मिथिलाभाषा रामायणः अरण्यकाण्ड दसम अध्याय – शबरी सँ भेंट आ ओकर मोक्ष प्राप्त करब
स्वाध्याय – प्रवीण नारायण चौधरी कविचन्द्र विरचित मिथिलाभाषा रामायण अरण्यकाण्ड – दसम अध्याय शबरी सँ भेंट आ ओकर मोक्ष प्राप्त करब ।चौपाइ। ओ वन छोड़ि वनान्तर प्राप्त । सीता-विरह-अग्नि मन व्याप्त ॥१॥ शबरी देखल प्रभुक स्वरूप । आइलि आनन्दमयि चुप चूप ॥२॥ मन एकाग्र सनक सन केश । दिनकर-कान्ति तपस्विनि-वेश ॥३॥ राम-चरण पर धयलनि माथ … मिथिलाभाषा रामायणः अरण्यकाण्ड दसम अध्याय – शबरी सँ भेंट आ ओकर मोक्ष प्राप्त करब




