विद्यापतिक पदावली आ ओकर सहज भावार्थ
१. ३१ अक्टूबर २०२४, विराटनगर (दीपावली पाबनि दिन सँ शुभारम्भ) वन्दना – महाकवि विद्यापति नन्दक नन्दन कदम्बक तरु-तर धिरे धिरे मुरलि बजाव ।१। समय सँकेत-निकेतन बइसल बेरि बेरि बोलि पठाव ॥२॥ सामरि, तोरा लागि अनुखन विकल मुरारि ।३। जमुनाक तिर उपवन उदबेगल फिरि फिरि ततहि निहारि ॥४॥ गोरस बेचए अबइत जाइत जनि जनि पुछ बनमारि … विद्यापतिक पदावली आ ओकर सहज भावार्थ






