मिथिलाभाषा रामायण – अरण्यकाण्ड – पहिल अध्याय ‘विराधक बध’
मिथिलाभाषा रामायण – अरण्यकाण्ड कविचन्द्र विरचित मिथिलाभाषा रामायण केर अरण्यकाण्ड आरम्भ अथ अरण्यकाण्ड ।शिखरिणी छन्दः। भ्रमन्तौ कान्तारे क्षयितदनुजौ त्यक्तनगरौ ॥१॥ किशोरौ सद्वीरौ जनकतनया-रक्षणपरौ ॥२॥ जटावन्तौ दान्तौ करकमल-चापाशुगधरौ ॥३॥ सदापायास्तान्नो दशरथतनूजौ नरवरौ ॥४॥ भावार्थः दशरथ केर पुत्र किशोर, वीरवर, पराक्रमी, पुरुष-श्रेष्ठ राम आ लक्ष्मण हमरा लोकनिक पालन करथि जे राक्षस सब केँ मारिकय, नगर छोड़ि वन … मिथिलाभाषा रामायण – अरण्यकाण्ड – पहिल अध्याय ‘विराधक बध’









