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प्रवीण नारायण चौधरी

मोक्ष दुर्लभ नहि छैक जँ एतबी बात बुझि जाय तँ – भाग ३

स्वाध्याय – प्रवीण नारायण चौधरी ज्ञान कर्म संन्यास योग (कर्म, अकर्म आ विकर्म केर निरुपण) – भाग ३ गीताक चारिम अध्याय केँ ‘ज्ञान कर्म संन्यास योग – कर्म, अकर्म आ विकर्म केर निरुपण’ शीर्षक मे विद्वान् लोकनि प्रस्तुत कयलनि अछि। विगत किछु समय सँ बेर-बेर एहि अध्यायक अध्ययन करैत एकरा अलग-अलग टुकड़ा मे प्रस्तुत करबाक मोक्ष दुर्लभ नहि छैक जँ एतबी बात बुझि जाय तँ – भाग ३

मोक्ष दुर्लभ नहि छैक जँ एतबी बात बुझि जाय तँ – भाग २

स्वाध्याय – प्रवीण नारायण चौधरी ज्ञान कर्म संन्यास योग (कर्म, अकर्म आ विकर्म केर निरुपण) – भाग २ गीताक चारिम अध्याय केँ ‘ज्ञान कर्म संन्यास योग – कर्म, अकर्म आ विकर्म केर निरुपण’ शीर्षक मे विद्वान् लोकनि प्रस्तुत कयलनि अछि। विगत किछु समय सँ बेर-बेर एहि अध्यायक अध्ययन करैत एकरा अलग-अलग टुकड़ा मे प्रस्तुत करबाक मोक्ष दुर्लभ नहि छैक जँ एतबी बात बुझि जाय तँ – भाग २

आइयो जिबैत छथि मैथिल जनकक असल प्रजा – मैथिलक स्वधर्म निर्वहनक अद्भुत उदाहरण

विचार – प्रवीण नारायण चौधरी एखनहुँ छथि बाँचल विदेहराज मैथिल जनकक असल ‘मैथिल’ प्रजा हम मिथिलावासी केँ संस्कृत (शास्त्र, पुराण, उपनिषद् आदि मे) ‘तीरभुक्ति’ जेकर अपभ्रंश थिक ‘तिरहुत’ ताहि ठामक निवासी सेहो कहल गेल अछि। एकर अर्थ भेलैक जे हम सब अदौकाल सँ जलस्रोतक कछेर (पोखरि या नदीक महाड़ आदि) पर भोग आ मोक्ष मे आइयो जिबैत छथि मैथिल जनकक असल प्रजा – मैथिलक स्वधर्म निर्वहनक अद्भुत उदाहरण

अब की बार केकर सरकार यौ मतदाता सरकार?

सशक्त राष्ट्र लेल स्थायी सरकार आवश्यक – दृष्टिसम्पन्न प्रधानमंत्री आ मजगुत जनादेशक प्रत्यक्ष लाभ – २०२४-२५ धरि भारत चारिम शक्तिशाली विकसित अर्थतंत्र बनबाक सपना – जनहित आ राष्ट्रहित मे अनेकों कठोर निर्णय – भारत केँ हमेशा उद्वेलित आ कमजोर राखयवला विदेशी शक्ति कमजोर – आतंकवाद आ बाहरी शक्ति सँ मुक्तिक वातावरण भारत जेहेन विशाल लोकतंत्रक अब की बार केकर सरकार यौ मतदाता सरकार?

ई सौन्दर्य प्रतियोगिता किछु अलग होयबला अछि

कि विशेष आयोजन कय रहल छथि मिथिलाक ई युवा लोकनि आइ हमर ध्यानकेन्द्रित भेल अछि ‘फेस औफ मधेश प्रदेश’ नाम्ना एकटा आकर्षक बैनर पर। “फेस औफ मधेश प्रदेश” ‍- मिथिलाक्षेत्रीय नेपालक एक प्रान्त ‘मधेश प्रदेश’ मे मैथिली, भोजपुरी व विभिन्न भाषा-संस्कृति केँ सौन्दर्य प्रतियोगिताक माध्यम सँ ग्लोबल पटल पर उजागर (विस्तार) करबाक लेल आयोजन भ’ ई सौन्दर्य प्रतियोगिता किछु अलग होयबला अछि

मिथिलाभाषा रामायणः अयोध्याकाण्ड आठम अध्याय – भरत द्वारा राज्य अस्वीकृति आ राम केँ घुरेबाक प्रयास

