैथिली लेखक संघ – एहि सँ आबद्ध विभिन्न व्यक्तित्व, विशेष रूप सँ नरेन्द्र झा, इन्द्रकान्त झा, कथाकार अशोक, डा. रमानन्द झा रमण, बुद्धिनाथ मिश्र, मोहन भरद्वाज तथा पटना मे निवास कयनिहार अन्यान्य वरेण्य साहित्यसेवी – मैथिलीप्रेमी लोकनि केँ मोन पाड़ैत संस्थाक महासचिव विनोद कुमार झा उर्फ सरकार केँ मोन पाड़ैत छी । तहिना अजित आजाद भाइजी सहित लेखक रमेश, दिलीप कुमार झा, किसलय कृष्ण, शैलेन्द्र शैली, रमेश रंजन झा, आदि केँ मोन पाड़ैत छी । अपने सब द्वारा ‘मैथिली लिटरेचर फेस्टिवल’ केर आरम्भ आ एकर रूपरेखा, समय व्यवस्थापन, विषय विमर्श, भिन्न-भिन्न प्रदर्शनी, आदिक शानदार संयोजन सहितक बात केँ प्रवीण हृदय सँ प्रणाम करैत अछि ।

धन्य ई एमएलएफ जे मैथिली भाषा-साहित्यक संग मिथिला सेहो कतेको डेग आगू बढ़ल एहि १ दशकक छोट समय मे । ई आगि जरैत रहय, कहियो नहि मिझाय । हालांकि मर्दक बेटा बड कम अछि संसार मे, बेसी पुरुष मे पुरुषत्वहि केर अभाव अछि…. तथापि जैह गोटेक-आधेक मर्दक बेटा बचल अछि ओ कम नहि अछि आ एमएलएफ जेहेन आयोजन २०२३ के बाद २ साल एक मर्दक बेटाक स्वास्थ्य अस्थिरताक कारण बाधित अछि, तेकर प्रवीण अन्तर्मन सँ चिन्तन करैत आगू लेल शुभकामना व्यक्त कय रहल अछि । बस ठाढ़ टा होउ – मर्दक बेटा सब अपने सोझाँ आबि जायत । आब मर्दक बेटाक ई अर्थ नहि लागय जे अगबे बेटे टा – बेटा मे ‘बेटी’ सेहो पड़ैत अछि जेना बम्बइ मे देखनहिये रही – कतेको मर्दक बेटा विथ बेटी ओतेक पैघ आयोजन केँ पूरा करा देलनि । आ दूर बैसल हम सब सेहो चूड़ी नहि पहिरने छी, हर तरहें अपन भाषाक भूमिका मे ठाढ़ रहबाक लेल कृत्संकल्पित छी ।

हरिः हरः!!

नोटः तस्वीर मे मुम्बइ एमएलएफ केर ओ मुद्रा अछि जाहि मे गीत सुनौने रही अपने सब केँ !! ॐ तत्सत् !!

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