चिन्ता नहि, चिन्तन करूः पठनीय-विचारनीय लेख
लेख – प्रवीण नारायण चौधरी चिन्तन करू – चिन्ता नहि करू चित्त मे जाहि बातक उच्चारण बेर-बेर होइत रहैछ, वैह सहज भाषा मे चिन्तन थिक। आ चित्त मे शंका-अविश्वासक चलते जे डर होइछ से चिन्ता छी। चिन्तन सदैव सुन्दर सोच-विचार आ सकारात्मकता प्रदान करैछ, तेँ सुख-शान्तिक घर छी। चिन्ता सदैव भय-दुविधा आ नकारात्मकता उत्पन्न करैछ, … चिन्ता नहि, चिन्तन करूः पठनीय-विचारनीय लेख









