मैथिलीक यात्री आ हिन्दीक नागार्जुन केर जयन्तीपर याद करैत युवा सर्जक ‘विकास वत्सनाभ’
जनकवि हूँ, मैं साफ कहूँगा, क्यों हकलाऊँ ११ जून १९११, जेठक दपदप इजोरिआ सँ नहाएल प्रकृतिक आँगन मे एकटा सोनाहुल इजोत होइत छैक। एहि उजास सँ साहित्याकाश पर काबीज अन्हरिया नहुए-नहु फाटए लगैत छैक। अभीप्सित समाजक उपेक्षाक नोर सँ आखर मे चिनगी लगैत छैक। अनाथ स्वर केँ स्वयं बैद्यनाथ भेटैत छैक जे अपन नामक अनुकूल … मैथिलीक यात्री आ हिन्दीक नागार्जुन केर जयन्तीपर याद करैत युवा सर्जक ‘विकास वत्सनाभ’









