रामचरितमानस मोतीः भरत विरह एवं भरत-हनुमान् मिलन
स्वाध्याय – प्रवीण नारायण चौधरी रामचरितमानस मोती भरत विरह एवं भरत-हनुमान् मिलन १. श्री रामजीक वनवास सँ वापस अयबाक अवधि केर एकटा दिन बचि गेल छल, अतएव नगर भरिक लोक खूब आतुर भ’ रहल छथि। रामक वियोग मे दुब्बर भेल स्त्री-पुरुष जतय-ततय विचार कय रहल छथि जे कि बात छैक, श्री राम एखन धरि कियैक … रामचरितमानस मोतीः भरत विरह एवं भरत-हनुमान् मिलन