कविचन्द्र विरचित मिथिलाभाषा रामायण अयोध्याकाण्ड – अध्याय आठम भरत द्वारा राज्य अस्वीकृति आ राम केँ घुरेबाक प्रयास ।चौपाइ। मुनि वसिष्ठ मंत्री-गण सहित । नृपतिक सभा गेला नृप-रहित ॥१॥ सुरपति-सभा समान विराज । अतिशय शोभित विबुध समाज ॥२॥ ब्रह्मा सन आसन-आसीन । धर्म्म-कर्म्म-रत धर्म्म-धुरीण ॥३॥ भरतहु काँ तत लेल बजाय । देश काल विधि कहल बुझाय मिथिलाभाषा रामायणः अयोध्याकाण्ड आठम अध्याय – भरत द्वारा राज्य अस्वीकृति आ राम केँ घुरेबाक प्रयास

मैथिली केँ नहि बन्हियौ आशा उषा आ निशा के दुपट्टा मे

फेसबुक पर मैथिली साहित्यकार केर एहि उक्ति पर ध्यान दियौक (संलग्न तस्वीर फेसबुक पोस्ट के स्क्रीन शौट पर देखू) – अपने थिकहुँ मैथिली भाषा-साहित्य प्रति सब दिन सक्रिय चिन्तन करनिहार आ यथायोग्य सृजनकर्म कयनिहार स्रष्टा लक्ष्मण झा सागर – हमर आदरणीय आ सम्माननीय श्रेष्ठ अग्रज। प्रणाम निवेदन संग किछु आर बात कहय चाहब – १. मैथिली केँ नहि बन्हियौ आशा उषा आ निशा के दुपट्टा मे

मोक्ष दुर्लभ नहि छैक जँ एतबे बात बुझि जाय तँ – भाग १

स्वाध्याय – प्रवीण नारायण चौधरी ज्ञान कर्म संन्यास योग (कर्म, अकर्म आ विकर्म केर निरुपण) – भाग १ (गीताक चारिम अध्याय पर आधारित स्वाध्याय आलेख) – प्रवीण नारायण चौधरी गीताक चारिम अध्याय केँ ‘ज्ञान कर्म संन्यास योग – कर्म, अकर्म आ विकर्म केर निरुपण’ शीर्षक मे विद्वान् लोकनि प्रस्तुत कयलनि अछि। विगत किछु समय सँ मोक्ष दुर्लभ नहि छैक जँ एतबे बात बुझि जाय तँ – भाग १

ज्ञानप्राप्तिक सर्वोत्कृष्ट मार्गः आत्मचिन्तन

ज्ञानप्राप्तिक सर्वोत्कृष्ट मार्ग – आत्मचिन्तन ब्रह्माण्ड रचयिता द्वारा पृथ्वीक रचना आ ताहि पर जीव रचना व प्रकृति परिकल्पनाक अद्भुत स्वरूप सँ भला के नहि परिचित होयब! अपन रचना पर निरन्तर चिन्तन सेहो करिते होयब। मायक कोखि सँ जन्म भेल, फल्लाँ हमर पिता भेलाह, फल्लाँ-फल्लाँ हमर सर-कुटुम्ब-परिजन-पुरजन भेलाह, आदि। ई सोचनाइये बहुत पैघ चिन्तन भेलय। आत्मचिन्तन ज्ञानप्राप्तिक सर्वोत्कृष्ट मार्गः आत्मचिन्तन

सत्याग्रह व्यक्ति विरूद्ध नहि प्रवृत्ति विरूद्ध होइत छैक

विचार – प्रवीण नारायण चौधरी सत्याग्रह व्यक्ति विरूद्ध नहि प्रवृत्ति विरूद्ध होइत छैक भारत मे हालहि ९ जनवरी २०२४ केँ ‘प्रवासी दिवस’ मनायल गेल। ई ओ ऐतिहासिक तारीख थिक जहिया दक्षिण अफ्रीका सँ महात्मा गाँधी स्वदेश भारत वापस आयल छलाह। अपोलो बन्दरगाह, बम्बई (आब मुम्बई) पर भारतीय कांग्रेस के हजारों कार्यकर्ता हुनकर जोरदार स्वागत कएने सत्याग्रह व्यक्ति विरूद्ध नहि प्रवृत्ति विरूद्ध होइत छैक