रामचरितमानस सँ सीख-५
स्वाध्याय १. रसगर हो वा अत्यन्त फीका – अपन कविता केकरा नहि नीक लगैत छैक! २. एहि संसार मे पोखरि आर नदी जेकाँ बेसी लोक भेटैत अछि जे बाढिक जल ग्रहण कय बढैत अछि अर्थात् अपन उन्नति सँ प्रसन्न होएत अछि। समुद्र जेहेन बहुत कम लोक भेटत जे चन्द्रमाक पूर्णता देखि उछाल भरैत अछि, यादि … रामचरितमानस सँ सीख-५








