मिथिलाभाषा रामायण – किष्किन्धाकाण्ड आठम अध्याय – सम्पाति केर आत्मकथा एवं आध्यात्मिक उपदेश
स्वाध्याय – प्रवीण नारायण चौधरी कवि चन्द्र विरचित मिथिला भाषा रामायण किष्किन्धाकाण्ड – आठम अध्याय सम्पाति केर आत्मकथा एवं आध्यात्मिक उपदेश ॥अथ अष्टमोऽध्यायः॥ ।चौपाइ। उड़लहुँ हम जटायु दुहु भाय । रवि-रथ रोकब सत्वर जाय ॥१॥ भ्राता युगल अतुल बल मानि । तरुण अवस्था गुणल न हानि ॥२॥ घुरला बन्धु असह्य विचारि । हम नहि मानल … मिथिलाभाषा रामायण – किष्किन्धाकाण्ड आठम अध्याय – सम्पाति केर आत्मकथा एवं आध्यात्मिक उपदेश




